{"_id":"65c7c2e725ced2dbf805ffa1","slug":"gupt-navratri-begins-ten-mahavidyas-will-be-worshiped-for-nine-days-jaunpur-news-c-193-1-jon1002-111951-2024-02-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jaunpur News: गुप्त नवरात्र शुरू, नौ दिन होगी दस महाविद्याओं की आराधना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jaunpur News: गुप्त नवरात्र शुरू, नौ दिन होगी दस महाविद्याओं की आराधना
विज्ञापन
मछलीशहर। शक्ति उपासना का पर्व गुप्त नवरात्र शनिवार से शुरू हो गया। 18 फरवरी तक रहेगा। इसी के साथ साधकों ने दस महाविद्याओं की आराधना शुरू कर दी। ज्योतिषाचार्य डाॅ.टीपी त्रिपाठी ने बताया कि महाकाल संहिता में चार नवरात्र वर्णित हैं। साल में दो बार गुप्त नवरात्र आता है। पहली माघ शुक्लपक्ष में और दूसरी आषाढ़ शुक्लपक्ष में पड़ता है। ऋतु परिवर्तन के साथ ही नवरात्र शुरू होता है। महाकाल संहिता में चारों नवरात्र का महत्व बताया गया है। बताया कि गुप्त नवरात्र में अनुष्ठान करने से सिद्धि प्राप्त होती है। बताया कि 10 से 18 फरवरी तक माघ महीने में गुप्त नवरात्र रहेगा। बताया कि इस बार गुप्त नवरात्रि में गजकेसरी नाम का राजयोग बन रहा है। वहीं सूर्य और बुध एक राशि में होने से बुधादित्य योग बना रहे हैं। इनके साथ पर्वत योग भी बन रहा है। इन तीन योग में नवरात्रि का शुरू होना शुभ माना होता है। ज्योतिषाचार्य डॉ. संतोष तिवारी बताते हैं कि कई बार तिथियों की गड़बड़ी से नवरात्र के दिन कम हो जाते हैं, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो रहा है। जिससे देवी आराधना के लिए पूरे नौ दिन मिलेंगे। इन दिनों में दस महाविद्याओं की पूजा करने की परंपरा है। जिसे किसी के सामने नहीं किया जाता है, इसलिए इसे गुप्त नवरात्र कहा जाता है।
दस महाविद्याएं, देवी के ही दस रूप होती है
देवी दुर्गा की गुप्त साधना और तंत्र-मंत्र साधना के लिए गुप्त नवरात्र में देवी काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, ध्रूमावती, बगलामुखी, मातंगी और माता कमला की पूजा की जाती हैं। ये ही दस महाविद्याएं हैं। विद्वानों का कहना है कि इनकी पूजा और साधना से हर तरह की परेशानी दूर होती है और मनोकामना भी पूरी हो जाती है।
मानसिक शुद्धि का है उत्सव
कर्मकांड के विद्वान मुरारी श्याम पांडेय कहते हैं कि गुप्त नवरात्र आध्यात्मिक रूप से भी खास है। ये पर्व आत्मिक और मानसिक शुद्धि का उत्सव है। इसे चेतना का पर्व भी कहा जाता है। इन नौ दिनों में व्रत-उपवास के साथ ही नियम और संयम का पालन किया जाता है। ऐसा करते हुए अपने मन और इंद्रियों को काबू में रखा जाता है। जिससे मन पवित्र रहता है और ब्रह्मचर्य का पालन होने से बुद्धि और चेतना भी बढ़ती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
दस महाविद्याएं, देवी के ही दस रूप होती है
देवी दुर्गा की गुप्त साधना और तंत्र-मंत्र साधना के लिए गुप्त नवरात्र में देवी काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, ध्रूमावती, बगलामुखी, मातंगी और माता कमला की पूजा की जाती हैं। ये ही दस महाविद्याएं हैं। विद्वानों का कहना है कि इनकी पूजा और साधना से हर तरह की परेशानी दूर होती है और मनोकामना भी पूरी हो जाती है।
विज्ञापन
मानसिक शुद्धि का है उत्सव
कर्मकांड के विद्वान मुरारी श्याम पांडेय कहते हैं कि गुप्त नवरात्र आध्यात्मिक रूप से भी खास है। ये पर्व आत्मिक और मानसिक शुद्धि का उत्सव है। इसे चेतना का पर्व भी कहा जाता है। इन नौ दिनों में व्रत-उपवास के साथ ही नियम और संयम का पालन किया जाता है। ऐसा करते हुए अपने मन और इंद्रियों को काबू में रखा जाता है। जिससे मन पवित्र रहता है और ब्रह्मचर्य का पालन होने से बुद्धि और चेतना भी बढ़ती है।
विज्ञापन