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गांवों में बरसे रिमझिम, शहर में आसमान निहारने में बीता दिन

Thu, 18 Jun 2020 11:51 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 18 Jun 2020 11:51 PM IST
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It rained in the villages, the days spent looking at the sky in the city
गांवों में बरसे मेघ, शहर में आसमान निहारते बीता दिन
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- एक घंटे में सात एमएम तक हुई बारिश, सुहाने मौसम ने गर्मी से दिलाई राहत
अमर उजाला ब्यूरो
जौनपुर। मानसून ने इस बार तय समय से पहले ही दस्तक दी है। बृहस्पतिवार को दूसरे दिन भी ग्रामीण क्षेत्रों में रिमझिम बारिश हुई। करीब एक घंटे में सात एमएम की बारिश दर्ज की गई। हालांकि शहरी क्षेत्र में लोग बारिश को तरस गए। कई बार आसमान में घने बादल छाने के बाद भी बिन बरसे लौट गए। बारिश की आस में आसमान निहारने में भी पूरा दिन बीत गया। मानसून के दस्तक देने के बाद खेतों में भी हलचल बढ़ने लगी है। किसान जोर-शोर से कृषि कार्य में जुट गए हैं।
पिछले तीन दिनों से मौसम बारिश के अनुकूल बन रहा है। बृहस्पतिवार को भी शहरी क्षेत्र में सुबह से ही आसमान में बादल छाए रहे। काले, घने बादलों को देखकर कई बार लगा कि अब बारिश झमाझम होगी, लेकिन हवाओं के कारण हर बार बादल आगे बढ़ गए। आलम यह रहा कि शहर से तीन किमी दूर अलीगंज तक बारिश हुई, लेकिन शहर में सड़कों पर धुल उड़ती रही। ठंडी हवाओं से लोग उमसभरी गर्मी से राहत महसूस करते रहे। लोगों को उम्मीद है कि जल्द ही यहां भी झमाझम बारिश होगी। उधर, ग्रामीण क्षेत्र में बक्शा, बदलापुर, सुजानगंज सहित अन्य क्षेत्रों में रिमझिम बारिश होती रही। कृषि विज्ञान केंद्र बक्शा के मौसम वैज्ञानिक डॉ. पंकज जायसवाल ने बताया कि मानसून का सामान्य समय से पहले आना और बारिश होना कृषि के संदर्भ में अच्छी खबर है। 21 जून तक तेज बारिश, बिजली, आंधी के आसार हैं। 22 जून को मध्यम वर्षा हो सकती है। आगामी 5 दिनों में अधिकतम तापमान 34 से 36 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस हवा की गति 14 से 16 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दक्षिण पूर्व/ पूरब दिशा की ओर चलेगी।
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फास्फोरस युक्त उर्वरकों से बढ़ेगी अरहर की पैदावार
संवाद न्यूज एजेंसी
जौनपुर। मानसून आने के साथ किसानों ने खेतों में तैयारी शुरू कर दी है तो कृषि विशेषज्ञों ने भी उन्हें फसल की देखभाल को लेकर सतर्कता बरतने की सलाह दी है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. संदीप कुमार व डॉ. सोमेंद्रनाथ ने बताया कि किसान दलहनी फसलों में उर्वरकों का प्रयोग बहुत ही कम या ना के बराबर करते हैं। अरहर की प्रजातियों का चयन के साथ प्रमाणित बीज और बीज की उचित मात्रा का प्रयोग भी नहीं करते हैं, जिससे अरहर का उत्पादन प्रभावित होता है। अच्छा उत्पादन पाने के लिए किसानों को सावधानी बरतने की जरुरत है। अच्छी पैदावार के लिए जीवांश युक्त बलुई दोमट या दोमट भूमि अच्छी होती है। अरहर का बीजदर दाने के आकार पर निर्भर करता है। अगर दाना महीन है तो 12 किलो प्रति हेक्टेयर और दाना मोटा है तो 15 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर बीज डालें। मेड़ पर बुवाई कर 15 से 20 प्रतिशत तक उत्पादन बढ़ा सकते हैं। इसके लिए पौधे से पौधे की दूरी 30 सेंटीमीटर व लाइन से लाइन की दूरी 60 से 70 सेंटीमीटर रखें बुवाई का उपयुक्त समय 15 जुलाई तक है। अरहर से अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए मुख्यत फास्फोरस युक्त उर्वरक जैसे सिंगल सुपर फास्फेट 250 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर या डाई अमोनियम फास्फेट 90 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर खेत में उर्वरक को डालकर मेड़ बनाएं। खरपतवारों से निजात पाने के लिए बुवाई के तुरंत बाद पेंदीमैथलीन 3.3 लीटर दवा को 500 लीटर पानी में घोलकर पीछे चलते हुए स्प्रे करें। इसके बाद जब फसल के 25 से 30 दिन की होने पर इमेजाथापर 1 लीटर दवा को 500 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। इससे सकरी व चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार नष्ट हो जाएंगे।
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