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लॉक डाउन ने सुधारी गोमती नदी की सेहत

Sat, 02 May 2020 05:21 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 02 May 2020 05:21 PM IST
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Lockdown has improved the health of Gomti river
10- लगभग एक महीने से उपर हो चुके लॉकडाउन के चलते सभी निर्माण व अन्य कार्य बंद होने के चलते प्रदूषण नि - फोटो : JAUNPUR
जौनपुर। पिछले 40 दिनों से जारी लॉक डाउन ने तमाम तरह की मुश्किलें बढ़ाई हैं लेकिन कुछ सुखद परिणाम भी दिख रहे हैं। लॉक डाउन के कारण शहर के मध्य से प्रवाहित गोमती का पानी साफ हुआ है। नदी में घाटों के किनारे गंदगी और कूड़े-कचरे का ढेर अब नजर नहीं आ रहा। कलकल, अविरल धारा अब आचमन में लायक हो गई है।
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पीलीभीत से निकली गोमती नदी शाहजहांपुर, खीरी, सीतापुर, लखनऊ, सुल्तानपुर होते हुए जौनपुर आती है और फिर गाजीपुर जिले की सीमा पर गंगा में समाहित हो जाती है। अंतिम छोर पर होने के कारण यहां बड़े शहरों की औद्योगिक इकाइयों का कचरा और रसायन युक्त सीवेज से नदी प्रदूषित जाती है। शहर की सराफा मंडी में आभूषणों की सफाई में इस्तेमाल होने वाला तेजाब का पानी भी नदी में ही गिरता है। शहरी क्षेत्र में ही सात नाले नदी में मिलते हैं। लॉक डाउन के कारण औद्योगिक इकाइयां बंद हैं। इससे नदी की हालत सुधरी है। नदी का काला पड़ चुका पानी अब स्वच्छ हो गया है। हनुमान घाट स्थित मंदिर के पुजारी पं. गणेश प्रसाद पांडेय कहते हैं कि गोमती पानी इतना खराब हो गया था कि उसे छूने की इच्छा नहीं होती थी। घाट की सीढ़ियां कचरे से पटी रहती थीं। आज पानी से आचमन किया जा सकता है। ताड़तला निवासी मनोज कुमार सेठ कहते हैं कि गर्मी के दिनों में पानी कम होने से नदी में गंदगी और भी अधिक दिखती थी। इस बार ऐसी स्थिति नहीं है। स्वच्छ गोमती अभियान के अध्यक्ष गौतम गुप्ता भी यह मानते हैं कि औद्योगिक इकाइयों का रसायनयुक्त हानिकारक सीवेज न आने से नदी का पानी कुछ साफ हुआ है। गोमती स्वच्छ हो सकती है जब उसमें नाले और औद्योगिक कचरे का गिरना रोका जाए।
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वायु प्रदूषण भी हुआ आधा
लॉक डाउन का असर वायु प्रदूषण के स्तर पर भी दिख रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र बक्शा के मौसम वैज्ञानिक डॉ पंकज जायसवाल के मुताबिक सामान्य दिनों में जौनपुर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 125 से 150 के मध्य में रहता है। लॉक डाउन के बाद से यह लगातार 100 से नीचे है। पहले चरण के लॉक डाउन में यह 60 से 70 के बीच पहुंच गया था। बताया कि प्रदूषण कम होने से इस बार उमस में भी कमी आई है। सूरज की किरणें सीधे धरती तक आ रही हैं। इससे दिन में गर्मी तो पड़ रही है, लेकिन नमी न होने से उमस से राहत है। इस मौसम में बारिश होना भी वातावरण में बदलाव का ही असर है।
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