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Jaunpur News: पांच गांवों के सात हजार लोग अब भी पी रहे फ्लोराइडयुक्त पानी, दिव्यांगता का इलाज नहीं
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मुंगराबादशाहपुर (जौनपुर)। बेलवार सुजानगंज मार्ग पर स्थित पांच गांवों के लोग फ्लोराइड युक्त पानी पीने को विवश हैं। इसके चलते इन गांंवोंं के लोग दिव्यांग हो रहे हैं। 25 सालों में 36 लोग दिव्यांग हो गए लेकिन इनका उपचार नहीं हो सका। वर्तमान में 25 लोग दिव्यांग हैं। पांच महीने पहले स्वास्थ्य विभाग के साथ बीएचयू की टीम इन गांवों मेंं पहुंचकर सर्वे करने के बाद रिपोर्ट प्रशासन को सौंप दी थी। बताया था कि ग्रामीण हैंडपंप का पानी न पीएं। इसके बावजूद ग्रामीणों को आज भी स्वच्छ जल मुहैया नहीं हो रहा है। इसे लेकर जिम्मेदार मौन है।
स्वास्थ्य विभाग और बीएचयू की टीम ने अगस्त 2023 मेंं चार दिनों तक फत्तूपुर गांव के हैंडपंपों में पानी की जांच की थी। यहां पर पानी में 7.8 पीपीएम फ्लोराइड पाया गया जो औसत से कई गुणा अधिक है। इसके लिए यहां के कुछ हैंडपंप चिन्हित किए गए थे, जिसमें फ्लोराइड की मात्रा अधिक पाई गई थी। ऐसे में पीड़ितों को दूसरे साधनों से पानी पीने की सलाह दी गई थी।
मुंगराबादशाहपुर क्षेत्र के फत्तूपुर कलां, कैथापुर, मझगवां, सारायकाशी, चंदौकी गांव के पानी मेें कई गुना अधिक फ्लोराइड की मात्रा पाई गई है। ऐसे में यहां बच्चों की उम्र जैसे ही पढ़ने लिखने की होती हैं वैसे ही वह दिव्यांगता के शिकार हो जाते हैं। 25 सालों में यहां पर इसकी चपेट में करीब 36 लोग आए लेकिन इनका उपचार नहीं हो सका। पीड़ित बताते हैं कि अचानक पैर में दर्द शुरू होता है फिर धीरे-धीरे हाथ पैर टेढ़े होने लगते हैं। कोई दवा काम नहीं करती। दर्द निवारक दवा के सहारे जिंदगी गुजरती व घसीटती रहती है। दिव्यांगता के भय से गांव के लोग पलायन कर रहे हैं। इन गांवों में अब बेटे और बेटियों की शादियां नहीं हो रही हैं। ग्राम प्रधान अशोक कुमार पाल ने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत पाइप लाइन तो बिछाई जा रही है लेकिन अभी तक टंकी नहीं तैयार है। ऐसे में यह लोग उसी हैंडपंप का पानी पीने को मजबूर हैं।
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इन गांवों के ये हैं पीड़ित :-
फत्तूपुर कलां गांव के स्वामीनाथ की पत्नी प्रेमा देवी(40), पुत्र शिवपूजन(14) व पुत्री साधना(12) पांच साल पहले से ही इस रोग के शिकार हुए हैं। इसी गांव के राधेश्याम की पत्नी सीता देवी(40) भी अचानक दिव्यांग हुई, जिनकी कुछ दिनों बाद मौत हो गई। राधेश्याम की बहू मीरा गांव में ब्याहकर आई तो सही सलामत थी अचानक पैर में दर्द उठा और उसके हाथ पैर टेढ़े होने लगे तो वह घर छोड़कर मायके चली गई। मझगवां गांव की भुगना देवी(50) पत्नी लालमणि का बीमारी के चलते निधन हो गया। गांव की ललिता देवी(25) पत्नी सुनील कुमार, सुरेंद्र कुमार(27), राजेंद्र कुमार(26) दिव्यांगता के शिकार हुए। लालमणि(55) की भी दिव्यांगता से मौत हो गई। कैथापुर गांव की सोनिका(25) पुत्री गुलशन, विकास कुमार(18), चंदौकी गांव के विपिन चंद्र(28) पुत्र ईश्वरलाल और सारायकाशी गांंव की शिवकुमारी(45) पत्नी तुलसीराम व उनकी पुत्री भी दिव्यांग है। गांव की नेहा(25) पुत्री स्वयंवर, उसकी मां चमेला देवी दिव्यांग हैं।
वर्जन ...
