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हक के लिए जागरूक करे मीडिया
jaunpur
Updated Sun, 29 Jan 2017 01:16 AM IST
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पूविवि जनसंचार विभाग में आयोजित संगोष्ठी के मुख्य अतिथि ओम प्रकाश सिंह को स्मृति चिह्न देते शिक्षक।
मदन मोहन मालवीय हिंदी पत्रकारिता संस्थान काशी विद्यापीठ वाराणसी के निदेशक ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि एक नागरिक दूसरे के अधिकारों की रक्षा करने की सोचेगा तभी नागरिक अधिकारिता की बात सार्थक होगी।
वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के सामाजिक अनुप्रयुक्त विज्ञान संकाय में दीक्षांत समारोह के पहले नागरिक अधिकारिता एवं मीडिया विषयक व्याख्यान में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज में आज भी उनकी परंपरागत व्यवस्था से न्याय मिल जाता है।
वहां दुराचार जैसी घटनाएं नहीं होती हैं। लेकिन आज के सभ्य समाज में पुलिस एवं मीडिया के होते हुए दुराचार एवं अपराध की घटनाएं तेजी से बढ़ रही है। मीडिया की जिम्मेदारी है कि वह लोगों को जागरूक करें तथा नागरिकों को उनके अधिकारों के प्रति सचेत करे।
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इसके द्वारा परिवर्तन तभी लाया जा सकता है जब इसके संचालकों की दृष्टि समाज के प्रति समर्पित हो। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों ने जो नागरिक अधिकारों के नाम पर परोसा है उससे लोगों के अधिकारों का शोषण ही ज्यादा हुआ है।
आधुनिक समय में निजीकरण के नाम पर केवल तकनीकी आई है। जो कि नागरिक अधिकारों को सीमित कर रही है। आम आदमी सोशल मीडिया को हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर अपने अधिकारों के प्रति आवाज उठा सकता है। आज नागरिक अधिकार समय की जरूरत है।
इसके प्रति हमें सचेत भी रहना चाहिए। डा. मनोज मिश्र ने भी विचार रखे। संकायाध्यक्ष डा. अजय प्रताप सिंह ने स्वागत किया। डा. दिग्विजय सिंह राठौर ने धन्यवाद ज्ञापन किया। संचालन डा. अवध बिहारी सिंह ने किया। इस मौके पर डा. सुनील कुमार, डा. रूश्दा आजमी, डा. सुभाष वर्मा आदि मौजूद रहे।
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वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के सामाजिक अनुप्रयुक्त विज्ञान संकाय में दीक्षांत समारोह के पहले नागरिक अधिकारिता एवं मीडिया विषयक व्याख्यान में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज में आज भी उनकी परंपरागत व्यवस्था से न्याय मिल जाता है।
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वहां दुराचार जैसी घटनाएं नहीं होती हैं। लेकिन आज के सभ्य समाज में पुलिस एवं मीडिया के होते हुए दुराचार एवं अपराध की घटनाएं तेजी से बढ़ रही है। मीडिया की जिम्मेदारी है कि वह लोगों को जागरूक करें तथा नागरिकों को उनके अधिकारों के प्रति सचेत करे।
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इसके द्वारा परिवर्तन तभी लाया जा सकता है जब इसके संचालकों की दृष्टि समाज के प्रति समर्पित हो। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों ने जो नागरिक अधिकारों के नाम पर परोसा है उससे लोगों के अधिकारों का शोषण ही ज्यादा हुआ है।
आधुनिक समय में निजीकरण के नाम पर केवल तकनीकी आई है। जो कि नागरिक अधिकारों को सीमित कर रही है। आम आदमी सोशल मीडिया को हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर अपने अधिकारों के प्रति आवाज उठा सकता है। आज नागरिक अधिकार समय की जरूरत है।
इसके प्रति हमें सचेत भी रहना चाहिए। डा. मनोज मिश्र ने भी विचार रखे। संकायाध्यक्ष डा. अजय प्रताप सिंह ने स्वागत किया। डा. दिग्विजय सिंह राठौर ने धन्यवाद ज्ञापन किया। संचालन डा. अवध बिहारी सिंह ने किया। इस मौके पर डा. सुनील कुमार, डा. रूश्दा आजमी, डा. सुभाष वर्मा आदि मौजूद रहे।