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मां की मौत के सदमे में बीमार बेटे की भी गई जान
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खेतासराय। मां की चिता की आग अभी पूरी तरह ठंडी भी नहीं हुई थी कि इकलौते बेटे की भी जान चली गई। मामला क्षेत्र के शाहापुर गांव का है। चार दिनों के अंतराल में मां-बेटे की मौत से परिवार में कोहराम मचा हुआ है। वहीं ग्रामीण भी सकते में हैं।
शाहापुर गांव निवासी कृपाशंकर यादव (58) खेती कर परिवार की जीविका चलाते थे। पिछले दस दिनों से उनकी तबीयत खराब थी। स्थानीय डॉक्टरों से दवा लेकर उपचार कर रहे थे। सुधार न होने पर पुत्र अनिरुद्ध उन्हें लेकर जिला अस्पताल गए, लेकिन भर्ती नहीं हो सकीं। यहां-वहां भटकने के बाद सभी घर चले आए। इसी बीच 27 अप्रैल को कृपाशंकर की मां राजदेई का निधन हो गया। वह पहले से ही बीमार चल रही थीं। मां के निधन के बाद कृपाशंकर की हालत और बिगड़ गई। सांस लेने में दिक्कत होने पर परिजन फिर 28 को जौनपुर ले गए। कई अस्पतालों के चक्कर लगाने के बाद भी बेड नहीं मिल सका। बाद में किसी तरह शाहगंज के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। काफी कोशिशों के बाद भी हालत में सुधार नहीं हुआ और शनिवार को उनकी मौत हो गई।
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कोरोना के भय से अंतिम संस्कार को नहीं आए ग्रामीण
कृपाशंकर की मौत के बाद कोरोना से मौत की आशंका से ग्रामीण सहमे रहे। लिहाजा कोई भी शव के पास नहीं आया। परिवार में पुत्र, भांजा और भाई के अलावा कोई अन्य कंधा देने वाला नहीं था। काफी इंतजार के बाद भी ग्रामीणों ने मदद में रुचि नहीं दिखाई। जानकारी होने पर पहुंचे गांव निवासी व सपा नेता भीम यादव ने हाथ में ग्लब्स और मुंह पर मास्क लगाकर शव को कंधा दिया।
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शाहापुर गांव निवासी कृपाशंकर यादव (58) खेती कर परिवार की जीविका चलाते थे। पिछले दस दिनों से उनकी तबीयत खराब थी। स्थानीय डॉक्टरों से दवा लेकर उपचार कर रहे थे। सुधार न होने पर पुत्र अनिरुद्ध उन्हें लेकर जिला अस्पताल गए, लेकिन भर्ती नहीं हो सकीं। यहां-वहां भटकने के बाद सभी घर चले आए। इसी बीच 27 अप्रैल को कृपाशंकर की मां राजदेई का निधन हो गया। वह पहले से ही बीमार चल रही थीं। मां के निधन के बाद कृपाशंकर की हालत और बिगड़ गई। सांस लेने में दिक्कत होने पर परिजन फिर 28 को जौनपुर ले गए। कई अस्पतालों के चक्कर लगाने के बाद भी बेड नहीं मिल सका। बाद में किसी तरह शाहगंज के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। काफी कोशिशों के बाद भी हालत में सुधार नहीं हुआ और शनिवार को उनकी मौत हो गई।
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कोरोना के भय से अंतिम संस्कार को नहीं आए ग्रामीण
कृपाशंकर की मौत के बाद कोरोना से मौत की आशंका से ग्रामीण सहमे रहे। लिहाजा कोई भी शव के पास नहीं आया। परिवार में पुत्र, भांजा और भाई के अलावा कोई अन्य कंधा देने वाला नहीं था। काफी इंतजार के बाद भी ग्रामीणों ने मदद में रुचि नहीं दिखाई। जानकारी होने पर पहुंचे गांव निवासी व सपा नेता भीम यादव ने हाथ में ग्लब्स और मुंह पर मास्क लगाकर शव को कंधा दिया।
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