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Jaunpur News: सई गोमती के संगम पर पड़े थे भगवान राम के चरण
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जलालपुर (जौनपुर)। राम चरित मानस की लाइन-सई उतरि गोमती नहाए, चौथे दिवस अवधपुर आए को राजेपुर से जोड़ा जाता है। सई गोमती के संगम स्थल राजपुर त्रिमुहानी पर भगवान राम के चरण पड़े थे। यहां कार्तिक पूर्णिमा को भव्य ऐतिहासिक मेला लगता है।
जिले में राजेपुर त्रिमुहानी संगम स्थल व रामेश्वरम धाम का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व हैं। रामेश्वरम की किंवदंतिया है कि भगवान राम वनवास से लौटते समय अयोध्या में प्रवेश से पहले सई नदी को पार कर गोमती में स्नान किया था। वह इसी उद्गम स्थल पर रुके थे। यहां उन्होंने अपने आराध्य भगवान शिव की पूजा-अर्चना की थी। इसी कारण इसका नाम रामेश्वरम पड़ा। इसके बाद पुनः अयोध्या के लिए प्रस्थान किए थे जिनसे लोगों की आस्था जुड़ी है। यहां पर स्वयंभू में शिवलिंग है। गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस में भी इसका उल्लेख किया है कि सई उतर गोमती नहाए, चौथे दिवस अवधपुर आए। सई-गोमती का यह संगम तट जिले के सिरकोनी ब्लॉक में राजेपुर ग्राम सभा में स्थित रामेश्वरम धाम के नाम से जाना जाता है। रामायण में इस नदी का जिक्र है। रामाकाला में महामुनि अष्टावक्र की तपोस्थली रही है। लोग बताते है कि राजेपुर घाट स्थित रामेश्वर मंदिर के पास त्रेतायुग में महामुनि अष्टावक्र शिक्षा देते थे।
प्रभु श्री राम को उनके अनुज भरत ने बताया कि भैया आदि गंगा गोमती और सनातन गंगा सई के संगम पर स्वयंभू शिवलिंग है। इसकी जानकारी होते ही प्रभु श्री राम ने सीधे अयोध्या से इस संगम पर आकर स्नान किया और शिवलिंग की पूजा की। इसी के बाद इस संगम को रामेश्वरम धाम के नाम से जाना गया।
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डॉ.ब्रजेश कुमार यदुवंशी, शिक्षाविद् व अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार।
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जिले में राजेपुर त्रिमुहानी संगम स्थल व रामेश्वरम धाम का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व हैं। रामेश्वरम की किंवदंतिया है कि भगवान राम वनवास से लौटते समय अयोध्या में प्रवेश से पहले सई नदी को पार कर गोमती में स्नान किया था। वह इसी उद्गम स्थल पर रुके थे। यहां उन्होंने अपने आराध्य भगवान शिव की पूजा-अर्चना की थी। इसी कारण इसका नाम रामेश्वरम पड़ा। इसके बाद पुनः अयोध्या के लिए प्रस्थान किए थे जिनसे लोगों की आस्था जुड़ी है। यहां पर स्वयंभू में शिवलिंग है। गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस में भी इसका उल्लेख किया है कि सई उतर गोमती नहाए, चौथे दिवस अवधपुर आए। सई-गोमती का यह संगम तट जिले के सिरकोनी ब्लॉक में राजेपुर ग्राम सभा में स्थित रामेश्वरम धाम के नाम से जाना जाता है। रामायण में इस नदी का जिक्र है। रामाकाला में महामुनि अष्टावक्र की तपोस्थली रही है। लोग बताते है कि राजेपुर घाट स्थित रामेश्वर मंदिर के पास त्रेतायुग में महामुनि अष्टावक्र शिक्षा देते थे।
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प्रभु श्री राम को उनके अनुज भरत ने बताया कि भैया आदि गंगा गोमती और सनातन गंगा सई के संगम पर स्वयंभू शिवलिंग है। इसकी जानकारी होते ही प्रभु श्री राम ने सीधे अयोध्या से इस संगम पर आकर स्नान किया और शिवलिंग की पूजा की। इसी के बाद इस संगम को रामेश्वरम धाम के नाम से जाना गया।
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डॉ.ब्रजेश कुमार यदुवंशी, शिक्षाविद् व अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार।