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जौनपुरः पूर्व सांसद धनंजय सिंह को झटका, नमामि गंगे के प्रोजेक्ट मैनेजर के अपहरण और रंगदारी मामले में प्रार्थना पत्र निरस्त

Tue, 15 Mar 2022 11:27 PM IST
उत्पल कांत अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर
अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर Published by: उत्पल कांत Updated Tue, 15 Mar 2022 11:27 PM IST
सार

एडीजीसी अरुण पांडेय व सतीश रघुवंशी ने लिखित आपत्ति दाखिल की कि वादी की लिखित तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज हुई। 


 

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Jaunpur: Shock to former MP Dhananjay Singh, application canceled in the kidnapping and extortion case of project manager of Namami Gange
धनंजय सिंह - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अपर सत्र न्यायाधीश एमपी एमएलए कोर्ट शरद कुमार त्रिपाठी ने नमामि गंगे के प्रोजेक्ट मैनेजर अभिनव सिंघल का अपहरण कराने, रंगदारी मांगने तथा धमकी देने के आरोपी पूर्व सांसद धनंजय सिंह व उनके सहयोगी संतोष विक्रम का बरी करने का प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया। दोनों आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने के लिए कोर्ट ने 2 अप्रैल 2022 की तिथि नियत की है।

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वादी मुजफ्फरनगर निवासी अभिनव सिंघल ने 10 मई 2020 को लाइन बाजार थाने में अपहरण रंगदारी व अन्य धाराओं में धनंजय व उनके साथी संतोष विक्रम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि संतोष विक्रम दो साथियों के साथ वादी का अपहरण कर पूर्व सांसद के आवास पर ले गए।
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वहां धनंजय सिंह पिस्टल लेकर आए और गालियां देते हुए वादी को कम गुणवत्ता वाली सामग्री की आपूर्ति करने के लिए दबाव बनाया। इंकार करने पर धमकी देते हुए रंगदारी मांगी। इस पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली थी। मामले में पूर्व सांसद धनंजय सिंह गिरफ्तार किए गए थे। हालांकि बाद में उच्च न्यायालय इलाहाबाद से जमानत हुई।
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 पिछली तारीख पर धनंजय व संतोष विक्रम ने प्रार्थना पत्र दिया कि वादी पर दबाव डालकर एफआईआर दर्ज कराई गई। पुलिस ने विवेचना कर क्लीन चिट भी दिया, बाद में क्षेत्राधिकारी ने पुन: विवेचना का आदेश पारित किया और उच्च अधिकारियों के दबाव में बिना किसी पक्ष के आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया गया।



वादी ने पुलिस को दिए गए बयान तथा धारा 164 के बयान में घटना का समर्थन नहीं किया। लिहाजा आरोपियों ने साक्ष्य के अभाव में खुद को बरी किए जाने की कोर्ट से मांग की। एडीजीसी अरुण पांडेय व सतीश रघुवंशी ने लिखित आपत्ति दाखिल की कि वादी की लिखित तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज हुई। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपियों के अधिवक्ता द्वारा दिया गया प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया।

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