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जौनपुर में रवि किशन ने कृषि कानूनों को लेकर विपक्ष पर साधा निशाना, बोले-किसानों का अहित हुआ तो दे दूंगा इस्तीफा
Thu, 31 Dec 2020 11:00 PM IST
स्वाधीन तिवारी
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क,जौनपुर
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क,जौनपुर
Published by: स्वाधीन तिवारी
Updated Thu, 31 Dec 2020 11:00 PM IST
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सांसद रवि किशन।
- फोटो : अमर उजाला।
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गोरखपुर के सांसद और भोजपुरी सिने स्टार रवि किशन ने कृषि कानूनों को किसानों के हित में करार दिया है। उन्होंने कहा कि किसान विपक्ष के बहकावे में न आयें और विरोध प्रदर्शन समाप्त कर दें। अगर कृषि बिल से किसानों का अहित हुआ तो मैं संसद की सदस्यता से त्याग पत्र दे दूंगा। अपने पिता की प्रथम पुण्यतिथि पर जौनपुर जिले के पैतृक गांव बिसुई पहुंचे सांसद ने प्रेस वार्ता में कहा कि कहा कि मोदी और योगी युग में देश व प्रदेश के किसान व मजदूर सहित किसी इंसान का अपमान नहीं होगा।
किसान हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। उनके हितों को ध्यान में रखकर एमएसपी डेढ़ गुना कर दी गई है। बिल वापसी का सवाल नहीं है, लेकिन संशोधन जरूर हो सकता है। प्रदेश में विकास की लहर चल रही है और सड़कों का जाल बिछ गया है। बिजली, पानी, महिला सशक्तिकरण और परिषदीय विद्यालयों के कायाकल्प से तस्वीर बदल गई है।
भोजपुरी भाषा शीघ्र ही संविधान की आठवीं अनुसूची में होगी। उन्होंने कहा कि माता से आंतरिक सुरक्षा और प्यार मिलता है। पिता वाह्य सुरक्षा कवच होता है। माता व पिता की सेवा करना हमारा कर्तव्य होना चाहिए। इसी सेवा की शक्ति से मैं आज दुनिया में अपनी पहचान बनाने में सफल हो सका हूं । वह अपने पिता स्व. श्याम नारायण शुक्ल को याद कर भावुक हो उठे। इस मौके पर शशांक किशन, गुड्डू पंडित, संदीप द्विवेदी, विराट सिंह व आदर्श चौबे मौजूद रहे।
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किसान हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। उनके हितों को ध्यान में रखकर एमएसपी डेढ़ गुना कर दी गई है। बिल वापसी का सवाल नहीं है, लेकिन संशोधन जरूर हो सकता है। प्रदेश में विकास की लहर चल रही है और सड़कों का जाल बिछ गया है। बिजली, पानी, महिला सशक्तिकरण और परिषदीय विद्यालयों के कायाकल्प से तस्वीर बदल गई है।
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भोजपुरी भाषा शीघ्र ही संविधान की आठवीं अनुसूची में होगी। उन्होंने कहा कि माता से आंतरिक सुरक्षा और प्यार मिलता है। पिता वाह्य सुरक्षा कवच होता है। माता व पिता की सेवा करना हमारा कर्तव्य होना चाहिए। इसी सेवा की शक्ति से मैं आज दुनिया में अपनी पहचान बनाने में सफल हो सका हूं । वह अपने पिता स्व. श्याम नारायण शुक्ल को याद कर भावुक हो उठे। इस मौके पर शशांक किशन, गुड्डू पंडित, संदीप द्विवेदी, विराट सिंह व आदर्श चौबे मौजूद रहे।
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