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अधिकारी लाइसेंस शुल्क के नाम पर कर रहे शोषण : चंदन
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मड़ियाहूं। क्षेत्र के व्यापारी अनेक समस्याओं से जूझ रहे हैं। कोई भी जनप्रतिनिधि समस्याओं के निपटारे में रुचि नहीं ले रहा है। अधिकारी लाइसेंस शुल्क के नाम पर व्यापारियों का शोषण कर रहे हैं।
ये बातें सोमवार को व्यापार मंडल के महामंत्री चंदन केसरी ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहीं। चंदन ने कहा कि ग्रामीण और नगरीय क्षेत्र में छोटे व्यापारी कम पूंजी में दुकान खोलकर कारोबार करते हैं। ग्राहकों को शुद्ध व ताजा सामान भी बेचते हैं। छोटे किराना व्यापारी बड़े ब्रांडों के पैक सामान के साथ ही ग्राहकों को खुले सामान भी बेचते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी मानक व लाइसेंस के नाम पर व्यापारियों का आर्थिक और मानसिक उत्पीड़न करते हैं। जांच के लिए नमूना लेते समय नमूने की रसीद व्यापारियों को नहीं दी जाती है। पैक सामान की जांच में कमी मिलने पर छोटे व्यापारियों पर जुर्माना लगाया जाता है। लाइसेंस के नाम पर व्यापारियों से मनमाना वसूली की जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन दुकानों की वार्षिक लाइसेंस फीस 100 रुपये है, उन दुकानों से 2000 रुपये और जिन दुकानों की लाइसेंस फीस 2000 रुपये वार्षिक है, उनसे 5000 से 10000 रुपये की वसूली की जाती है। उन्होंने बताया कि खाद्य विभाग के अधिकारी दुकान पर जाते हैं उनके साथ एक प्राइवेट व्यक्ति भी चलता है। उसी के माध्यम से वसूली कराई जाती है। रुपये न देने पर बाद में आकर नमूना लिया जाता है।
व्यापार मंडल के नगर अध्यक्ष कंवलजीत सिंह गब्बर ने बताया कि छोटे तथा मध्यम वर्ग के व्यापारी वाहनों की पार्किंग की समस्या से जूझ रहे हैं। पार्किंग की व्यवस्था नहीं होने से व्यापारियों व अन्य लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। पूरे दिन जाम की समस्या बनी रहती है। नो वेंडिंग जोन में ठेले तथा खोमचे वाले फुटपाथ पर अतिक्रमण कर लिए हैं।
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ये बातें सोमवार को व्यापार मंडल के महामंत्री चंदन केसरी ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहीं। चंदन ने कहा कि ग्रामीण और नगरीय क्षेत्र में छोटे व्यापारी कम पूंजी में दुकान खोलकर कारोबार करते हैं। ग्राहकों को शुद्ध व ताजा सामान भी बेचते हैं। छोटे किराना व्यापारी बड़े ब्रांडों के पैक सामान के साथ ही ग्राहकों को खुले सामान भी बेचते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी मानक व लाइसेंस के नाम पर व्यापारियों का आर्थिक और मानसिक उत्पीड़न करते हैं। जांच के लिए नमूना लेते समय नमूने की रसीद व्यापारियों को नहीं दी जाती है। पैक सामान की जांच में कमी मिलने पर छोटे व्यापारियों पर जुर्माना लगाया जाता है। लाइसेंस के नाम पर व्यापारियों से मनमाना वसूली की जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन दुकानों की वार्षिक लाइसेंस फीस 100 रुपये है, उन दुकानों से 2000 रुपये और जिन दुकानों की लाइसेंस फीस 2000 रुपये वार्षिक है, उनसे 5000 से 10000 रुपये की वसूली की जाती है। उन्होंने बताया कि खाद्य विभाग के अधिकारी दुकान पर जाते हैं उनके साथ एक प्राइवेट व्यक्ति भी चलता है। उसी के माध्यम से वसूली कराई जाती है। रुपये न देने पर बाद में आकर नमूना लिया जाता है।
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व्यापार मंडल के नगर अध्यक्ष कंवलजीत सिंह गब्बर ने बताया कि छोटे तथा मध्यम वर्ग के व्यापारी वाहनों की पार्किंग की समस्या से जूझ रहे हैं। पार्किंग की व्यवस्था नहीं होने से व्यापारियों व अन्य लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। पूरे दिन जाम की समस्या बनी रहती है। नो वेंडिंग जोन में ठेले तथा खोमचे वाले फुटपाथ पर अतिक्रमण कर लिए हैं।
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