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नैनो तकनीक से दवाएं होंगी कारगर : प्रो.कृष्णलाल

Sun, 17 Nov 2019 12:30 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 17 Nov 2019 12:30 AM IST
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Nano technology will make medicines work: Prof. Krishnalal
नैनो तकनीक से दवाएं होंगी कारगर : प्रो.कृष्णलाल
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अल्ट्रासोनिक्स एवं पदार्थविज्ञान विषयक तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीयसम्मेलन शुरू
अम्र उजाला ब्यूरो
जौनपुर। राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला एवं भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर कृष्णलाल ने कहा कि नैनो तकनीक से दवाओं को अधिक कारगर और कम साइड इफेक्ट वाली बनाया जा सकता है। कहा कि दुरुपयोग के चलते तमाम एंटीबायोटिक दवाएं बेअसर साबित होने लगी हैं। नैनो पदार्थ से उनके कारगर बनाया जा सकता है। वह वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के अवैद्यनाथ संगोष्ठी भवन में शनिवार को अल्ट्रासोनिक्स एवं पदार्थ विज्ञान विषयक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन के अवसर पर बोल रहे थे। आयोजन रज्जू भैया भौतिक विज्ञान अध्ययन एवं शोध संस्थान पूर्वांचल विश्वविद्यालय और अल्ट्रासोनिक सोसाइटी आफ इंडिया कर रहे हैं।
उन्होेंने कहा कि अल्ट्रासोनिक तकनीक से भविष्य में उपयोगी उपकरण बनाए जाएंगे। इसका इस्तेमाल शिक्षा की व्यवस्था को भी बेहतर बनाने में होगा। सम्मेलन के विशिष्ट अतिथि जार्जिया तकनीकी संस्थान फ्रांस के प्रो. निको डिक्लिरिक ने कहा कि अल्ट्रासोनिक के क्षेत्र में भारत में भी गुणवत्ता युक्त शोध हो रहे हैं। अल्ट्रासोनिक्स सोसायटी आफ इंडिया के अध्यक्ष पद्मभूषण प्रो. विक्रम कुमार ने ने कहा कि अल्ट्रासोनिक पदार्थ विकसित कर समुद्र विज्ञान, एयरक्राफ्ट का विकास किया जा सकता है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. बीकेअग्रवाल ने कहा कि मानव जीवन में अल्ट्रासोनिक और मटेरियल साइंस का बहुत महत्वपूर्ण योगदान है। कुलपति प्रो राजाराम यादव ने अतिथियों का स्वागत किया। तीन दिवसीय संगोष्ठी से विश्वविद्यालय के विद्यार्थी औरशोधार्थी लाभान्वित होंगे। धन्यवाद ज्ञापन डा. देवराज सिंह ने किया। संचालन निस्केयर नई दिल्ली के डा. मेहरबान ने किया।
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रक्त ज्यादा समय तक रहेगा सुरक्षित
जौनपुर। जार्जिया तकनीकी संस्थान फ्रांस के प्रो निको डिक्लिरिक ने कहा कि अल्ट्रासोनिक तरंगों की मदद से जैविक उतकों को अधिक समय तक संरक्षित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि एकास्टो मकैनिकल इंपीडेंस तकनीक से शारीर के किसी भी भाग के क्षतिग्रस्त उतकों का बिना किसी के नुकसान के पता लगाया जा सकता है। इससे रक्त को अधिक समय तक संरक्षित रख सकते हैं। भौतिक विज्ञान विभाग केपूर्व प्रो. बीके अग्रवाल ने ग्रेफीन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहायह भविष्य में सेमीकंडक्टर की जगह लेगा।जोबिजली की बचत के साथ साथ उर्जा की खपत को कम करेगा। विभिन्न सत्रों में 13विशेष व्याख्यान आयोजित किए गए। इस सत्र में 40 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए।
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