बीएचयू के साथ स्वास्थ्य विभाग की टीम प्रभावित गांंव में पहुंची थी। सर्वे में पाया कि सिर्फ फत्तूपुर गांव में आठ से नौ लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं। यहां के हैंडपंप वाले पानी में फ्लोराइड अधिक पाया जाता है, जिसको चिन्हित करते हुए उसका उपयोग न करने का निर्देश दिया गया था। रिपोर्ट प्रशासन को सौंप दी गई है। पीड़ितों को चाय, काफी, गुटखा व पान न खाने और प्रोटीन लेने की सलाह दी गई।-डॉ.जिआउल हक, जिला महामारी रोग विशेषज्ञ।
कोट
जनपद में जलजीवन मिशन के तहत बोरिंग के दौरान पानी की क्वालिटी की टेस्टिंग कराई जाती है। इसको लेकर कई जगहों पर दो बार बोरिंग भी करानी पड़ी। आने वाले छह-सात महीने में जब सभी जगहों पर हर घर नल पहुंच जाएगा तो स्वयं ही लोगों को शुद्ध पानी मिलेगा। इससे किसी प्रकार का खतरा नहीं होगा। मुंगराबादशाहपुर में फत्तूपुर में गंभीर बीमारी से पीड़ितों को भी राहत मिलेगी। -साई तेजा सीलम, मुख्य विकास अधिकारी।
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स्वास्थ्य विभाग और बीएचयू की टीम ने अगस्त 2023 मेंं चार दिनों तक फत्तूपुर गांव के हैंडपंपों में पानी की जांच की थी। यहां पर पानी में 7.8 पीपीएम फ्लोराइड पाया गया जो औसत से कई गुणा अधिक है। इसके लिए यहां के कुछ हैंडपंप चिन्हित किए गए थे, जिसमें फ्लोराइड की मात्रा अधिक पाई गई थी। ऐसे में पीड़ितों को दूसरे साधनों से पानी पीने की सलाह दी गई थी।
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मुंगराबादशाहपुर क्षेत्र के फत्तूपुर कलां, कैथापुर, मझगवां, सारायकाशी, चंदौकी गांव के पानी मेें कई गुना अधिक फ्लोराइड की मात्रा पाई गई है। ऐसे में यहां बच्चों की उम्र जैसे ही पढ़ने लिखने की होती हैं वैसे ही वह दिव्यांगता के शिकार हो जाते हैं। 25 सालों में यहां पर इसकी चपेट में करीब 36 लोग आए लेकिन इनका उपचार नहीं हो सका। पीड़ित बताते हैं कि अचानक पैर में दर्द शुरू होता है फिर धीरे-धीरे हाथ पैर टेढ़े होने लगते हैं। कोई दवा काम नहीं करती। दर्द निवारक दवा के सहारे जिंदगी गुजरती व घसीटती रहती है। दिव्यांगता के भय से गांव के लोग पलायन कर रहे हैं। इन गांवों में अब बेटे और बेटियों की शादियां नहीं हो रही हैं। ग्राम प्रधान अशोक कुमार पाल ने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत पाइप लाइन तो बिछाई जा रही है लेकिन अभी तक टंकी नहीं तैयार है। ऐसे में यह लोग उसी हैंडपंप का पानी पीने को मजबूर हैं।
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इन गांवों के ये हैं पीड़ित :-
फत्तूपुर कलां गांव के स्वामीनाथ की पत्नी प्रेमा देवी(40), पुत्र शिवपूजन(14) व पुत्री साधना(12) पांच साल पहले से ही इस रोग के शिकार हुए हैं। इसी गांव के राधेश्याम की पत्नी सीता देवी(40) भी अचानक दिव्यांग हुई, जिनकी कुछ दिनों बाद मौत हो गई। राधेश्याम की बहू मीरा गांव में ब्याहकर आई तो सही सलामत थी अचानक पैर में दर्द उठा और उसके हाथ पैर टेढ़े होने लगे तो वह घर छोड़कर मायके चली गई। मझगवां गांव की भुगना देवी(50) पत्नी लालमणि का बीमारी के चलते निधन हो गया। गांव की ललिता देवी(25) पत्नी सुनील कुमार, सुरेंद्र कुमार(27), राजेंद्र कुमार(26) दिव्यांगता के शिकार हुए। लालमणि(55) की भी दिव्यांगता से मौत हो गई। कैथापुर गांव की सोनिका(25) पुत्री गुलशन, विकास कुमार(18), चंदौकी गांव के विपिन चंद्र(28) पुत्र ईश्वरलाल और सारायकाशी गांंव की शिवकुमारी(45) पत्नी तुलसीराम व उनकी पुत्री भी दिव्यांग है। गांव की नेहा(25) पुत्री स्वयंवर, उसकी मां चमेला देवी दिव्यांग हैं।
वर्जन ...
बीएचयू के साथ स्वास्थ्य विभाग की टीम प्रभावित गांंव में पहुंची थी। सर्वे में पाया कि सिर्फ फत्तूपुर गांव में आठ से नौ लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं। यहां के हैंडपंप वाले पानी में फ्लोराइड अधिक पाया जाता है, जिसको चिन्हित करते हुए उसका उपयोग न करने का निर्देश दिया गया था। रिपोर्ट प्रशासन को सौंप दी गई है। पीड़ितों को चाय, काफी, गुटखा व पान न खाने और प्रोटीन लेने की सलाह दी गई।-डॉ.जिआउल हक, जिला महामारी रोग विशेषज्ञ।
कोट
जनपद में जलजीवन मिशन के तहत बोरिंग के दौरान पानी की क्वालिटी की टेस्टिंग कराई जाती है। इसको लेकर कई जगहों पर दो बार बोरिंग भी करानी पड़ी। आने वाले छह-सात महीने में जब सभी जगहों पर हर घर नल पहुंच जाएगा तो स्वयं ही लोगों को शुद्ध पानी मिलेगा। इससे किसी प्रकार का खतरा नहीं होगा। मुंगराबादशाहपुर में फत्तूपुर में गंभीर बीमारी से पीड़ितों को भी राहत मिलेगी। -साई तेजा सीलम, मुख्य विकास अधिकारी।