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मनरेगा से ग्रामीण तालाबों को मिली संजीवनी, शहरों का पुरसाहाल नहीं

Mon, 08 Feb 2021 11:43 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 08 Feb 2021 11:43 PM IST
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Rural ponds get Sanjeevani from MNREGA, cities are not in good shape
जौनपुर। भूजल के बेतहाशा दोहन से तेजी से घटते जलस्तर को मनरेगा से संवारे गए तालाबों और नए चेकडैम ने संजीवनी दी है। नए पोखरों की खोदाई और सुंदरीकरण ने ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल की समस्या को कुछ हद तक दूर किया है, लेकिन शहरी क्षेत्रों में स्थिति अभी भी खराब है। घर-घर लगते सबमर्सिबल पंपों के कारण शहर में पानी का जलस्तर लगातार गिर रहा है। जल संरक्षण के नए स्रोत विकसित न किए जाने से हालात गंभीर हो रहे हैं।
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जल संरक्षण के लिए सरकार ने सभी सरकारी संस्थानों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को लगवाने का निर्देश दिया है। बावजूद अधिकांश सरकारी संस्थानों में इसकी व्यवस्था नहीं है। जलसंकट से बेखबर लोग निजी आवासों में भी इसका इंतजाम नहीं कर रहे। अलबत्ता कुएं, हैंडपंप की जगह सबमर्सिबल और मोटर पंप से पानी का बेतहाशा दोहन कर रहे हैं। शहरी क्षेत्र में बनने वाले अधिकांश मकानों में पानी के लिए निजी स्रोत का ही चलन तेजी से बढ़ा है। साधन संपन्न लोग सबमर्सिबल लगवा रहे हैं। इसका खामियाजा आसपास के उन लोगों को भुगतना पड़ रहा है, जो कुएं, हैंडपंप के पानी पर निर्भर हैं। अतिक्रमण के चलते पुराने जलस्रोत एक-एक कर खत्म हो रहे हैं। इससे भी काफी असर पड़ा है। शहर के नईगंज, रुहट्टा, नखास, ओलंदगंज, जेसीज सहित कई इलाकों में हैंडपंप अभी से दगा देने लगे हैं। जेसीज, चांदमारी, पुरानी बाजार में वर्षों पुराने तालाब अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुके हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में तो जल संरक्षण के लिए तालाब खोदाई पर जोर है, मगर शहरी क्षेत्र में पुराने संसाधनों को भी संवारने में ध्यान नहीं दिया जा रहा।
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गांव में बन रहे 105 तालाब, 11 चेकडैम
ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति पर गौर करें तो मनरेगा से खोदे जा रहे नए तालाबों से काफी लाभ हुआ है। इस वर्ष प्रशासन ने 105 नए तालाब खोदने और सुंदरीकरण का लक्ष्य रखा है। इसमें 45 तालाबों का निर्माण भी पूरा हो गया है। वहीं लघु सिंचाई विभाग से 11 चेक डैम बनाने का कार्य किया जा रहा है। इसमें से नौ चेक डेम बन चुके हैं। दो पर कार्य जारी है। जिला मुख्यालय सहित ब्लाक व तहसील मुख्यालयों पर मौजूद सरकारी कार्यालयों में रेन वाटर हार्वेस्टिंगसिस्टम भी बनाया गया है।
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डार्क जोन में चिह्नित हैं आठ ब्लाक
जिले में कुल 21 ब्लाक हैं। इसमें से आठ ब्लाकों को डार्क जोन में चिह्नित किया गया है। केराकत, मुफ्तीगंज, करंजाकला, सिरकोनी, सिकरारा, बदलापुर, महराजगंज, बक्शा है। इनमें से अधिकांश ब्लाक शहर से सटे हुए हैं। इन ब्लाकों में भूगर्भ जल स्तर उपर उठाने के लिए विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हैंडपंप व पंपिंग सेट लगाने पर रोक लगा दिया गया है।

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जिले में प्राकृतिक जल श्रोतों को बढ़ाने के लिए तालाब व चेक डैम बनाने सहित ग्राम पंचायतों में पहले से मौजूद पोखरों को अस्तिव में लाकर सुंदरीकरण कराया जा रहा है। सरकारी कार्यालयों में रेन वाटर हारवेस्टिंग सिस्टम भी बनाया गया है, जिससे बारिश का पानी का संचयन हो सके। यह कार्य जिले में चिंहित आठ डार्क जोन ब्लाकों में विशेष रूप से कराया जा रहा है। -बीबी सिंह, जिला विकास अधिकारी
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