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बच्चों का दाना, घपलों का फंसाना
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Tue, 22 Mar 2016 01:52 AM IST
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मीरगंज के अदारी प्राथमिक विद्यालय में मध्याहन भोजन के लिए कतार में बैठे बच्चे।
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बच्चों के दोपहर का भोजन गुरु और ग्राम प्रधान मिलकर डकार रहे हैं। दोनों की मिलीभगत से स्कूलों में अधिक संख्या दिखाकर कनवर्जन राशि निकाल ली जाती है और मीनू के हिसाब से भोजन नहीं परोसा जा रहा है। यूं कहा जाए कि बच्चों का दाना गुरु और ग्राम प्रधान के घपलों का फसाना बना तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। अमर उजाला के सोमवार की पड़ताल में इसका खुलासा हुआ है।
मिड डे मील योजना 15 अगस्त 1995 से संचालित है। सुप्रीम कोर्ट ने एक सितंबर 2004 से पका पकाया भोजन प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों को देने का निर्देश दिया। 2006 में मध्याह्न भोजन प्राधिकरण गठित किया गया। 2008 में जूनियर स्कूलों को भी योजना में शामिल कर लिया गया। जिले में 2416 प्राथमिक विद्यालय और 878 जूनियर हाईस्कूल हैं।
इसके अलावा 285 सहायता प्राप्त निजी जूनियर हाईस्कूलों में योजना संचालित है। इन सभी विद्यालयों में 464646 छात्रों की संख्या बताई जा रही है। नियम है कि प्राथमिक विद्यालय के प्रत्येक बच्चे को 3.86 रुपये और जूनियर हाईस्कूल में प्रत्येक बच्चे को 5.78 रुपये की दर से कनवर्जन कास्ट दी जाती है।
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इसक े अलावा प्राइमरी में एक बच्चे पर 100 ग्राम खाद्यान्न और जूनियर में प्रत्येक बच्चे को 150 ग्राम की दर से खाद्यान्न अलग से दिया जाता है। यह रकम अगर ईमानदारी से खर्च की जाए तो बच्चों को अच्छा खासा भोजन मानक के मुताबिक दिया जा सकता है। लेकिन स्थिति यह है कि दाल और चावल भी ठीक से नहीं दिया जा रहा है।
जिम्मेदार लोग बच्चों के भोजन की क्वालिटी घटाकर मिड डे मील का कोरम पूरा कर रहे हैं। यही नहीं विद्यालय में जितने बच्चे रोज पढ़ने आते हैं उससे कहीं अधिक संख्या दिखा कर भोजन के नाम पर बंदरबाट की जा रही है। इसके लिए सरकारी महकमा भी कम जिम्मेदार नहीं है। प्राइमरी विद्यालयों में नवंबर 2015 और जूनियर विद्यालयों में दिसंबर 2015 के बाद से कनवर्जन कास्ट अभी तक नहीं दी गई है।
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मिड डे मील योजना 15 अगस्त 1995 से संचालित है। सुप्रीम कोर्ट ने एक सितंबर 2004 से पका पकाया भोजन प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों को देने का निर्देश दिया। 2006 में मध्याह्न भोजन प्राधिकरण गठित किया गया। 2008 में जूनियर स्कूलों को भी योजना में शामिल कर लिया गया। जिले में 2416 प्राथमिक विद्यालय और 878 जूनियर हाईस्कूल हैं।
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इसके अलावा 285 सहायता प्राप्त निजी जूनियर हाईस्कूलों में योजना संचालित है। इन सभी विद्यालयों में 464646 छात्रों की संख्या बताई जा रही है। नियम है कि प्राथमिक विद्यालय के प्रत्येक बच्चे को 3.86 रुपये और जूनियर हाईस्कूल में प्रत्येक बच्चे को 5.78 रुपये की दर से कनवर्जन कास्ट दी जाती है।
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इसक े अलावा प्राइमरी में एक बच्चे पर 100 ग्राम खाद्यान्न और जूनियर में प्रत्येक बच्चे को 150 ग्राम की दर से खाद्यान्न अलग से दिया जाता है। यह रकम अगर ईमानदारी से खर्च की जाए तो बच्चों को अच्छा खासा भोजन मानक के मुताबिक दिया जा सकता है। लेकिन स्थिति यह है कि दाल और चावल भी ठीक से नहीं दिया जा रहा है।
जिम्मेदार लोग बच्चों के भोजन की क्वालिटी घटाकर मिड डे मील का कोरम पूरा कर रहे हैं। यही नहीं विद्यालय में जितने बच्चे रोज पढ़ने आते हैं उससे कहीं अधिक संख्या दिखा कर भोजन के नाम पर बंदरबाट की जा रही है। इसके लिए सरकारी महकमा भी कम जिम्मेदार नहीं है। प्राइमरी विद्यालयों में नवंबर 2015 और जूनियर विद्यालयों में दिसंबर 2015 के बाद से कनवर्जन कास्ट अभी तक नहीं दी गई है।