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मां के जयकारे से देर रात तक गूंजते रहे पूजा पंडाल

Sat, 05 Oct 2019 12:18 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 05 Oct 2019 12:18 AM IST
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Pooja Pandal kept echoing till late night due to mother's cheering
13- जलालपुर के रेहटी गांव में स्थापित मां दुर्गा जी का पंण्डाल। - फोटो : JAUNPUR
जौनपुर। शारदीय नवरात्रि के छठवें दिन शुक्रवार को देवी मंदिर और पूजा पंडाल मां के जयकारे से देर रात तक गूंजते रहे। पूजा पंडालों में मां के छठवें स्वरूप कात्यायनी के दर्शन पूजन के लिए भक्तों की खासी भीड़ रही। मौसम ठीक रहने के कारण शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों में स्थापित पूजा पंडालों और देवी मंदिरों में भक्तों ने मत्था टेक कर आशीर्वाद लिया। जैसे-जैसे नवरात्रि समाप्ति की ओर बढ़ रहा है मंदिरों और पंडालों में भक्तों की भीड़ बढ़ रही है। शुक्रवार को मां शीतला धाम चौकिया और मां मैहर मंदिर परिसर दर्शन पूजन के लिए भक्तों की लंबी कतार लगी रही।
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शहर के फलवाली गली, कोतवाली चौराहा, कचहरी रोड़, बदलापुर पड़ाल समेत तहसील क्षेत्रों में स्थापित पूजा पंडालों में भक्तों भीड़ जुटने लगी है। मंदिरों के साथ पूजा पंडालों में भक्त माता के भव्य स्वरूप का ध्यान किया। नवरात्रि के छठवें दिन भक्तों ने मां कात्यायनी की आराधना की। भक्तों ने शाम के समय मंदिरों और पूजा पंडालों में मंगला आरती में बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए। मां के दर्शन पूजन का सिलसिला देर रात तक चलता रहा। जिले के मड़ियाहूं, बरसठी, बदलापुर, मीरगंज. मछलीशहर, बक्शा, शाहगंज, करंजाकला, केराकत, धर्मापुर, जलालपुर, सिरकोनी, नेवढियां, सुरेरी, रामपुर आदि क्षेत्रों में शुक्रवार को दर्शन पूजन के लिए भक्तों की खासी भीड़ रही।
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बदलापुर क्षेत्र में सब्जी मंडी के पास पंचधाम दुर्गा पूजा समिति में गुरुवार की रात भव्य आरती हुई। माता रानी के जयकारे से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा। आरती केमुख्य यजमान पवन सिंह रहे। प्राचीन गौरीशंकर धाम मंदिर चंदापुर स्थित मेंदुर्गा मंदिर में जगराता का आयोजन किया गया। जिसमें गायकों ने देररात तकसमां बांधे रखा। मां का भव्य श्रृंगार करने के बाद भोर में मंदिरों का कपाट दर्शन पूजन के लिए खोल दिया गया। ऐसी मान्यता है कि मां ने अपने इसी स्वरूप में पिता के कुल की रक्षा का संदेश दिया था। कात्यायन ऋषि ने तपकर देवी से वरदान मांगा कि आप पुत्री रूप में मेरे कुल में जन्म लें। देवी ने कात्यायन ऋषि के प्रसन्नता के लिए अपना अजन्मा स्वरूप त्यागकर पुत्री रूप में जन्म लिया। ऐसी मान्यता है कि इस रात्रि जागरण और जप करने से साधक को सहज ही माता कात्यायनी के कृपा का लाभ मिलता है।
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