{"_id":"6011ad6e8ebc3e08c1621491","slug":"good-news-jaunpur-development-authority-will-be-formed-jaunpur-news-vns571373883","type":"story","status":"publish","title_hn":"खुशखबरी: जौनपुर विकास प्राधिकरण बनेगा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खुशखबरी: जौनपुर विकास प्राधिकरण बनेगा
विज्ञापन
जौनपुर। अव्यवस्थित हो चुके शहर के सुव्यवस्थित विकास के लिए अब जौनपुर विकास प्राधिकरण गठन की कवायद शुरू हो गई है। जिला स्तर पर इसका खाका खींचा जाने लगा है। डीएम मनीष कुमार वर्मा की पहल पर विकास प्राधिकरण का स्वरूप तय करने के लिए एक फरवरी को बैठक बुलाई गई है। माना जा रहा है कि प्रारंभिक चरण में मौजूदा विनियमित क्षेत्र में शामिल 241 गांवों को ही समाहित करते हुए विकास प्राधिकरण का गठन किया जाएगा। इसके बाद क्रमबद्ध रूप से इसका दायरा बढ़ेगा। विकास प्राधिकरण बनने से न सिर्फ ऐतिहासिक शहर के विकास को गति मिलेगी, बल्कि बड़े शहरों की तरह नई आवासीय कॉलोनियां भी तैयार होंगी।
14वीं शताब्दी में फिरोज शाह तुगलक ने अपने चचेरे भाई मुहम्मद बिन तुगलक उर्फ जौना खां की याद में जौनपुर शहर को बसाया था। शर्की काल में यह कला, साहित्य, शिक्षा और संगीत का बड़ा केंद्र रहा। करीब छह सौ वर्ष पुराने शहर को तेजी से बढ़ती आबादी ने अव्यवस्थित कर दिया है। शहर बेतरतीब ढंग से बढ़ता जा रहा है। व्यवस्थित बसावट के वर्ष 1973 में विनियमित क्षेत्र का गठन किया गया था, जिसे वर्ष 2001 में संशोधित करते हुए वर्ष 2021 तक के लिए नई महायोजना (मास्टर प्लान) तैयार की गई थी। तब शहर की आबादी तीन लाख तक होने का अनुमान लगाया गया था, मगर मौजूदा समय में आबादी सवा तीन लाख से अधिक हो चुकी है। इसका दायरा काफी बढ़ चुका है। नए ग्रामीण क्षेत्र बिल्कुल शहर से सट चुके हैं। अव्यवस्थित बसावट के कारण ही शहर में आए दिन जाम, अतिक्रमण सहित अन्य समस्याएं बनी रहती हैं। विनियमित क्षेत्र और नगर पालिका के पास पर्याप्त बजट व कर्मचारी न होने का भी शहर के विकास पर असर पड़ा है। लिहाजा अब बढ़ते शहर को सुव्यवस्थित तरीके से बसाने के लिए विकास प्राधिकरण के गठन की कवायद शुरू कर दी गई है। जौनपुर विकास प्राधिकरण के नाम से गठित होने वाले इस प्राधिकरण में के लिए सभी मानकों की गहराई से पड़ताल की जा रही है। आसपास के जिलों में गठित प्राधिकरण के बायलाज भी खंगाले जा रहे हैं। शीघ्र ही इसका बिंदुवार प्रारूप शासन को भेजा जाएगा।
---
प्राधिकरण से विकास को लगेंगे पंख
जौनपुर विकास प्राधिकरण को मंजूरी मिली तो न सिर्फ शहर की तस्वीर बदलेगी, बल्कि आसपास के गांव भी संवरेंगे। नए आवासीय इलाके विकसित किए जाएंगे। चौड़ी सड़कें, शुद्ध पेयजल व्यवस्था, जलनिकासी के बेहतर प्रबंध के अलावा व्यावसायिक क्षेत्र में भी इजाफा होगा। पर्यटन स्थल को भी प्राधिकरण अपने स्तर से विकसित करेगा। पूरे मंडल में फिलहाल सिर्फ वाराणसी में ही प्राधिकरण स्थापित है।
