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अब सचिव भेजेंगे डिमांड, तब होगा मनरेगा के काम
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09- महराजगंज क्षेत्र के अमारी ग्राम सभा मे मनरेगा योजना के तहत तालाब की खुदाई कर रहे मजदूरों का हौश?
- फोटो : JAUNPUR
जौनपुर। मनरेगा मजदूरी हड़पने के आरोपों में कई ग्राम प्रधानों को जेल भेजने की कार्रवाई से नाराज जिले के प्रधानों ने मनरेगा कार्य कराने से इंकार कर दिया है। काफी कोशिशों के बाद भी प्रधानों की ओर से डिमांड न भेजे जाने पर प्रशासन ने अब सचिव और रोजगार सेवकों को आगे किया है। गांवों में अब सचिव और रोजगार सेवक संयुक्त रूप से मनरेगा के तहत काम का प्रस्ताव भेजेंगे, जिससे मस्टररोल निकालकर मजदूरों से काम कराया जाएगा।
जिले में कुल 1749 ग्राम पंचायतें हैं। इन ग्राम पंचायतों में मनरेगा का कार्य भी प्रधान के देख रेख में होता था। मनरेगा कार्य मनरेगा मजदूरों से कराया जाता है। इस दौरान जिले में कुल 3 लाख 52 हजार 789 मनरेगा मजदूर हैं। इसमें से एक लाख 80 हजार 242 मजदूरों को सक्रिय श्रेणी में रखा गया है, जो बराबर काम मांगते हैं और करते भी हैं। कई गांवों में प्रधानों पर मजदूरों के खाते से जबरन पैसा निकलवाकर मजदूरी हड़पने के आरोपों के बाद प्रशासन ने उन पर केस दर्ज कराया है। इससे नाराज प्रधानों ने मनरेगा का कार्य कराने से हाथ खड़ा कर दिया। सीडीओ अनुपम शुक्ला व डीसी मनरेगा भूपेंद्र कुमार सिंह के लाख समझाने के बाद भी जब काम कराने को प्रधान तैयार नहीं हुई तो मनरेगा के कार्य को कराने की जिम्मेदारी 308 सचिव व 1010 रोजगार सेवकों को सौंपी गई है। साथ ही उनको काम करने के इच्छुक मनरेगा मजदूरों से प्रार्थना पत्र लेकर डिमांड भेजने का निर्देश दिया गया है। इससे मस्टल रोल निकाल कर मनरेगा का कार्य शुरू हो सके।
एफआईआर दर्ज होने से प्रधानों ने मनरेगा का कार्य करने से इंकार कर दिया है। मनरेगा का कार्य हो सके। इसके लिए सचिव व रोजगार सेवकों की जिम्मेदारी सौपी गई है, जो मनरेगा का कार्य कराएंगे। -भूपेंद्र कुमार सिंह, उपायुक्त मनरेगा।
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जिले में कुल 1749 ग्राम पंचायतें हैं। इन ग्राम पंचायतों में मनरेगा का कार्य भी प्रधान के देख रेख में होता था। मनरेगा कार्य मनरेगा मजदूरों से कराया जाता है। इस दौरान जिले में कुल 3 लाख 52 हजार 789 मनरेगा मजदूर हैं। इसमें से एक लाख 80 हजार 242 मजदूरों को सक्रिय श्रेणी में रखा गया है, जो बराबर काम मांगते हैं और करते भी हैं। कई गांवों में प्रधानों पर मजदूरों के खाते से जबरन पैसा निकलवाकर मजदूरी हड़पने के आरोपों के बाद प्रशासन ने उन पर केस दर्ज कराया है। इससे नाराज प्रधानों ने मनरेगा का कार्य कराने से हाथ खड़ा कर दिया। सीडीओ अनुपम शुक्ला व डीसी मनरेगा भूपेंद्र कुमार सिंह के लाख समझाने के बाद भी जब काम कराने को प्रधान तैयार नहीं हुई तो मनरेगा के कार्य को कराने की जिम्मेदारी 308 सचिव व 1010 रोजगार सेवकों को सौंपी गई है। साथ ही उनको काम करने के इच्छुक मनरेगा मजदूरों से प्रार्थना पत्र लेकर डिमांड भेजने का निर्देश दिया गया है। इससे मस्टल रोल निकाल कर मनरेगा का कार्य शुरू हो सके।
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एफआईआर दर्ज होने से प्रधानों ने मनरेगा का कार्य करने से इंकार कर दिया है। मनरेगा का कार्य हो सके। इसके लिए सचिव व रोजगार सेवकों की जिम्मेदारी सौपी गई है, जो मनरेगा का कार्य कराएंगे। -भूपेंद्र कुमार सिंह, उपायुक्त मनरेगा।
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