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Jaunpur News: फंदे से लटकता मिला किशोरी का शव, 25 दिन के भीतर तीसरी मौत
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क्षेत्र के सुरिस गांव में बुधवार की शाम को घर के कमरे में लगे पंखे से किशोरी का लटकता हुआ शव मिलने से खलबली मच गई। 25 दिन के भीतर परिवार के तीन लोगों की मौत फंदे से लटककर होने से परिजनों में कोहराम मच गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया।
सुरिस गांव निवासी कक्षा सात की छात्रा खुशी बिंद (13) पुत्री तीरथ बिंद शाम के समय घर में अकेली थी। परिवार के अन्य लोग खेत में काम करने के लिए गए थे। जब वापस लौटे तो छत पर लगे पंखे के हुक से उसका शव लटक रहा था। इस घटना से परिजनों में कोहराम मच गया। सूचना पाकर पहुंचे उपनिरीक्षक जनार्दन यादव व प्रभुनाथ यादव ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। इससे पहले खुशी के चाचा मनोज पुत्र रामनाथ की 25 जून मौत हुई थी। वह फंदा लगाकर जान दिए थे। उनका दाह संस्कार हुए तेरह दिन भी नहीं बीता था कि परिवार की ही सुमन पुत्री सतीश ने नौ जुलाई को घर के अंदर फंदा लगा लिया। अब खुशी की मौत से परिवार में मातम छा गया।
बहनों में सबसे बड़ी थी खुशी
परिवार के लोगों ने बताया कि खुशी बहनों में सबसे बड़ी थी। वहीं बड़ा भाई 14 वर्षीय अरुण अपने ननिहाल में रहकर पढ़ाई करता था। पिता तिरथ बिंद दिल्ली में नौकरी कर अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं। खुशी अपनी मां के साथ रहकर पढ़ाई करते हुए घर के काम में हाथ बंटाती थी। खुशी की छोटी बहन आंशी और ढाई साल की मानसी अपने मां के साथ गांव में ही रहती हैं।
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सुरिस गांव निवासी कक्षा सात की छात्रा खुशी बिंद (13) पुत्री तीरथ बिंद शाम के समय घर में अकेली थी। परिवार के अन्य लोग खेत में काम करने के लिए गए थे। जब वापस लौटे तो छत पर लगे पंखे के हुक से उसका शव लटक रहा था। इस घटना से परिजनों में कोहराम मच गया। सूचना पाकर पहुंचे उपनिरीक्षक जनार्दन यादव व प्रभुनाथ यादव ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। इससे पहले खुशी के चाचा मनोज पुत्र रामनाथ की 25 जून मौत हुई थी। वह फंदा लगाकर जान दिए थे। उनका दाह संस्कार हुए तेरह दिन भी नहीं बीता था कि परिवार की ही सुमन पुत्री सतीश ने नौ जुलाई को घर के अंदर फंदा लगा लिया। अब खुशी की मौत से परिवार में मातम छा गया।
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बहनों में सबसे बड़ी थी खुशी
परिवार के लोगों ने बताया कि खुशी बहनों में सबसे बड़ी थी। वहीं बड़ा भाई 14 वर्षीय अरुण अपने ननिहाल में रहकर पढ़ाई करता था। पिता तिरथ बिंद दिल्ली में नौकरी कर अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं। खुशी अपनी मां के साथ रहकर पढ़ाई करते हुए घर के काम में हाथ बंटाती थी। खुशी की छोटी बहन आंशी और ढाई साल की मानसी अपने मां के साथ गांव में ही रहती हैं।
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