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Jaunpur News: गज छाया योग में आज होगा पितृ विसर्जन
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इस वर्ष सर्व पितृ अमावस्या बुधवार को विशेष गजछाया एवं सर्वार्थ सिद्ध योग में पड़ रही है। इस विशेष योग में होने वाला पितृ विसर्जन विशेष फलदायी होगा।
ज्योतिष एवं तंत्र आचार्य डॉ. शैलेश मोदनवाल के अनुसार, यह दुर्लभ संयोग आश्विन कृष्ण पक्ष में त्रयोदशी तिथि या अमावस्या तिथि को जब चंद्रमा और सूर्य दोनों हस्त नक्षत्र में होते हैं तब बनता है। इस योग का उल्लेख स्कंद, अग्नि, मत्स्य, वराह आदि पुराणों में किया गया है। इस योग में अगर पितरों का श्राद्ध तर्पण किया जाए तो पितर कम से कम 13 वर्ष तक तृप्त रहते हैं। इस योग में तर्पण और श्राद्ध करने से वंश वृद्धि, धन संपत्ति और पितरों से आशीर्वाद की प्राप्ति होती है। इस योग को पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का खास अवसर बताया गया है।
बताया कि इस योग में श्राद्ध करने से पितरों को सद्गति तो मिलती ही है साथ ही अक्षय पुण्य की भी प्राप्ति होती है। जिन पितरों की पुण्यतिथि अपने परिजनों को ज्ञात नहीं होती है या किसी कारणवश जिनका श्राद्ध तर्पण पितृ पक्ष के 15 दिनों में नहीं हो पाता है वह उनका श्राद्ध तर्पण दान इसी अमावस्या में किया जाता है। इस दिन तर्पण आदि करके हलवा-पूड़ी दक्षिण दिशा की तरफ पितरों के निमित्त निकाला जाता है। धूप, दीप आदि करके उनसे गलतियों के लिए क्षमा याचना की जाती है। परिवार में सुख समृद्धि की वृद्धि हो ऐसी कामना के साथ उन्हें प्रेमपूर्वक विदाई देनी चाहिए।
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ज्योतिष एवं तंत्र आचार्य डॉ. शैलेश मोदनवाल के अनुसार, यह दुर्लभ संयोग आश्विन कृष्ण पक्ष में त्रयोदशी तिथि या अमावस्या तिथि को जब चंद्रमा और सूर्य दोनों हस्त नक्षत्र में होते हैं तब बनता है। इस योग का उल्लेख स्कंद, अग्नि, मत्स्य, वराह आदि पुराणों में किया गया है। इस योग में अगर पितरों का श्राद्ध तर्पण किया जाए तो पितर कम से कम 13 वर्ष तक तृप्त रहते हैं। इस योग में तर्पण और श्राद्ध करने से वंश वृद्धि, धन संपत्ति और पितरों से आशीर्वाद की प्राप्ति होती है। इस योग को पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का खास अवसर बताया गया है।
बताया कि इस योग में श्राद्ध करने से पितरों को सद्गति तो मिलती ही है साथ ही अक्षय पुण्य की भी प्राप्ति होती है। जिन पितरों की पुण्यतिथि अपने परिजनों को ज्ञात नहीं होती है या किसी कारणवश जिनका श्राद्ध तर्पण पितृ पक्ष के 15 दिनों में नहीं हो पाता है वह उनका श्राद्ध तर्पण दान इसी अमावस्या में किया जाता है। इस दिन तर्पण आदि करके हलवा-पूड़ी दक्षिण दिशा की तरफ पितरों के निमित्त निकाला जाता है। धूप, दीप आदि करके उनसे गलतियों के लिए क्षमा याचना की जाती है। परिवार में सुख समृद्धि की वृद्धि हो ऐसी कामना के साथ उन्हें प्रेमपूर्वक विदाई देनी चाहिए।
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