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सीवर लाइन के लिए खोद कर छोड़ दी गई सड़कें, लोग परेशान

Mon, 27 Sep 2021 12:17 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 27 Sep 2021 12:17 AM IST
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Roads abandoned for sewer lines, people upset
शहरवासियों को सीवर लाइन की सुविधा मिलने में अभी और देर होगी। शहर से निकलने वाले सीवेज के निस्तारण के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) भी तय समय पर चालू नहीं हो पाएगा। हालांकि एसटीपी का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है और 95 फीसदी कार्य भी पूरा हो चुका है लेकिन सीवर लाइन डालने का कार्य अभी एक चौथाई भी पूरी नहीं हो पाया है। सीवर लाइन डालने के लिए कार्यदायी संस्था जल निगम ने सड़कों को खोदकर छोड़ दिया है। इसके चलते लोगों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के मौसम में लोगों की दिक्कतें और बढ़ गई हैं।
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शहरवासियों को सीवेज निस्तारण की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 159 किमी पाइप लाइन डाली जानी है। यह कार्य पहले अगस्त में पूरा किया जाना था, जिसकी समय बढ़ाकर दिसंबर 2021 तक कर दिया गया है। इस बीच सीवर लाइन लाइन का कार्य अभी एक चौथाई भी पूरा नहीं हो पाया है। कार्यदायी संस्था अभी तक सिर्फ 30 किमी पाइप लाइन ही डाल सकी है। ऐसे में खुद ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि दिसंबर तक काम कैसे पूरा हो पाएगा। सीवर लाइन का कार्य पूरा नहीं हो पाने से एसटीपी चालू करने में भी देर हो सकती है।
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सवा तीन लाख आबादी वाले शहर में प्रतिदिन 28 एमएलडी सीवेज का निस्तारण होता है। यह सीवेज विभिन्न नालियों और नालों से होकर आदि गंगा गोमती नदी में सीधे गिरता है। गोमती नदी में सीवेज का सीधे निस्तारण न हो, इसके लिए नमामि गंगे और अमृत योजना के तहत सीवर लाइन डालने व एसटीपी के निर्माण की योजना स्वीकृत है। इन दोनों योजनाओं के लिए कुल 470.80 करोड़ रुपये स्वीकृत है। इसमें से नमामि गंगे योजना के तहत 206.05 करोड़ की धनराशि से 30 एमएलडी क्षमता के एसटीपी के निर्माण और तीन पंपिंग स्टेशन बनाने का प्रस्ताव है। अमृत योजना के तहत 264.77 करोड़ की धनराशि से 159 किमी सीवर लाइन और एक पंपिंग स्टेशन बनाने का प्रस्ताव है। प्रत्येक पंपिंग स्टेशन की 12 एमएलडी की है। इसके निर्माण का कार्य अक्तूबर 2019 से शुरू किया गया था, जिसे दिसंबर माह में पूरा किया जाना है। इस बीच कार्यदायी संस्था ने फिलहाल एसटीपी का निर्माण कार्य तो 95 फीसदी पूरा कर दिया है, लेकिन सीवर लाइन अभी मात्र 30 किमी. ही पड़ा है। पंपिंग स्टेशन के कार्य भी अभी धीमी गति से चल रहे हैं। जल निगम के अधिशासी अभियंता एके गुप्ता का कहना है कि एसटीपी का कार्य 95 फीसदी पूरा हो चुका है। बाकी कार्य भी जल्द पूरा हो जाएगा। बारिश के कारण दो माह से सीवर लाइन डालने का कार्य रुका हुआ है। बारिश के बाद तेजी से सीवर लाइन डालने का कार्य किया जाएगा। अगर समय से सीवर लाइन डालने का कार्य पूरा नहीं हुआ तो संबंधित फर्म के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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14 बड़े नालों से गोमती में गिरता है सीवेज
जौनपुर। शहर से निकलने वाला सीवेज 14 नालों के जरिए सीधे गोमती नदी में गिरता है। इन नालों में हनुमान घाट, बजरंग घाट, बलुआ घाट, मछरहट्टा, मियांपुर, कटघरा, नखास, अहियापुर, जेसिज, मुफ्ती मोहल्ला सहित अन्य शामिल हैं। बगैर शोधन नालों से बहकर सीवेज सीधे गोमती में गिरता है। एसटीपी के निर्माण के बाद शोधित जल सिंचाई में उपयोग में लाने की बात कही जा रही है।
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