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ये कैसी व्यवस्था: 68 साल से चार कमरों में आठ कक्षाएं... 182 छात्र-छात्राओं पर सिर्फ एक शिक्षक
Tue, 11 Aug 2026 02:42 PM IST
Pragati Chand
अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर।
Published by: Pragati Chand
Updated Tue, 11 Aug 2026 02:42 PM IST
सार
Jaunpur News: जौनपुर जिले के मुंगराबादशाहपुर क्षेत्र के गुड़हाई राजकीय कन्या जूनियर हाईस्कूल में 68 साल से चार कमरों में आठ कक्षाएं चल रही हैं। यहां 182 छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रही हैं।
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राजकीय कन्या जूनियर हाईस्कूल गुड़हाई में पढ़ाते शिक्षक व पढ़ते हुए छात्र
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सरकार भले ही बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बड़े-बड़े दावे कर रही है लेकिन मुंगराबादशाहपुर क्षेत्र के गुड़हाई राजकीय कन्या जूनियर हाईस्कूल की वास्तविकता बयां करती है। कक्षा एक से आठ तक के स्कूल में 182 छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रही हैं।
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बैठने के लिए चार कमरे हैं। आठ कक्षाएं चलती हैं। सिर्फ एक शिक्षक की तैनाती है। साल 1958 से संचालित इस विद्यालय में वर्तमान में स्थायी रूप से एक भी शिक्षक तैनात नहीं है।
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शिक्षा विभाग के मानकों के अनुसार स्कूल में कम से कम आठ शिक्षकों की आवश्यकता है। अप्रैल 2023 से उच्च प्राथमिक विद्यालय नौवाडाड़ी में तैनात शिक्षक वीरेंद्र कुमार यादव को इस विद्यालय का प्रभारी बनाकर संबद्ध किया गया है।
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गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अंदाजा आप खुद लगा सकते हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि एक शिक्षक के लिए एक साथ आठ कक्षाओं का संचालन संभव नहीं है। पहले यह स्कूल प्राथमिक और जूनियर स्तर पर नगर पालिका तथा गल्ला मंडी स्थित किराए के भवनों में संचालित होता था।
उस समय भी सीमित संसाधनों के बीच केवल दो शिक्षक दोनों पालियों में शिक्षण कार्य करते थे। साल 1975 में आई आंधी और बारिश के दौरान नगर पालिका स्थित खपरैल भवन क्षतिग्रस्त हो गया। विद्यालय को गल्ला मंडी स्थित रतनलाल जायसवाल के भवन में स्थानांतरित कर दिया गया। कई दशक तक किराए के भवनों में संचालित हुआ। साल 2011 में गुड़हाई में स्कूल के नए सरकारी भवन का निर्माण हुआ।
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डीह बाबा मंदिर परिसर में बने हॉल में खाना खाते बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
दो साल से नए भवन का इंतजार, चटाई पर ककहरा
प्रदेश सरकार की ओर से परिषदीय स्कूलों को स्मार्ट क्लास, डिजिटल शिक्षा और आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के दावे किए जा रहे हैं। हकीकत दावों से अलग है। कल्यानपुर कंपोजिट स्कूल के 65 बच्चों को दो साल से स्कूल भवन बनने का इंतजार कर रहे हैं। ये बच्चे बीते दो वर्षों से डीह बाबा मंदिर के बरामदे में चटाई पर बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं। विद्यालय का भवन जर्जर घोषित होने के बाद नए भवन के लिए कवायद शुरू हुई, लेकिन दो साल बीतने के बाद भी निर्माण नहीं हो सका है।
सुरक्षा के मद्देनजर विभाग ने उसे परित्यक्त घोषित कर दिया और नए भवन के लिए रिपोर्ट भेजी गई। भवन न होने के कारण स्कूल को कुछ समय के लिए बीबीपुर कंपोजिट विद्यालय में मर्ज कर दिया गया। इससे कल्यानपुर और आसपास के बच्चों को करीब तीन किलोमीटर दूर बीबीपुर जाकर पढ़ाई करनी पड़ती थी। इससे नामांकन भी प्रभावित हुआ। बाद में शिक्षकों की मेहनत और अभिभावकों के सहयोग से विद्यालय ने निर्धारित 50 बच्चों का नामांकन पूरा किया। कल्यानपुर स्कूल को फिर से बीबीपुर से अलग कर दिया गया। विद्यालय को गांव के पंचायत भवन में संचालित कराने की पहल की गई, लेकिन सहमति नहीं बनी। इसके बाद मंदिर परिसर के बरामदे में ही कक्षाएं संचालित होने लगीं। बरामदे में ही बच्चे मध्याह्न भोजन भी करते हैं।
प्रदेश सरकार की ओर से परिषदीय स्कूलों को स्मार्ट क्लास, डिजिटल शिक्षा और आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के दावे किए जा रहे हैं। हकीकत दावों से अलग है। कल्यानपुर कंपोजिट स्कूल के 65 बच्चों को दो साल से स्कूल भवन बनने का इंतजार कर रहे हैं। ये बच्चे बीते दो वर्षों से डीह बाबा मंदिर के बरामदे में चटाई पर बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं। विद्यालय का भवन जर्जर घोषित होने के बाद नए भवन के लिए कवायद शुरू हुई, लेकिन दो साल बीतने के बाद भी निर्माण नहीं हो सका है।
सुरक्षा के मद्देनजर विभाग ने उसे परित्यक्त घोषित कर दिया और नए भवन के लिए रिपोर्ट भेजी गई। भवन न होने के कारण स्कूल को कुछ समय के लिए बीबीपुर कंपोजिट विद्यालय में मर्ज कर दिया गया। इससे कल्यानपुर और आसपास के बच्चों को करीब तीन किलोमीटर दूर बीबीपुर जाकर पढ़ाई करनी पड़ती थी। इससे नामांकन भी प्रभावित हुआ। बाद में शिक्षकों की मेहनत और अभिभावकों के सहयोग से विद्यालय ने निर्धारित 50 बच्चों का नामांकन पूरा किया। कल्यानपुर स्कूल को फिर से बीबीपुर से अलग कर दिया गया। विद्यालय को गांव के पंचायत भवन में संचालित कराने की पहल की गई, लेकिन सहमति नहीं बनी। इसके बाद मंदिर परिसर के बरामदे में ही कक्षाएं संचालित होने लगीं। बरामदे में ही बच्चे मध्याह्न भोजन भी करते हैं।