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Jaunpur News: विद्वान और धनवान होने से जरूरी है चरित्रवान होना
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जौनपुर। मुफ्तीगंज के भोगीपट्टी गांव स्थित नर्वदेश्वर मंदिर परिसर में चल रहे श्रीराम कथा में संत मदन मोहन मिश्र ने कहा कि विद्वान और धनवान होने से चरित्रवान होना ज्यादा जरूरी है।
रावण विद्वान, बलवान और धनवान से सुशोभित था, लेकिन चरित्रवान नहीं रहने के कारण उसका नाश हुआ। उन्होंने कहा कि रावण के पास अथाह धन संपदा रहने के साथ-साथ वह विद्वान व बलवान भी था, लेकिन चरित्रवान नहीं होने के कारण उसका नाश हुआ। भगवान शिव विवाह की सुंदर कथा का वर्णन करते हुए कहा कि शिव की पहली शादी राजा दक्ष की पुत्री सती से हुई थी। लेकिन दक्ष के यज्ञ में भगवान शिव के भाग नहीं लगने के कारण सती ने यज्ञ में कूदकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर दी। उसके बाद शिव जी घोर तपस्या में चले गए और सती ने हिमवान के यहां जन्म लिया। देवताओं ने शिव का विवाह पार्वती से कराने के लिए एक योजना बनाई। उनकी तपस्या भंग करने के लिए कामदेव को भेजा गया। उसने शिव की तपस्या तो भंग कर दी लेकिन खुद भी भस्म हो गया।
देवताओं के अनुरोध पर शिव जी बारात लेकर पार्वती के घर गए। जहां देवता व असुरों में अनबन थी लेकिन इनकी शादी में सभी लोग शरीक हुए। यहां तक की भूत, पिशाच भी मेहमान बनकर पहुंचे। वहीं भगवान विष्णु देवताओं सहित अलग-अलग कतार में पहुंचे। ऋषि नारद जी की अगुवाई में बड़े ही सुंदर ढंग से विवाह संपन्न हुआ। हरिद्वार से पधारे संत अंजनी दास नव निर्मित नर्मदेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव लिंग की स्थापना कर उनके महात्म्य को बताएंगे। इस अवसर पर विकास तिवारी, निश्चय तिवारी, लोकेश शुक्ला, गुड्डू तिवारी, विपिन तिवारी, त्रिभुवन मौर्य, हरिओम सहाय, अजय राय आदि उपस्थित रहे।
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रावण विद्वान, बलवान और धनवान से सुशोभित था, लेकिन चरित्रवान नहीं रहने के कारण उसका नाश हुआ। उन्होंने कहा कि रावण के पास अथाह धन संपदा रहने के साथ-साथ वह विद्वान व बलवान भी था, लेकिन चरित्रवान नहीं होने के कारण उसका नाश हुआ। भगवान शिव विवाह की सुंदर कथा का वर्णन करते हुए कहा कि शिव की पहली शादी राजा दक्ष की पुत्री सती से हुई थी। लेकिन दक्ष के यज्ञ में भगवान शिव के भाग नहीं लगने के कारण सती ने यज्ञ में कूदकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर दी। उसके बाद शिव जी घोर तपस्या में चले गए और सती ने हिमवान के यहां जन्म लिया। देवताओं ने शिव का विवाह पार्वती से कराने के लिए एक योजना बनाई। उनकी तपस्या भंग करने के लिए कामदेव को भेजा गया। उसने शिव की तपस्या तो भंग कर दी लेकिन खुद भी भस्म हो गया।
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देवताओं के अनुरोध पर शिव जी बारात लेकर पार्वती के घर गए। जहां देवता व असुरों में अनबन थी लेकिन इनकी शादी में सभी लोग शरीक हुए। यहां तक की भूत, पिशाच भी मेहमान बनकर पहुंचे। वहीं भगवान विष्णु देवताओं सहित अलग-अलग कतार में पहुंचे। ऋषि नारद जी की अगुवाई में बड़े ही सुंदर ढंग से विवाह संपन्न हुआ। हरिद्वार से पधारे संत अंजनी दास नव निर्मित नर्मदेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव लिंग की स्थापना कर उनके महात्म्य को बताएंगे। इस अवसर पर विकास तिवारी, निश्चय तिवारी, लोकेश शुक्ला, गुड्डू तिवारी, विपिन तिवारी, त्रिभुवन मौर्य, हरिओम सहाय, अजय राय आदि उपस्थित रहे।
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