विज्ञापन
---
विनियमित क्षेत्र में हैं 241 गांव
मौजूदा विनियमित क्षेत्र में शहर के अलावा आसपास के 241 गांव समाहित हैं। इन गांवों में कोई भी निर्माण करने से पहले मास्टर प्लान कार्यालय से अनुमति लेनी होती है। यह कार्यालय भी सिर्फ अनुमति देने तक ही सिमटा है। सिटी मजिस्ट्रेट के अधीन कार्यालय में सिर्फ एक जेई, एक लिपिक व एक-दो अन्य कर्मचारी हैं। स्टाफ की कमी से वह यह निगरानी नहीं कर पाते कि स्वीकृत नक्शे के अनुरूप हो रहा है नहीं। निर्माण क्षेत्र में सड़क, नाली, हरित पट्टी आदि की भूमि पर कब्जा तो नहीं हो रहा। प्राधिकरण होने पर यह दिक्कत नहीं होगी। इसका दायरा खेतासराय और गौराबादशाहपुर तक भी बढ़ाया जा सकता है।
---
मिलेगा भरपूर बजट और स्टाफ
शहर के विकास का जिम्मा पूरी तरह नगर पालिका पर है। पालिका के पास आय के स्रोत सीमित हैं। लिहाजा जनसुविधाएं का हाल भी खराब है। विकास प्राधिकरण के बाद बजट की कमी नहीं है। शुरुआती दौर में ही कार्यालय स्थापना से लेकर आधारभूत ढांचा विकसित करने के लिए 25-50 करोड़ तक मिलेंगे। प्राधिकरण नई आवासीय कॉलोनियां बनाकर उनसे आमदनी अर्जित करेगा। उसे विकास पर खर्च किया जाएगा। प्राधिकरण का प्रशासनिक ढांचा भी अलग होगा। नगर नियोजक, सहायक नगर नियोजक, सहायक वास्तुविद, प्लानिंग सहायक, अपर सांख्यिकीय अधिकारी, सहायक सांख्यिकीय अधिकारी, अवर अभियंता समेत तीस से अधिक पद होंगे।
---
विकास प्राधिकरण गठन के लिए एक फरवरी को डीएम की अध्यक्षता में बैठक बुलाई गई है। इसमें जिला पंचायत व नगर पालिका के अध्यक्ष, पीडब्लूडी, जलनिगम, सेतु निगम के एक्सईएन, वाराणसी के एसोसिएट प्लानर सहित अन्य लोग हिस्सा लेंगे। बैठक में ही यह तय होगा कि प्राधिकरण का स्वरूप कैसा होगा। इसके बाद प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। -रोहन यादव, जेई, विनियमित क्षेत्र।
विज्ञापन
14वीं शताब्दी में फिरोज शाह तुगलक ने अपने चचेरे भाई मुहम्मद बिन तुगलक उर्फ जौना खां की याद में जौनपुर शहर को बसाया था। शर्की काल में यह कला, साहित्य, शिक्षा और संगीत का बड़ा केंद्र रहा। करीब छह सौ वर्ष पुराने शहर को तेजी से बढ़ती आबादी ने अव्यवस्थित कर दिया है। शहर बेतरतीब ढंग से बढ़ता जा रहा है। व्यवस्थित बसावट के वर्ष 1973 में विनियमित क्षेत्र का गठन किया गया था, जिसे वर्ष 2001 में संशोधित करते हुए वर्ष 2021 तक के लिए नई महायोजना (मास्टर प्लान) तैयार की गई थी। तब शहर की आबादी तीन लाख तक होने का अनुमान लगाया गया था, मगर मौजूदा समय में आबादी सवा तीन लाख से अधिक हो चुकी है। इसका दायरा काफी बढ़ चुका है। नए ग्रामीण क्षेत्र बिल्कुल शहर से सट चुके हैं। अव्यवस्थित बसावट के कारण ही शहर में आए दिन जाम, अतिक्रमण सहित अन्य समस्याएं बनी रहती हैं। विनियमित क्षेत्र और