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खुद के ऑक्सीजन सिलिंडर लगाकर मरीजों को दी संजीवनी

Thu, 29 Apr 2021 08:25 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 29 Apr 2021 08:25 PM IST
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Sanjeevani given to patients by applying their own oxygen cylinders
जौनपुर। मदद करने का जज्बा तो संसाधन कभी भी आड़े नहीं आते। सेवा की ऐसी ही मिसाल पेश की है विक्की अग्रहरी ने। अहियापुर निवासी विक्की ने उन मरीजों को निशुल्क ऑक्सीजन उपलब्ध कराया, जो बेड के अभाव में जिला अस्पताल में भर्ती नहीं हो पाए थे। जान बचाने के लिए छटपटाते इन मरीजों को विक्की ने अपने एंबुलेंस में रखा ऑक्सीजन निकालकर तत्काल उपलब्ध कराया। विक्की की पहल से कई मरीजों को तात्कालिक राहत मिली है। उनकी इन कोशिशों की सराहना हर तरफ रही। विक्की प्राइवेट एंबुलेंस चलवाते हैं। उनके पास दो एंबुलेंस में उपयोग के लिए तीन ऑक्सीजन सिलिंडर उपलब्ध थे। कोरोना काल में सांस के रोगियों की अचानक संख्या बढ़ने से हर तरफ ऑक्सीजन की किल्लत शुरू हो गई। मरीज जिला अस्पताल और निजी अस्पतालों का चक्कर लगा रहे हैं। कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद मरीजों को उपचार में दिक्कत शुरू हो जा रही है। वैसे तो जिला प्रशासन लगातार बेहतर सुविधा मुहैया कराने में लगा है, लेकिन मरीजों की अचानक से बढ़ी संख्या के आगे संसाधन कम पड़ जा रहे हैं। ऐसे में विक्की ने भी मदद को हाथ आगे बढ़ाया है। बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल में सांस की बीमारी से जुड़े कई मरीज पहुंचे थे। उन्हें ऑक्सीजन की जरुरत थी, मगर अस्पताल में बेड न होने के कारण उन्हें तत्काल कोई व्यवस्था मुहैया नहीं कराई जा सकी। जिंदगी के लिए छटपटाते मरीजों को देख विक्की ने एंबुलेंस में रखे सिलिंडर निकाला और तत्काल मरीजों को ऑक्सीजन की व्यवस्था मुहैया कराई। उन्हें ऐसा करते देख एक अन्य एंबुलेंस संचालक ने भी अपने पास मौजूद तीन सिलिंडर उपलब्ध करा दिया। एक अन्य व्यक्ति ने भी पिता के लिए लाए गए दो ऑक्सीजन सिलिंडर प्रदान किए। इसके बाद तो फिर अस्पताल के बाहर छटपटा रहे मरीजों को जैसे जीवन मिल गया। आठ सिलिंडर के माध्यम से 12 से अधिक मरीजों को राहत दी गई। हालांकि बाद में प्रशासन को अस्पताल के सामने फर्श पर लिटाकर ऑक्सीजन लगाने की जानकारी हुई तो किसी तरह व्यवस्था कर सभी मरीजों को अंदर शिफ्ट किया गया। विक्की ने बताया कि कोरोना काल में मरीजों की छटपटाहट देखी नहीं गई। पैसे तो फिर आ जाएंगे, लेकिन जरुरतमंदों की सेवा कर जो सुकून मिला है, वह आज तक नहीं कमा पाया था।
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