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नहीं होगा राम-रावण युद्ध, चारों भाइयों का मिलन देखने को तरसेंगे नयन

Wed, 23 Sep 2020 11:15 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 23 Sep 2020 11:15 PM IST
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Ram-Ravan war will not happen, Nayan will yearn to see union of four brothers
रामनगर भड़सरा में रामलीला की फाईल फोटो। - फोटो : JAUNPUR
जौनपुर। नवरात्र की शुरुआत के साथ ही जिले में जगह-जगह रामलीला का मंचन शुरू हो जाता था। भगवान श्रीराम के जीवन की विभिन्न लीलाओं का जीवंत मंचन कर कलाकार दर्शकों को भाव विभोर कर देते थे। मंचन के बाद पंडाल में काफी देर तक बजने वाली तालियां कलाकारों को प्रोत्साहित करती थीं और इन्हीं तालियों की बदौलत वह अगले साथ पहले से भी बेहतर अपनी भूमिका निभाने के लिए कटिबद्ध होता था। रामलीला का उत्साह इस कदर होता था कि लोग देर रात तक पूरा मंचन देखने के लिए डटे रहते थे। लोगों के जेहन में वर्षों से बनी रामलीला की यह यादें इस वर्ष सिर्फ स्मृतियों में ही रहेंगी। कोरोना काल के कारण सार्वजनिक व धार्मिक कार्यक्रमों पर रोक के फरमान से यह आयोजन भी प्रभावित हुआ है। दशकों से चली आ रही रामलीला की परंपरा इस बार टूटेगी। इसकी जानकारी होने के बाद से ही इनसे जुड़े लोग मायूस हैं।
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शहर से रामनगर भड़सरा गांव में रामलीला की परंपरा सौ वर्ष से भी अधिक पुरानी है। स्थानीय कलाकार ही इस लीला में विभिन्न भूमिकाएं निभाते आ रहे हैं। पीढ़ी दर पीढ़ी पात्र बदलते रहे हैं, उनके तौर-तरीके बदले, मगर कथानक वही रहा। हर बार कलाकार नए पन के साथ अपनी भूमिका निभाता रहा। इस बार रामलीला न होने से इस कमेटी से जुड़े लोगों में मायूसी छाई है। लीला का संयोजन करने और परशुराम की भूमिका निभाने वाले नीरज सिंह बताते हैं कि रामलीला देखते हुए ही वह बड़े हुए हैं। उनके दादा और उनसे भी पहले से इसका मंचन होता आ रहा है। पुरखों की परंपरा को कायम रखते हुए हर साल रामलीला का भव्य आयोजन किया जाता रहा है। बेहद अफसोस है कि इस बार मंचन नहीं होगा। लीला स्थल बड़े हनुमान मंदिर में सुंदर कांड का पाठ व अन्य कार्यक्रमों के जरिए इस परंपरा को कायम रखा जाएगा। लीला में हनुमान की भूमिका निभाने वाले अतुल त्रिपाठी ने बताया कि नवरात्र के प्रथम दिन से रामलीला शुरू होती थी और दशहरे पर रावण दहन के साथ समापन होव्ता था। शहर में होने वाले दोनों रावण दहन में सबसे भव्य उत्सव हमारे यहां होता था। नौ दिनों की रामलीला के बाद रावण दहन होने के कारण उल्लास और चरम पर होता था। इस बार रामलीला न होने को लेकर मन उदास है। आयोजन समिति के सदस्य कमलेश त्रिपाठी ने बताया कि भड़सरा की रामलीला की खासियत इसके कलाकारट रहे हैं। सतीश सिंह को रावण की भूमिका में लोग शुरू से देखते आ रहे हैं तो राम की भूमिका में गौरव सिंह का अभिनय शानदार रहता है। हर कोई इस बार राम-रावण के संवाद और युद्ध के अनुपम लीला को याद करेगा। गौरव ने कहा कि हर साल शारदीय नवरात्र में रामलीला होता रहा है। इसकी तैयारी में हम सब एक माह पहले से लग जाते थे। इस बार सारी गतिविधियां ठप है तो लग रहा है कि कहीं कुछ खो गया है।
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