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Jaunpur News: नौचंदी जुमेरात पर निकला जुलूस ए अमारी, 86 सालों से चली आ रही परंपरा

Sat, 18 Jul 2026 01:25 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 18 Jul 2026 01:25 AM IST
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'Juloos-e-Ammari' taken out on Nauchandi Jumerat; a tradition continuing for 86 years.
जुलूस की मजलिम में खेताब करते शिया स्कॉलर धर्म गुरु विश्व ख्याति प्राप्त मौलाना कल्बे रुशैद रिज
जौनपुर। शहर के बाजार भुआ स्थित दिवंगत मीर बहादुर अली दालान इमामबारगाह पर 86 साल पहले उठे अलम नौचंदी और जुलूस अमारी का बृहस्पतिवार को आयोजन किया गया। इस जुलूस में शिया समुदाय के लोगों के साथ दूसरे धर्म के लोगों ने भी हिस्सा लिया। जुलूस की मजलिस को शिया स्कॉलर धर्म गुरु विश्व ख्याति प्राप्त मौलाना कल्बे रुशैद रिजवी दिल्ली ने खिताब किया।
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अलम नौचंदी कमेटी के अध्यक्ष सैयद अलमदार हुसैन रिजवी ने बताया कि जुलूस 86 साल पहले अलम की शक्ल में तब उठा था जब पूरे शहर में प्लेग की बीमारी फैली थी। इस बीमारी खतरे को कम करने के लिए प्रभावित इलाकों में अलम को गुजारा गया था। जिससे लोगों को इस बीमारी से निजात मिल गई। तभी से ये जुलूस लगातार उठता आ रहा है। आज भी इस अलम पर लोगों की मन्नतें पूरी होती हैं। मजलिस में मौलाना ने हजरत अब्बास का मसाइब पढ़ा तो वहां मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गईं। इसी के साथ अलम और दुलदुल की शबीह इमामबारगाह से बरामद हुई। इससे पहले सोजखानी गौहर अली जैदी और एडवोकेट एहतेशाम अब्बास और उनके साथियों ने की। कई शायरों ने शेर भी पढ़े। मगरिब की नमाज को मौलाना सफदर हुसैन जैदी ने खिताब किया।
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इसके बाद शिया इंटर कॉलेज के रिटायर प्रिंसिपल मोहम्मद हसन ने पहली तकरीर की और जुलूस में अमारियां और झूला अली असगर शामिल हुआ। अंजुमन अजादारिया बारादुआरिया के हमराह शहर की सभी 20 से ज्यादा अंजुमनों ने जुलूस ने नौहा-मातम किया। जुलूस जब मीर घर पहुंचा तो डॉ. कमर अब्बास ने तकरीर की। इसके बाद अलम और ताबूते सकीना का मिलन कराया गया। ये जुलूस, पांचों शिवाला मंदिर रोड, मोहालगाजी, नसीर खां, छतरीघाट होता हुआ सदर इमामबारगाह पहुंचा और वहां पर आखिरी तकरीर बेलाल हसनैन ने की। इसके बाद जुलूस में अलविदाई मातम हुआ और जुलूस खत्म हो गया। अलम नौचंदी जुलूस ए अमारी कमेटी के सचिव शहंशाह हुसैन रिजवी ने पुलिस प्रशासन, नगर पालिका समेत तमाम विभागों का शुक्रिया अदा किया। इस मौके पर खास तौर पर दिलदार हुसैन रिजवी, सरदार हुसैन रिजवी, आलम अब्बास, सरताज अब्बास, सैफ अब्बास और शहनवाज अब्बास आदि मौजूद रहे।
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