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समितियों पर धान का चार करोड़ बकाया
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Mon, 11 Apr 2016 01:13 AM IST
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साधन सहकारी समितियों को धान बेचने के बाद गेहूं की भी फसल तैयार हो गई, लेकिन किसानों को अभी धान का ही पैसा नहीं मिला। लिहाजा कई किसानों को अगली खेती के लिए कर्ज लेना पड़ा है। पीसीएफ और मार्केेटिंग के केंद्रों पर सर्वाधिक तीन करोड़ रुपये किसानों का बकाया है। इसके अलावा यूपी एग्रो और अन्य एजेंसियों पर भी एक करोड़ का बकाया है।
समितियों को धान बेचने वाले किसान संकट में हैं। सरकारी क्रय केंद्र पर धान बेंचकर वे पश्चाताप कर रहे हैं। उनका मानना है कि अगर वे बनिया के हाथ में धान बेचे होते तो कुछ कम पैसा जरूर मिलता फिर भी वे मुनाफे में होते। सरकार ने 1350 रुपये कुंतल में किसानों से धान खरीदने का ढिढोरा जरूर पिटवाया पर इस चक्कर में पड़कर तमाम लोग परेशान हो रहे हैं।
बक्शा के किसान रामयश विश्वकर्मा कहते हैं कि किसान की अगली खेती पिछली पर ही निर्भर होती है। धान बेचने के बाद पैसा नहीं मिला इससे अगली खेती के लिए कर्ज लेना पड़ा। अब गेहूं की फसल भी तैयार हो गई, लेकिन धान का पैसा अभी तक नहीं मिला।
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गौराखुर्द के किसान धर्मेंद्र सिंह कहते हैं कि साधन सहकारी समिति पर उन्होंने 40 कुंतल धान बेचा था, लेकिन पैसा आज तक नहीं मिला। यही पीड़ा नवीन यादव की भी है। सुइथाकला के किसान सांवले यादव की बेटी की शादी है। उनका कहना है कि धान का पैसा नहीं मिला इस नाते शादी के लिए कर्ज लेना पड़ रहा है।
इन चंद किसानों की पीड़ा सिर्फ बानगी भर है। ऐसे तमाम किसान हैं जो सरकारी क्रय केंद्रों पर धान बेचकर पश्चाताप कर रहे हैं। धान खरीद करने वाली एजेंसी पीसीएफ पर डेढ़ करोड़ और मार्केटिंग पर भी डेढ़ करोड़ बकाया है। इनके अलावा यूपी एग्रो और अन्य एजेंसियों पर एक करोड़ का बकाया है।
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समितियों को धान बेचने वाले किसान संकट में हैं। सरकारी क्रय केंद्र पर धान बेंचकर वे पश्चाताप कर रहे हैं। उनका मानना है कि अगर वे बनिया के हाथ में धान बेचे होते तो कुछ कम पैसा जरूर मिलता फिर भी वे मुनाफे में होते। सरकार ने 1350 रुपये कुंतल में किसानों से धान खरीदने का ढिढोरा जरूर पिटवाया पर इस चक्कर में पड़कर तमाम लोग परेशान हो रहे हैं।
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बक्शा के किसान रामयश विश्वकर्मा कहते हैं कि किसान की अगली खेती पिछली पर ही निर्भर होती है। धान बेचने के बाद पैसा नहीं मिला इससे अगली खेती के लिए कर्ज लेना पड़ा। अब गेहूं की फसल भी तैयार हो गई, लेकिन धान का पैसा अभी तक नहीं मिला।
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गौराखुर्द के किसान धर्मेंद्र सिंह कहते हैं कि साधन सहकारी समिति पर उन्होंने 40 कुंतल धान बेचा था, लेकिन पैसा आज तक नहीं मिला। यही पीड़ा नवीन यादव की भी है। सुइथाकला के किसान सांवले यादव की बेटी की शादी है। उनका कहना है कि धान का पैसा नहीं मिला इस नाते शादी के लिए कर्ज लेना पड़ रहा है।
इन चंद किसानों की पीड़ा सिर्फ बानगी भर है। ऐसे तमाम किसान हैं जो सरकारी क्रय केंद्रों पर धान बेचकर पश्चाताप कर रहे हैं। धान खरीद करने वाली एजेंसी पीसीएफ पर डेढ़ करोड़ और मार्केटिंग पर भी डेढ़ करोड़ बकाया है। इनके अलावा यूपी एग्रो और अन्य एजेंसियों पर एक करोड़ का बकाया है।