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जिंदा तरस रहे, मुर्दे गटकते रहे पेंशन

Mon, 21 Sep 2020 12:09 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 21 Sep 2020 12:09 AM IST
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Pity is alive, the dead are lying in pension
जौनपुर। उम्र के अंतिम पायदान पर पहुंच चुके तमाम बुजर्ग जीवन निर्वाह के लिए दूसरों के सहारे को भटक रहे हैं तो दूसरी ओर ऐसे हजारों लोगों को वृद्धा पेंशन मिल रही है, जिनकी मृत्यु महीनों पहले हो चुकी है। जिले में करीब 66 सौ मुर्दों को वृद्धा पेंशन देने का मामला सामने आया है। किसी के खाते में पेंशन की तीन किश्त तो किसी को चार किश्त भेज दी गई। अब सत्यापन में उनकी पोल खुलने के बाद समाज कल्याण विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। विभाग ने उन सभी की पेंशन पर रोक लगा दी है। अब इसका हिसाब लगाया जा रहा है कि मौत के बाद किसे-कितना पेंशन भेज दिया गया है।
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60 वर्ष की आयु पूरी करने वाले ऐसे नागरिकों को समाज कल्याण विभाग के माध्यम से पेंशन दिया जाता है, जिनकी आर्थिक स्थिति अच्छी न हो। पेंशन के माध्यम से वह अपने दवा-इलाज सहित अन्य जरुरतों को बिना किसी पर बोझ बने सहजता से पूरा करते रहते हैं। प्रतिमाह 500 रुपये दी जाने वाली यह पेंशन प्रत्येक तीन माह पर सीधे लाभार्थी के खाते में भेजी जाती है। जिले में इस योजना के तहत 103337 लाभार्थी चयनित हैं। वित्तीय सत्र 2019-20 के समापन के बाद इन लाभार्थियों का सत्यापन शुरू कराया गया। कोविड-19 के असर के बीच सुस्त गति से हुई सत्यापन प्रक्रिया अगस्त में पूरी हुई। सत्यापन रिपोर्ट देख विभागीय जिम्मेदारों का माथा ठनक गया है। पेंशन पाने वालों की सूची में ऐसे 6618 लोग चिह्नित किए गए, जिनकी मृत्यु महीनों पहले हो चुकी है, बावजूद उनके खातों में पेंशन की धनराशि नियमित भेजी जाती रही है। इनमें तो अधिकांश लाभार्थी ऐसे भी हैं, जिनकी पेंशन राशि खाते से निकाल भी ली गई है। सत्यापन रिपोर्ट मिलने के बाद समाज कल्याण विभाग ने इन सभी मृतकों के पेंशन खाते पर रोक लगा दी है। उन्हें मृत्यु के बाद भुगतान की गई धनराशि का हिसाब लगाया जा रहा है।
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प्रधान और सेक्रेट्री को देनी होती है सूचना
नियमानुसार वृद्धा पेंशन के लाभार्थी की मृत्यु होने पर संबंधित ग्राम प्रधान और सेक्रेट्री की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह ब्लाक कार्यालय को इस बारे में सूचित कर पेंशन भुगतान पर रोक लगवा दें। किसी भी प्रधान या सेक्रेट्री ने इसका निर्वहन नहीं किया। लाभार्थियों के परिवारवालों ने भी इसकी जहमत नहीं उठाई। अलबत्ता वृद्ध के खाते में आ रही धनराशि पर वह खुद मौज उठाते रहे। अब मामला सामने आने के बाद इनकी जिम्मेदारी भी तय की जा रही है।
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वृद्धा पेंशन के करीब 66 लाभार्थी सत्यापन के दौरान मृत पाए गए हैं। इनकी सूची तैयार कर ब्लाक व संबंधित बैंक को भेज दी गई है, ताकि उनके खाते से तत्काल निकासी पर रोक लगाई जा सके। सत्यापन का कार्य हर वर्ष होता है, ऐसे में लंबे समय से गड़बड़ी की आशंका नहीं है। संभव है कि उन्हें दो या तीन किश्त दी गई हो। इसका आंकलन किया जा रहा है। खाते में अवशेष धनराशि को वापस मंगाया जा रहा है। -विपिन कुमार यादव, जिला समाज कल्याण अधिकारी।
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