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बाढ़ से बचाव व राहत के लिए तैयारी शुरू
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जिले में बाढ़ की विभीषिका से बचाव के लिए तैयारी शुरू कर दी गई है। इसके लिए जिला प्रशासन की ओर से पिछले माह के अंतिम सप्ताह में बैठक भी कर ली गई है। वहीं तहसील प्रशासन व अन्य विभागों बाढ़ से बचाव व राहत कार्य के लिए कार्ययोजना बनाना शुरू कर दिया है।
जिले से होकर पांच नदियां बहती हैं। जिसमें आदि गंगा गोमती, पीली, सई, बसुई व वरुणा नदी शामिल हैं। इन नदियों में बारिश के मौसम में बाढ़ आने की संभावना रहती है। बाढ़ से आसपास के इलाकों में रहने वालों के लिए समस्या पैदा होती है। जिले में वर्ष 1985 में बाढ़ आई थी, जिसमें काफी जन धन की हानि हुई थी। इसके बाद जिले में अभी तक उतनी भीषण बाढ़ नहीं आई है। हालांकि हर साल गंगा का जल स्तर बढ़ने से गोमती नदी में दबाव बढ़ता है। गोमती का जलस्तर पर बढ़ने पर केराकत व बदलापुर तहसील क्षेत्र में बाढ़ आती है, लेकिन सिर्फ खेत व फसलें ही डूबती हैं। गांवों तक पानी नहीं पहुंच पाता है। इसके बावजूद हर साल जिला प्रशासन बाढ़ से बचाव व राहत कार्य के लिए तैयारी करता है। इसी क्रम में प्रशासन की तरफ से इस साल भी बाढ़ से बचाव व राहत की तैयारी शुरू कर दी गई है। सिंचाई, कृषि, पशुपालन, स्वास्थ्य, विद्युत निगम सहित अन्य विभागों ने कार्ययोजना बनाना शुरू कर दिया है। सभी तहसीलों के एसडीएम व तहसीलदार को भ्रमण कर नावों व गोताखोरों सहित अन्य व्यवस्था के लिए भी निर्देश दिए गए हैं। पिछले साल बाढ़ प्रभावित 239 गांवों को चिह्नित किया गया गया था। साथ ही 6326 हेक्टेयर क्षेत्र को बाढ़ प्रभावित होने वाले क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया गया था। साथ ही 33,708 लोगों के बाढ़ से प्रभावित होने की आशंका जताई गई थी। बाढ़ से बचाव व राहत कार्य के लिए 47 गोताखोर, 127 नाविक और 58 बाढ़ चौकियां बनाई गई थीं।
जिले के सभी तहसीलों के 239 गांव हर साल बाढ़ से प्रभावित होने की आशंका जताई जाती है। इसमें सदर तहसील में गोमती नदी से 56 व सई नदी से 23, मड़ियाहूं तहसील में सई नदी से 18 व बसुई नदी से 7, मछलीशहर तहसील में सई नदी से 15 व बसुई से 12, शाहगंज तहसील में गोमती नदी से चार, केराकत तहसील में सई, गोमती व पीली नदी से 73, बदलापुर तहसील में सई, गोमती से 31 गांवों के प्रभावित होने की संभावना के मद्देनजर कार्ययोजना तैयारी की जाती है। अपर जिलाधिकारी वित्त व राजस्व रामप्रकाश का कहना है कि बाढ़ से बचाव व राहत कार्य के लिए तैयारी शुरू कर दी गई है। बीते 28 अप्रैल को बैठक कर बाढ़ के मद्देनजर सारी तैयारी पूरी करने को लेकर चर्चा भी की जा चुकी है। सभी संबंधित विभागों को कार्ययोजना बनाने और एसडीएम व तहसील को भ्रमण कर व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है। ताकि बारिश के मौसम में बाढ़ आने पर नुकसान से बचा जा सके।
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जिले से होकर पांच नदियां बहती हैं। जिसमें आदि गंगा गोमती, पीली, सई, बसुई व वरुणा नदी शामिल हैं। इन नदियों में बारिश के मौसम में बाढ़ आने की संभावना रहती है। बाढ़ से आसपास के इलाकों में रहने वालों के लिए समस्या पैदा होती है। जिले में वर्ष 1985 में बाढ़ आई थी, जिसमें काफी जन धन की हानि हुई थी। इसके बाद जिले में अभी तक उतनी भीषण बाढ़ नहीं आई है। हालांकि हर साल गंगा का जल स्तर बढ़ने से गोमती नदी में दबाव बढ़ता है। गोमती का जलस्तर पर बढ़ने पर केराकत व बदलापुर तहसील क्षेत्र में बाढ़ आती है, लेकिन सिर्फ खेत व फसलें ही डूबती हैं। गांवों तक पानी नहीं पहुंच पाता है। इसके बावजूद हर साल जिला प्रशासन बाढ़ से बचाव व राहत कार्य के लिए तैयारी करता है। इसी क्रम में प्रशासन की तरफ से इस साल भी बाढ़ से बचाव व राहत की तैयारी शुरू कर दी गई है। सिंचाई, कृषि, पशुपालन, स्वास्थ्य, विद्युत निगम सहित अन्य विभागों ने कार्ययोजना बनाना शुरू कर दिया है। सभी तहसीलों के एसडीएम व तहसीलदार को भ्रमण कर नावों व गोताखोरों सहित अन्य व्यवस्था के लिए भी निर्देश दिए गए हैं। पिछले साल बाढ़ प्रभावित 239 गांवों को चिह्नित किया गया गया था। साथ ही 6326 हेक्टेयर क्षेत्र को बाढ़ प्रभावित होने वाले क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया गया था। साथ ही 33,708 लोगों के बाढ़ से प्रभावित होने की आशंका जताई गई थी। बाढ़ से बचाव व राहत कार्य के लिए 47 गोताखोर, 127 नाविक और 58 बाढ़ चौकियां बनाई गई थीं।
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जिले के सभी तहसीलों के 239 गांव हर साल बाढ़ से प्रभावित होने की आशंका जताई जाती है। इसमें सदर तहसील में गोमती नदी से 56 व सई नदी से 23, मड़ियाहूं तहसील में सई नदी से 18 व बसुई नदी से 7, मछलीशहर तहसील में सई नदी से 15 व बसुई से 12, शाहगंज तहसील में गोमती नदी से चार, केराकत तहसील में सई, गोमती व पीली नदी से 73, बदलापुर तहसील में सई, गोमती से 31 गांवों के प्रभावित होने की संभावना के मद्देनजर कार्ययोजना तैयारी की जाती है। अपर जिलाधिकारी वित्त व राजस्व रामप्रकाश का कहना है कि बाढ़ से बचाव व राहत कार्य के लिए तैयारी शुरू कर दी गई है। बीते 28 अप्रैल को बैठक कर बाढ़ के मद्देनजर सारी तैयारी पूरी करने को लेकर चर्चा भी की जा चुकी है। सभी संबंधित विभागों को कार्ययोजना बनाने और एसडीएम व तहसील को भ्रमण कर व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है। ताकि बारिश के मौसम में बाढ़ आने पर नुकसान से बचा जा सके।
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