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67 प्रत्याशियों से अधिक नोटा को मिला है वोट, 69 प्रत्याशी पाए हैं 1000 से भी कम मत
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जौनपुर। मतदाता अपने वोट की कीमत समझने लगे हैं। वे अपने मत को खराब नहीं करना चाहते हैं। ऐसा इस बार के विधानसभा चुनाव में देखने को मिला। जहां 12 हजार एक मतदाताओं को 121 प्रत्याशियों में कोई पसंद नहीं आया। ऐसी स्थिति में उन्होंने नोटा (इनमें से कोई नहीं) का बजट दबाया। मतगणना के परिणाम पर नजर करें तो 67 प्रत्याशियों को नोटा के बराबर भी वोट नहीं मिला।
जिले में 69 प्रत्याशी ऐसे हैं, जिन्हें एक हजार से कम मत मिला। जबकि 29 उम्मीदवार ऐसे हैं, जिन्हें 500 से भी मत मिले हैं। विधानसभा चुनाव जनपद के नौ विधानसभा सीटों पर हुआ। सात मार्च को 20 लाख 7 हजार 504 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया लेकिन इसमें 12 हजार एक मतदाता ऐसे थे, जिन्हें 121 प्रत्याशियों में से कोई प्रत्याशी पसंद नहीं आया। ऐसी स्थिति में और लोकतंत्र के महापर्व में शामिल तो हुए लेकिन अपना विरोध जताने के लिए नोटा का बटन दबाया। आंकड़ों को देखे तो केराकत विधानसभा के चुनावी समर में उतरे 10 प्रत्याशियों में कोई पसंद नहीं था। इस कारण सर्वाधिक दो हजार 147 लोगों ने मतदान तो किया लेकिन नोटा पर। इसी तरह शाहगंज में 13 प्रत्याशियों होने के बाद भी 1643 लोगों को कोई पसंद नहीं आया और वे नोटों पर बटन दबाए। इस मामले में तीसरे स्थान पर जफराबाद विधानसभा क्षेत्र के 1550 लोग ऐसे थे, जिन्हें 10 प्रत्याशियों में कोई योग्य नजर नहीं आया और वे अपना मत नोटा पर दबाए। इसी तरह मडि़याहूं मं 1431 ऐसे मतदाता थे, जिन्हें 12 उम्मीदवारों में कोई पसंद नहीं आया, जिसकी वजह से इन्होंने नोटा का बटन दबाया। इसके बाद मल्हनी विधानसभा के 1333 मतदाताओं को 12 प्रत्याशियों में से कोई पसंद नहीं आया, और जिसके कारण उन्होंने नोटा को अपना वोट दिया। इसी तरह, मुंगराबादशाहपुर विधानसभा क्षेत्र से 1267 लोगों ने 15 प्रत्याशियों में से किसी को पसंद नहीं किया और अपना वोट नोटा के बटन को दबाकर किया। मछलीशहर में 1198 लोगों ने 10 प्रत्याशियों में से किसी को योग्य न मानते हुए अपना मतदान नोटा के बजट को दबाकर दिया। वहीं, बदलापुर विधानसभा क्षेत्र में 890 लोगों ने 14 प्रत्याशियों में किसी को अपने मानक पर खरा नहीं माना, लेकिन अपना मतदान का प्रयोग नोटा दबाकर किया। नौ विधानसभा सीटों पर सबसे कम नोटा पर वोट सदर विधानसभा सीट पर पड़ा। जहां 25 प्रत्याशियों के होने के बाद भी 542 लोगों ने अपना वोट नोटा पर दिया।
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जिले में 69 प्रत्याशी ऐसे हैं, जिन्हें एक हजार से कम मत मिला। जबकि 29 उम्मीदवार ऐसे हैं, जिन्हें 500 से भी मत मिले हैं। विधानसभा चुनाव जनपद के नौ विधानसभा सीटों पर हुआ। सात मार्च को 20 लाख 7 हजार 504 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया लेकिन इसमें 12 हजार एक मतदाता ऐसे थे, जिन्हें 121 प्रत्याशियों में से कोई प्रत्याशी पसंद नहीं आया। ऐसी स्थिति में और लोकतंत्र के महापर्व में शामिल तो हुए लेकिन अपना विरोध जताने के लिए नोटा का बटन दबाया। आंकड़ों को देखे तो केराकत विधानसभा के चुनावी समर में उतरे 10 प्रत्याशियों में कोई पसंद नहीं था। इस कारण सर्वाधिक दो हजार 147 लोगों ने मतदान तो किया लेकिन नोटा पर। इसी तरह शाहगंज में 13 प्रत्याशियों होने के बाद भी 1643 लोगों को कोई पसंद नहीं आया और वे नोटों पर बटन दबाए। इस मामले में तीसरे स्थान पर जफराबाद विधानसभा क्षेत्र के 1550 लोग ऐसे थे, जिन्हें 10 प्रत्याशियों में कोई योग्य नजर नहीं आया और वे अपना मत नोटा पर दबाए। इसी तरह मडि़याहूं मं 1431 ऐसे मतदाता थे, जिन्हें 12 उम्मीदवारों में कोई पसंद नहीं आया, जिसकी वजह से इन्होंने नोटा का बटन दबाया। इसके बाद मल्हनी विधानसभा के 1333 मतदाताओं को 12 प्रत्याशियों में से कोई पसंद नहीं आया, और जिसके कारण उन्होंने नोटा को अपना वोट दिया। इसी तरह, मुंगराबादशाहपुर विधानसभा क्षेत्र से 1267 लोगों ने 15 प्रत्याशियों में से किसी को पसंद नहीं किया और अपना वोट नोटा के बटन को दबाकर किया। मछलीशहर में 1198 लोगों ने 10 प्रत्याशियों में से किसी को योग्य न मानते हुए अपना मतदान नोटा के बजट को दबाकर दिया। वहीं, बदलापुर विधानसभा क्षेत्र में 890 लोगों ने 14 प्रत्याशियों में किसी को अपने मानक पर खरा नहीं माना, लेकिन अपना मतदान का प्रयोग नोटा दबाकर किया। नौ विधानसभा सीटों पर सबसे कम नोटा पर वोट सदर विधानसभा सीट पर पड़ा। जहां 25 प्रत्याशियों के होने के बाद भी 542 लोगों ने अपना वोट नोटा पर दिया।
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