{"_id":"5f527dd88ebc3e54d234542e","slug":"read-along-app-downloading-jaunpur-news-vns545363754","type":"story","status":"publish","title_hn":"अभिभावकों के मोबाइल पर अब रीड एलांग ऐप डाउनलोड कराने में जुटे शिक्षक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अभिभावकों के मोबाइल पर अब रीड एलांग ऐप डाउनलोड कराने में जुटे शिक्षक
विज्ञापन
जौनपुर। परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को अब रीड एलांग एप पढ़ाएगा। एप की खासियत है कि सभी विषयों को बच्चे न सिर्फ अपने से पढ़ सकेंगे बल्कि एप उनकी पढ़ाई का मूल्यांकन भी कर सकेगा। सभी पाठ्य पुस्तकों की पढ़ाई के साथ उससे संबंधित सवाल एप पूछेगा और सही जवाब देने पर बच्चों को इनाम के तौर पर सितारे मिलेंगे, जिससे उनकी हौसलाफजाई होगी। पढ़ाई में भी उनका मन लगेगा। कोरोना काल में बच्चों को पढ़ाई से जोड़ने में इस एप को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शिक्षक बच्चों के घर घर जा कर उनके अभिभावकों के मोबाइल फोन में ऐप को डाउनलोड करा रहे हैं। हालांकि तमाम अभिभावकों की मजबूरी है कि उनके पास एंड्राय़ड फोन नहीं है।
शासन के निर्देश पर बीएसए ने सभी शिक्षकों को निर्देश दिए हैं कि वह घर-घर जाएं और अभिभावकों को रीड एलांग एप की खूबियों को बताएं। उनके मोबाइल फोन पर डाउनलोड कर इसके इस्तेमाल के तौर तरीके बच्चों को समझाएं, ताकि बच्चे एप के सहारे खुद से घर पर पढ़ाई कर सकें। बीएसए के निर्देश के बाद जिले भर से प्राथमिक और जूनियर विद्यालयों के शिक्षक बच्चों के घर-घर जाकर एप की जानकारी दे रहे हैं। बदलापुर के प्राथमिक विद्यालय बलुआं के सहायक अध्यापक बृजेश यादव कहते हैं कि रीड एलांग एप बच्चों को खुद से घर पर पढ़ाई करने के लिए बेहतर ए प्लीकेशन है, लेकिन समस्या यह है कि अधिकतर बच्चों के अभिभावकों के पास एंड्रायड फोन नहीं है। कई लोगों की तो यह भी समस्या है कि उनके पास फोन है पर डाटा नहीं है। बक्शा के प्राथमिक विद्यालय दक्षिण पट्टी रन्नों, उत्तर पट्टी, पूरा तेजी, बक्शा, केवटली आदि विद्यालयों में पढ़ाई करने वाले बच्चों की भी यही समस्या है। बीएसए प्रवीण कुमार तिवारी का कहना है कि रीड एलांग एप एक शिक्षक की तरह है। इसके माध्यम से बच्चे खुद से पढ़ाई कर सकते हैं। सभी शिक्षकों को निर्देश दिया गया है कि वे बच्चों के घर-घर जाएं और एप्लीकेशन को उनके मोबाइल फोन में अपलोड करें।
प्रवासियों के लौटने के साथ बंद हो गई पढ़ाई
जौनपुर। अनलॉक में प्रवासियों के काम पर लौटने के साथ ही कई बच्चों की पढ़ाई भी बंद हो गई। कोरोना के बढ़ते संक्रमण के चलते दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, सूरत जैसे महानगरों से भागकर घर आए प्रवासियों के एंड्रायड फोन से तमाम बच्चे आनलाइन पढ़ाई कर रहे थे। गांव में रोजी रोटी की व्यवस्था न होने से परेशान तमाम प्रवासी फिर से परदेश की ओर लौटने लगे हैं। परदेस लौटने के साथ प्रवासी अपने मोबाइल फोन भी ले गए जिससे आनलाइन शिक्षा का सपना टूट गया। बक्शा के रमाशंकर और बदलापुर के राजकुमार कहते हैं कि घर में परदेसी जबतक थे तबतक उनके मोबाइल फोन से बच्चे जरूर पढ़ाई कर रहे थे लेकिन परदेशियों के जाते ही बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई बंद हो गई। उनकी माली दशा ऐसी नहीं है कि बच्चों के लिए उन्हें एंड्रायड पोन दिला सकें।
विज्ञापन
विज्ञापन
शासन के निर्देश पर बीएसए ने सभी शिक्षकों को निर्देश दिए हैं कि वह घर-घर जाएं और अभिभावकों को रीड एलांग एप की खूबियों को बताएं। उनके मोबाइल फोन पर डाउनलोड कर इसके इस्तेमाल के तौर तरीके बच्चों को समझाएं, ताकि बच्चे एप के सहारे खुद से घर पर पढ़ाई कर सकें। बीएसए के निर्देश के बाद जिले भर से प्राथमिक और जूनियर विद्यालयों के शिक्षक बच्चों के घर-घर जाकर एप की जानकारी दे रहे हैं। बदलापुर के प्राथमिक विद्यालय बलुआं के सहायक अध्यापक बृजेश यादव कहते हैं कि रीड एलांग एप बच्चों को खुद से घर पर पढ़ाई करने के लिए बेहतर ए प्लीकेशन है, लेकिन समस्या यह है कि अधिकतर बच्चों के अभिभावकों के पास एंड्रायड फोन नहीं है। कई लोगों की तो यह भी समस्या है कि उनके पास फोन है पर डाटा नहीं है। बक्शा के प्राथमिक विद्यालय दक्षिण पट्टी रन्नों, उत्तर पट्टी, पूरा तेजी, बक्शा, केवटली आदि विद्यालयों में पढ़ाई करने वाले बच्चों की भी यही समस्या है। बीएसए प्रवीण कुमार तिवारी का कहना है कि रीड एलांग एप एक शिक्षक की तरह है। इसके माध्यम से बच्चे खुद से पढ़ाई कर सकते हैं। सभी शिक्षकों को निर्देश दिया गया है कि वे बच्चों के घर-घर जाएं और एप्लीकेशन को उनके मोबाइल फोन में अपलोड करें।
विज्ञापन
प्रवासियों के लौटने के साथ बंद हो गई पढ़ाई
जौनपुर। अनलॉक में प्रवासियों के काम पर लौटने के साथ ही कई बच्चों की पढ़ाई भी बंद हो गई। कोरोना के बढ़ते संक्रमण के चलते दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, सूरत जैसे महानगरों से भागकर घर आए प्रवासियों के एंड्रायड फोन से तमाम बच्चे आनलाइन पढ़ाई कर रहे थे। गांव में रोजी रोटी की व्यवस्था न होने से परेशान तमाम प्रवासी फिर से परदेश की ओर लौटने लगे हैं। परदेस लौटने के साथ प्रवासी अपने मोबाइल फोन भी ले गए जिससे आनलाइन शिक्षा का सपना टूट गया। बक्शा के रमाशंकर और बदलापुर के राजकुमार कहते हैं कि घर में परदेसी जबतक थे तबतक उनके मोबाइल फोन से बच्चे जरूर पढ़ाई कर रहे थे लेकिन परदेशियों के जाते ही बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई बंद हो गई। उनकी माली दशा ऐसी नहीं है कि बच्चों के लिए उन्हें एंड्रायड पोन दिला सकें।
विज्ञापन