{"_id":"58ac9b384f1c1b0853b24919","slug":"need-to-develop-nkaushl","type":"story","status":"publish","title_hn":"ंकौशल को विकसित करने की जरूरत ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ंकौशल को विकसित करने की जरूरत
jaunpur
Updated Wed, 22 Feb 2017 01:25 AM IST
विज्ञापन
प्रमाण-पत्र के साथ प्रतिभागी शोधार्थी।
- फोटो : jounpur
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मदन मोहन मालवीय तकनीकी विश्वविद्यालय गोरखपुर के कुलपति प्रो. ओंकार सिंह ने कहा कि शोधार्थी कौशल को निरंतर विकसित करें। गुणवत्ता में निश्चित रूप से निखार आएगा विकास में शोध की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। हमारी सृजनात्मकता और शक्ति हमें समाज में खुद को साबित करने का मौका देती है। वह वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के शोध एवं नवाचार केन्द्र में मंगलवार को भारतीय विश्वविद्यालय संघ नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में चल रहे दो दिवसीय विद्यार्थी शोध सम्मेलन अन्वेषण 2017 के समापन अवसर पर बोल रहे थे।
कुलपति प्रो. पीयूष रंजन अग्रवाल ने कहा कि सम्मेलन में पूर्वी भारत से आए हुए विद्यार्थियों को एक दूसरे की संस्कृति और ज्ञान को समझने का एक बड़ा मौका मिला है। यह सम्मेलन विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के व्यक्तित्व विकास में बड़ी भूमिका अदा करेगा। उन्होंने कहा कि शोध आपको उस क्षेत्र में एक विशिष्ट व्यक्ति बनाता है जिसमें आप शोध कार्य कर रहे होते हैं। विद्यार्थियों को कम स्रोतों में ज्यादा नवाचार विचार और संकल्पना को विकसित करने की आदत डालनी चाहिए। कर्म के अनुरूप ही परिणाम भी वैसा ही मिलता है।
भारतीय विश्वविद्यालय संघ के उप निदेशक डा. अमरेन्द्र ने धन्यवाद ज्ञापित किया। भारतीय विश्वविद्यालय संघ की सहायक निदेशक डा. उषा रानी नेगी ने परिणामों की घोषणा की और डा. वन्दना राय ने रिपोर्ट प्रस्तुत किया।
विज्ञापन
वित्त अधिकारी एमके सिंह स्वागत किया। इस अवसर पर प्रो. डीडी दूबे, कुलसचिव डा. देवराज, प्रो.एके श्रीवास्तव, डा. मानस पांडेय, डा. अजय द्विवेदी, डा. राजेश शर्मा, डा. एसपी तिवारी, डा. प्रवीण कुमार सिंह, डा. अविनाश पाथर्डीकर, डा. दिग्विजय सिंह राठौर, डा.अवध बिहारी सिंह, डा. मनोज मिश्र, डा. रसिकेश, नुपूर तिवारी, डा. सुरजीत यादव, विनय वर्मा, पंकज सिंह आदि मौजूद थे। संचालन डा. आशुतोष सिंह ने किया।
विज्ञापन
कुलपति प्रो. पीयूष रंजन अग्रवाल ने कहा कि सम्मेलन में पूर्वी भारत से आए हुए विद्यार्थियों को एक दूसरे की संस्कृति और ज्ञान को समझने का एक बड़ा मौका मिला है। यह सम्मेलन विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के व्यक्तित्व विकास में बड़ी भूमिका अदा करेगा। उन्होंने कहा कि शोध आपको उस क्षेत्र में एक विशिष्ट व्यक्ति बनाता है जिसमें आप शोध कार्य कर रहे होते हैं। विद्यार्थियों को कम स्रोतों में ज्यादा नवाचार विचार और संकल्पना को विकसित करने की आदत डालनी चाहिए। कर्म के अनुरूप ही परिणाम भी वैसा ही मिलता है।
विज्ञापन
भारतीय विश्वविद्यालय संघ के उप निदेशक डा. अमरेन्द्र ने धन्यवाद ज्ञापित किया। भारतीय विश्वविद्यालय संघ की सहायक निदेशक डा. उषा रानी नेगी ने परिणामों की घोषणा की और डा. वन्दना राय ने रिपोर्ट प्रस्तुत किया।
विज्ञापन
वित्त अधिकारी एमके सिंह स्वागत किया। इस अवसर पर प्रो. डीडी दूबे, कुलसचिव डा. देवराज, प्रो.एके श्रीवास्तव, डा. मानस पांडेय, डा. अजय द्विवेदी, डा. राजेश शर्मा, डा. एसपी तिवारी, डा. प्रवीण कुमार सिंह, डा. अविनाश पाथर्डीकर, डा. दिग्विजय सिंह राठौर, डा.अवध बिहारी सिंह, डा. मनोज मिश्र, डा. रसिकेश, नुपूर तिवारी, डा. सुरजीत यादव, विनय वर्मा, पंकज सिंह आदि मौजूद थे। संचालन डा. आशुतोष सिंह ने किया।