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Jaunpur News: 30 महीने से पाकिस्तान की जेल में कैद हैं जौनपुर के सात मछुआरे, जानकारी के अभाव में लांघे थे बॉर्डर

Thu, 15 Aug 2024 03:44 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 15 Aug 2024 03:44 AM IST
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Seven fishermen from Jaunpur are imprisoned in Pakistan jail for 30 months, crossed the border due to lack of information
रमाशंकर शुक्ला
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मछलीशहर। जानकारी के अभाव में सरहद लांघ कर पाकिस्तान पहुंचे क्षेत्र के सात मछुआरे 30 महीनों से वहां की जेल में कैद में हैं। ये मछुआरे गुजरात के अरब सागर में मछली पकड़ने के दौरान गलती से पाकिस्तान की सीमा में घुस गए थे। तभी से वहां की जेल में हैं। इनके परिवार की माली हालत खराब है। जैसे-तैसे परिवार जीविकोपार्जन कर रहा है। कई बार जिले के उच्चाधिकारियों से गुहार लगाई लेकिन सुनवाई होती नहीं दिख रही है।

मछलीशहर के सात मछुआरे गुजरात में रोजी रोटी के सिलसिले में समुद्र में मछली पकड़ने के काम में लगे थे। 8 फरवरी 2022 को मछली पकड़ने के दौरान ही नाव जानकारी के अभाव में गलती से पाकिस्तान की सीमा में घुस गई। पाकिस्तानी सेना ने सातों मछुआरों को गिरफ्तार कर लिया। मछलीशहर कोतवाली क्षेत्र के बसिरहा गांव निवासी विनोद कुमार की पत्नी हीरावती का रो-रोकर बुरा हाल है। दौड़ते-दौड़ते थक गए हैं लेकिन कोई सुनता नहीं। हीरावती के दो बच्चे रंजीत (14) आठवीं और अमित (7) तीसरी में पढ़ता है। वह किसी तरह से घर चला कर जीवन यापन कर रही है। कुछ ऐसा ही हाल गांव के घुरहू बिंद की पत्नी पार्वती का है। पार्वती ने भी रो कर दुख बयां किया। पति की वापसी की गुहार लगाई। उसके छह बच्चे हैं जिसमें चार लड़कियां शकुंतला, सीता व अवतारी की शादी हो चुकी है। संतोषी (18) और दो बेटे धीरज (19), नीरज ( 10) की परवरिश करना दूभर हो रहा है। इसी तरह का हाल अन्य पांचों के घर का है। बगल के गांव नंदापुर निवासी लालमणि बिंद, सुरेश कुमार बिंद गुड्डू, चौबेपुर घघरिया गांव के राजनाथ बिंद, सुरेश के रिश्तेदार मीरगंज थाना क्षेत्र के घाटमपुर निवासी मुलायम एवं धीरज बिंद के घर का भी देखने को मिला। सभी झोपड़ी बना कर किसी तरह से रह कर जीवन यापन कर रहे। सभी अपने घर के अकेले कमाने वाले थे और दो साल से पाकिस्तान की जेल में बंद हैं।
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अधिकारी या जनप्रतिनिधि कोई नहीं आया काम

मछुआरों के परिजनों ने रो कर बताया कि दो साल बीत गए। किसी का बेटा तो किसी का पति पाकिस्तान की जेल में बंद हैं। हमें आशंका है कि कहीं उन्हें मार न दिया गया हो। लोगों ने बताया कि दुख की घड़ी में न तो अधिकारी काम आ रहे हैं और न ही जनप्रतिनिधि। सिर्फ भगवान का असरा है।
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महिलाएं व बुजुर्ग मजदूरी कर चला रहे घर

मछुआरों के घर की महिलाएं और बुजुर्ग बीते दो वर्षों से आस-पास के खेतों में मजदूरी कर घर चला रहे हैं। इन सभी के पास रहने को मुकम्मल छत भी नहीं है। किसी तरह झोपड़ी बना कर गुजर बसर करते हैं।


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वर्जन

इन परिवारों की ओर से अभी तक कोई पत्र ऐसा नहीं प्राप्त है। आपके अखबार के माध्यम से संज्ञान में आया है। इन परिवार से संपर्क कराएंगे। साथ ही सभी मछुआरों को छुड़ाने के लिए केंद्रीय गृह और रक्षा मंत्रालय को भी पत्र लिखेंगे।

- रवींद्र मांदड़, डीएम, जौनपुर
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