नगर पालिका के पास पर्याप्त बजट व कर्मचारी न होने का भी शहर के विकास पर असर पड़ा है। लिहाजा अब बढ़ते शहर को सुव्यवस्थित तरीके से बसाने के लिए विकास प्राधिकरण के गठन की कवायद शुरू कर दी गई है। जौनपुर विकास प्राधिकरण के नाम से गठित होने वाले इस प्राधिकरण में के लिए सभी मानकों की गहराई से पड़ताल की जा रही है। आसपास के जिलों में गठित प्राधिकरण के बायलाज भी खंगाले जा रहे हैं। शीघ्र ही इसका बिंदुवार प्रारूप शासन को भेजा जाएगा।
विज्ञापन
---
प्राधिकरण से विकास को लगेंगे पंख
जौनपुर विकास प्राधिकरण को मंजूरी मिली तो न सिर्फ शहर की तस्वीर बदलेगी, बल्कि आसपास के गांव भी संवरेंगे। नए आवासीय इलाके विकसित किए जाएंगे। चौड़ी सड़कें, शुद्ध पेयजल व्यवस्था, जलनिकासी के बेहतर प्रबंध के अलावा व्यावसायिक क्षेत्र में भी इजाफा होगा। पर्यटन स्थल को भी प्राधिकरण अपने स्तर से विकसित करेगा। पूरे मंडल में फिलहाल सिर्फ वाराणसी में ही प्राधिकरण स्थापित है।
विज्ञापन
---
विनियमित क्षेत्र में हैं 241 गांव
मौजूदा विनियमित क्षेत्र में शहर के अलावा आसपास के 241 गांव समाहित हैं। इन गांवों में कोई भी निर्माण करने से पहले मास्टर प्लान कार्यालय से अनुमति लेनी होती है। यह कार्यालय भी सिर्फ अनुमति देने तक ही सिमटा है। सिटी मजिस्ट्रेट के अधीन कार्यालय में सिर्फ एक जेई, एक लिपिक व एक-दो अन्य कर्मचारी हैं। स्टाफ की कमी से वह यह निगरानी नहीं कर पाते कि स्वीकृत नक्शे के अनुरूप हो रहा है नहीं। निर्माण क्षेत्र में सड़क, नाली, हरित पट्टी आदि की भूमि पर कब्जा तो नहीं हो रहा। प्राधिकरण होने पर यह दिक्कत नहीं होगी। इसका दायरा खेतासराय और गौराबादशाहपुर तक भी बढ़ाया जा सकता है।
---
मिलेगा भरपूर बजट और स्टाफ
शहर के विकास का जिम्मा पूरी तरह नगर पालिका पर है। पालिका के पास आय के स्रोत सीमित हैं। लिहाजा जनसुविधाएं का हाल भी खराब है। विकास प्राधिकरण के बाद बजट की कमी नहीं है। शुरुआती दौर में ही कार्यालय स्थापना से लेकर आधारभूत ढांचा विकसित करने के लिए 25-50 करोड़ तक मिलेंगे। प्राधिकरण नई आवासीय कॉलोनियां बनाकर उनसे आमदनी अर्जित करेगा। उसे विकास पर खर्च किया जाएगा। प्राधिकरण का प्रशासनिक ढांचा भी अलग होगा। नगर नियोजक, सहायक नगर नियोजक, सहायक वास्तुविद, प्लानिंग सहायक, अपर सांख्यिकीय अधिकारी, सहायक सांख्यिकीय अधिकारी, अवर अभियंता समेत तीस से अधिक पद होंगे।
---
विकास प्राधिकरण गठन के लिए एक फरवरी को डीएम की अध्यक्षता में बैठक बुलाई गई है। इसमें जिला पंचायत व नगर पालिका के अध्यक्ष, पीडब्लूडी, जलनिगम, सेतु निगम के एक्सईएन, वाराणसी के एसोसिएट प्लानर सहित अन्य लोग हिस्सा लेंगे। बैठक में ही यह तय होगा कि प्राधिकरण का स्वरूप कैसा होगा। इसके बाद प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। -रोहन यादव, जेई, विनियमित क्षेत्र।