जौनपुर। सीएम के फरमान का बिजली निगम के अफसरों व कर्मचारियों पर कोई असर नहीं है। जब उनका मन किया तो दफ्तर पहुंचे, नहीं तो घर पर ही आराम फरमाए। कोई पूछने और टोकने वाला नहीं है। उपभोक्ता शिकायतों के समाधान के लिए भटकें या फिर माथा पटकें, अफसरों को कोई फर्क नहीं पड़ता।
बृहस्पतिवार को बिजली निगम कार्यालय का हाल देख ड्यूटी के प्रति अफसरों की सजगता का भी अहसास हो रहा था। सीएम ने साढ़े नौ बजे तक अफसरों को दफ्तर पहुंचने का निर्देश दिया है, मगर यहां 11 बजे तक बड़े साहब नदारद रहे। कई कार्यालयों के ताले खुल रहे थे तो कई में कर्मचारी भी नहीं आए थे। कुर्सियां खाली रही, जबकि फरियादी कार्यालयों के बाहर खड़ा होकर समस्या का निस्तारण कराने के लिए साहब के आने का इंतजार कर रहे थे। निगम के कार्यालय का यह हाल जिले की विद्युत व्यवस्था के बदहाल होने का सच भी दिखा रही थी। महकमे के मंत्री जहां खुद समय के पाबंदी को लेकर लगातार हिदायतें देते फिर रहे हैं, बावजूद जिले के अफसरों में इतनी बेपरवाही हर किसी के लिए चर्चा का विषय रही।