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चुनाव हारने के बाद भी निभाया वादा, बनवा रहे सड़क...
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जौनपुर। चुनाव में मिली हार की खीझ में कोई सड़क खोदवा दे रहा है तो कोई मतदाताओं पर भड़ास उतार रहा है। ऐसे माहौल में जौनपुर जिले के शेरवां ग्राम पंचायत की यह खबर सुकून देने वाली है। पंचायत चुनाव में हार के बाद भी प्रधान पद के प्रत्याशी अपने वादे को पूरा करने के लिए अटल हैं। वर्षों से मार्ग के लिए तरसते प्रजापति बस्ती में वह पहुंच मार्ग बनवा रही हैं। एक तरफ जब चुनाव जीतने के बाद भी प्रत्याशी अपना वादा भूल जाते हैं, तब हार के बावजूद महिला प्रत्याशी का वादा निभाने की पहल हर तरफ चर्चा में है।
अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित गांव के प्रधान पद पर पर निजी पशु चिकित्सक जयप्रकाश यादव की पत्नी राधिका ने दावेदारी पेश की थी। प्रचार के दौरान उन्होंने गांव की प्रजापति बस्ती के लोगों से वादा किया था कि वे चुनाव जीतें या हारें, इस बस्ती को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए सड़क जरूर बनवाएंगी। परिणाम आने पर राधिका को मायूसी मिली, लेकिन उन्हें लोगों से किया गया वादा याद रहा। नतीजे घोषित होने के तीसरे दिन ही उस बस्ती को जोड़ने के लिए सड़क निर्माण कार्य प्रारंभ हो गया है। राधिका यादव के पति पप्पू यादव बताते हैं कि वह कुछ मतों के अंतर से चुनाव हार गए हैं, लेकिन उन्हें अपनी बात याद है। बस्ती के सभी लोगों का आशीर्वाद उनके साथ रहा। हार-जीत होती रहती है। बताया कि गांव में लगभग 29 साल से चकबंदी लंबित है। निकट भविष्य में भी इसका निस्तारण होता नहीं दिख रहा है। ऐसे में बस्ती तक जाने के लिए अपनी भूमिधरी जमीन से लगभग 200 मीटर सड़क बनवाने के लिए मिट्टी डालने का कार्य शुरू हो गया है। बाद में इस पर इंटर लॉकिंग भी करवाने की योजना है।
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अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित गांव के प्रधान पद पर पर निजी पशु चिकित्सक जयप्रकाश यादव की पत्नी राधिका ने दावेदारी पेश की थी। प्रचार के दौरान उन्होंने गांव की प्रजापति बस्ती के लोगों से वादा किया था कि वे चुनाव जीतें या हारें, इस बस्ती को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए सड़क जरूर बनवाएंगी। परिणाम आने पर राधिका को मायूसी मिली, लेकिन उन्हें लोगों से किया गया वादा याद रहा। नतीजे घोषित होने के तीसरे दिन ही उस बस्ती को जोड़ने के लिए सड़क निर्माण कार्य प्रारंभ हो गया है। राधिका यादव के पति पप्पू यादव बताते हैं कि वह कुछ मतों के अंतर से चुनाव हार गए हैं, लेकिन उन्हें अपनी बात याद है। बस्ती के सभी लोगों का आशीर्वाद उनके साथ रहा। हार-जीत होती रहती है। बताया कि गांव में लगभग 29 साल से चकबंदी लंबित है। निकट भविष्य में भी इसका निस्तारण होता नहीं दिख रहा है। ऐसे में बस्ती तक जाने के लिए अपनी भूमिधरी जमीन से लगभग 200 मीटर सड़क बनवाने के लिए मिट्टी डालने का कार्य शुरू हो गया है। बाद में इस पर इंटर लॉकिंग भी करवाने की योजना है।
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