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हत्यारे पिता-पुत्र को आजीवन कारावास
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जौनपुर। पवांरा थाना क्षेत्र के बनकट गांव में पांच वर्ष पूर्व खेत में सिंचाई के लिए बिछाए गए पाइप के ऊपर से साइकिल ले जाने को विवाद में युवक की गोली मारकर हत्या करने के आरोपी पिता-पुत्र को कोर्ट ने दोषी करार दिया है। अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय महेंद्र सिंह की कोर्ट ने दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। उन पर दस-दस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
अभियोजन के अनुसार मछलीशहर के कटाहित खास गांव निवासी पंधारी पाल का पुत्र आशीष कुमार उर्फ पिंटू पाल अपने ननिहाल पवांरा के बनकट गांव में रहता था। वर्ष 2015 में 20 सितंबर को ही गांव का फूलचंद पाल साइकिल से अपने घर जा रहा था। रास्ते में सोनू तिवारी ने अपने खेत की सिंचाई के लिए पाइप बिछा रखी थी। पाइप के ऊपर से साइकिल ले जाने से क्षुब्ध सोनू ने फूलचंद के साइकिल की हवा निकाल दी। इसे लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ। आशीष सहित गांव के अन्य लोग भी पहुंच गए। सोनू वहां से अपने घर गया और थोड़ी देर बाद पिता विनोद तिवारी को बाइक से साथ लेकर आया। विनोद के ललकारने पर सोनू ने तमंचे से फायर कर दिया। बीच-बचाव के लिए आए आशीष के सीने में गोली लगी। वह गंभीर रूप से जख्मी हुआ। उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। आशीष के चाचा राजकुमार की तहरीर पर पुलिस ने पिता विनोद तिवारी व पुत्र सोनू तिवारी के विरुद्ध केस दर्ज किया था। विवेचना के बाद चार्जशीट कोर्ट में प्रस्तुत की। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता लालबहादुर पाल ने मुकदमे की पैरवी की। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद कोर्ट ने पिता-पुत्र को आशीष की हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
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अभियोजन के अनुसार मछलीशहर के कटाहित खास गांव निवासी पंधारी पाल का पुत्र आशीष कुमार उर्फ पिंटू पाल अपने ननिहाल पवांरा के बनकट गांव में रहता था। वर्ष 2015 में 20 सितंबर को ही गांव का फूलचंद पाल साइकिल से अपने घर जा रहा था। रास्ते में सोनू तिवारी ने अपने खेत की सिंचाई के लिए पाइप बिछा रखी थी। पाइप के ऊपर से साइकिल ले जाने से क्षुब्ध सोनू ने फूलचंद के साइकिल की हवा निकाल दी। इसे लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ। आशीष सहित गांव के अन्य लोग भी पहुंच गए। सोनू वहां से अपने घर गया और थोड़ी देर बाद पिता विनोद तिवारी को बाइक से साथ लेकर आया। विनोद के ललकारने पर सोनू ने तमंचे से फायर कर दिया। बीच-बचाव के लिए आए आशीष के सीने में गोली लगी। वह गंभीर रूप से जख्मी हुआ। उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। आशीष के चाचा राजकुमार की तहरीर पर पुलिस ने पिता विनोद तिवारी व पुत्र सोनू तिवारी के विरुद्ध केस दर्ज किया था। विवेचना के बाद चार्जशीट कोर्ट में प्रस्तुत की। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता लालबहादुर पाल ने मुकदमे की पैरवी की। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद कोर्ट ने पिता-पुत्र को आशीष की हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
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