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सोलह दिन में 35 हजार मजदूरों को काम देने पर माथापच्ची शुरू
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जौनपुर। कोरोना से प्रभावित वित्तीय सत्र में मनरेगा मजदूरों को सौ दिन काम देने पर सरकार का जोर रहा। इसके लिए खूब कार्ययोजनाएं बनीं, बजट भी आवंटित हुआ। तमाम कवायदों के बाद भी बस 16 हजार मजदूरों को ही सौ दिन काम दिया जा सका। अफसरों की यह सुस्ती अब परेशानी बढ़ाने लगी है। शासन ने अब 35 हजार से अधिक मजदूरों को भी सौ दिन काम का लक्ष्य पूरा कराने का निर्देश दिया है। यह ऐसे मजदूर हैं, जिन्होंने 80 दिन से अधिक काम पूरा कर लिया है। दिक्कत यह है कि सत्र के अंतिम दिनों में विभाग के पास न तो पर्याप्त बजट है और न ही उतनी कार्ययोजना। प्रधानों का कार्यकाल भी खत्म हो चुका है। चुनाव की व्यस्तताएं अलग से हैं। अब शेष 16 दिनों में यह लक्ष्य कैसे पूरा होगा, इसे लेकर माथापच्ची शुरू हो गई है।
मनरेगा में सौ दिन काम देने की योजना तो पहले से ही है, लेकिन अधिकांश मजदूर इस लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाते। अन्य वर्षों में शासन का भी इस पर रवैया नरम रहा, जिससे अफसर भी तमाम बहाने बनाकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते थे। इस बार कोरोना से प्रभावित वित्तीय वर्ष में शासन ने मजदूरों को ज्यादा से ज्यादा काम देने का निर्देश दिया था। इसके लिए बजट की भी कोई कमी नहीं आने दी। प्रवासी मजदूरों को भी मनरेगा से जोड़कर सरकार ने काम देने का निर्देश दिया था। शासन की विशेष रुचि के कारण अफसरों ने भी शुरुआत में काफी उत्साह दिखाया, मगर प्रवासी मजदूरों का फिर से पलायन शुरू होने पर वह शिथिल पड़ गए। उनकी यह शिथिलता अब परेशानी का सबब बन गई है। महज 16110 मजदूरों को ही सौ दिन काम मिल पाया है। लगातार काम मांगने के बाद भी तमाम मजदूर सौ दिन काम के आंकड़े से काफी दूर हैं। अब लक्ष्य पूरा करने को लेकर वह बेचैन हैं।
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35827 मजदूरों को भी पूरा करना है लक्ष्य
जिले में कुल चार लाख 76 हजार 906 लोगों का जॉब कार्ड बनाया गया है। इनमें से मात्र दो लाख 89 हजार 359 मनरेगा मजदूर ऐसे हैं, जिन्होंने इस साल काम की मांग की है। इसके सापेक्ष वित्तीय वर्ष में अभी तक मात्र 16 हजार 110 मनरेगा मजदूरों को 100 दिन का काम दिया गया है। अभी भी 35 हजार 827 मनरेगा मजदूरों को 100 दिन का काम जिम्मेदार नहीं दे पाए हैं। हालांकि इन मजूदरों ने 81 दिन से अधिक का काम पूरा कर लिया है। अब इन मजदूरों को वर्तमान वित्तीय वर्ष में 100 दिन का काम देने की तैयारी में जिम्मेदार जुट गए हैं।
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वर्जन...
35 हजार मनरेगा मजदूर ऐसे हैं, जिन्होंने चालू वित्तीय वर्ष में 81 दिन से अधिक का काम किया है। उन्हें सौ दिन का काम देने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए रूपरेखा बनाई जा रही है। सभी ब्लाकों को इस बारे में निर्देश दिया गया है। तय समय में लक्ष्य पाने का पूरा प्रयास होगा।
-भूपेंद्र कुमार सिंह, उपायुक्त मनरेगा
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मनरेगा में सौ दिन काम देने की योजना तो पहले से ही है, लेकिन अधिकांश मजदूर इस लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाते। अन्य वर्षों में शासन का भी इस पर रवैया नरम रहा, जिससे अफसर भी तमाम बहाने बनाकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते थे। इस बार कोरोना से प्रभावित वित्तीय वर्ष में शासन ने मजदूरों को ज्यादा से ज्यादा काम देने का निर्देश दिया था। इसके लिए बजट की भी कोई कमी नहीं आने दी। प्रवासी मजदूरों को भी मनरेगा से जोड़कर सरकार ने काम देने का निर्देश दिया था। शासन की विशेष रुचि के कारण अफसरों ने भी शुरुआत में काफी उत्साह दिखाया, मगर प्रवासी मजदूरों का फिर से पलायन शुरू होने पर वह शिथिल पड़ गए। उनकी यह शिथिलता अब परेशानी का सबब बन गई है। महज 16110 मजदूरों को ही सौ दिन काम मिल पाया है। लगातार काम मांगने के बाद भी तमाम मजदूर सौ दिन काम के आंकड़े से काफी दूर हैं। अब लक्ष्य पूरा करने को लेकर वह बेचैन हैं।
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35827 मजदूरों को भी पूरा करना है लक्ष्य
जिले में कुल चार लाख 76 हजार 906 लोगों का जॉब कार्ड बनाया गया है। इनमें से मात्र दो लाख 89 हजार 359 मनरेगा मजदूर ऐसे हैं, जिन्होंने इस साल काम की मांग की है। इसके सापेक्ष वित्तीय वर्ष में अभी तक मात्र 16 हजार 110 मनरेगा मजदूरों को 100 दिन का काम दिया गया है। अभी भी 35 हजार 827 मनरेगा मजदूरों को 100 दिन का काम जिम्मेदार नहीं दे पाए हैं। हालांकि इन मजूदरों ने 81 दिन से अधिक का काम पूरा कर लिया है। अब इन मजदूरों को वर्तमान वित्तीय वर्ष में 100 दिन का काम देने की तैयारी में जिम्मेदार जुट गए हैं।
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वर्जन...
35 हजार मनरेगा मजदूर ऐसे हैं, जिन्होंने चालू वित्तीय वर्ष में 81 दिन से अधिक का काम किया है। उन्हें सौ दिन का काम देने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए रूपरेखा बनाई जा रही है। सभी ब्लाकों को इस बारे में निर्देश दिया गया है। तय समय में लक्ष्य पाने का पूरा प्रयास होगा।
-भूपेंद्र कुमार सिंह, उपायुक्त मनरेगा