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सुरक्षा व्यवस्था सख्त: जेल में अब गमछे पर रोक, बंदी तौलिये का करेंगे इस्तेमाल; इस वजह से लिया गया निर्णय

Sat, 13 Jun 2026 04:17 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर। Published by: Pragati Chand Updated Sat, 13 Jun 2026 04:17 PM IST
सार

Jaunpur News: जौनपुर में जेल प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्त हो गया है। सुरक्षा के मद्देनजर जेल प्रशासन ने गमछे पर रोक लगाई है। ऐसे में अब बंदी या मुलाकाती जेल में तौलिये का इस्तेमाल करेंगे। 

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Gamchhas now banned in jail inmates or visitors to use towels instead in jaunpur
जेल के अंदर नहीं ले जा सकेंगे गमछा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जेल के भीतर सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। अब जेल परिसर के भीतर गमछा ले जाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। यह नियम कैदियों, बंदियों और उनसे मिलने आने वाले मुलाकातियों के साथ सभी पर समान रूप से लागू होगा। अब गमछे के विकल्प के तौर पर केवल तौलिए के इस्तेमाल की ही अनुमति होगी। जेल में क्षमता से दोगुने से भी अधिक कैदी बंद है। जेल की आधिकारिक क्षमता मात्र 320 बंदियों की है, लेकिन मौजूदा समय में यहां 753 विचाराधीन और सजायाफ्ता बंदी रह रहे हैं। अत्यधिक भीड़ से जेल की सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है।

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सुरक्षा के लिए खतरा बन रहा था गमछा
जेल प्रशासन के अनुसार, गमछा सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील और खतरनाक साबित हो रहा था। गमछे का कपड़ा अत्यधिक लचीला और लंबा होने के कारण इसके जरिए आत्महत्या (फंदा लगाने) जैसी घटनाओं का डर बना रहता है। इसके अलावा, गमछे की आड़ में प्रतिबंधित वस्तुओं को छिपाकर जेल के अंदर या बाहर ले जाने की आशंका भी हमेशा बनी रहती थी।
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2025 में गमछे से लगाई थी फांसी
विगत 21 नवंबर 2025 को जिला जेल में बंद मोहम्मद सुफियान (24) ने जनरेटर रूम में गमछे के सहारे टीनशेड के पोल से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। सुफियान ने साल 2025 में ही प्रेम विवाह किया था, जिसके कुछ ही दिनों बाद उसे दहेज हत्या के मामले में गिरफ्तार कर 27 अक्टूबर को जेल भेजा गया था। इस गंभीर घटना के बाद से ही जेल प्रशासन सुरक्षा को लेकर कोई ढिलाई नहीं बरतना चाहता।

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ब्रिटिश काल 1870 में बनी जेल
ब्रिटिश काल 1870 में बनी जौनपुर की इस जेल में वर्तमान में 151 कैदी हैं। इसमें 137 पुरुष और 14 महिला शामिल हैं। इसी तरह विचाराधीन बंदी 602 हैं, इनमें 543 पुरुष और 33 महिला और 26 अल्पवयस्क शामिल हैं। विभिन्न जेलों से गंभीर आरोप में आए 11 बंदी-कैदी भी हैं।

गमछे की जगह तौलिया क्यों
  1. कम लचीलापन: तौलिया अमूमन गमछे की तुलना में छोटा और कम लचीला होता है, जिससे इसका फंदा बनाना या इसे किसी गलत गतिविधि में इस्तेमाल करना कठिन होता है।
  2. सामान छिपाना नामुमकिन: तौलिए की मोटाई के कारण इसमें किसी भी प्रतिबंधित वस्तु को छिपाना आसान नहीं होता, जिससे सुरक्षाकर्मियों के लिए निगरानी रखना सुगम हो जाएगा।
  3. कैंटीन में उपलब्धता: कैदियों की व्यक्तिगत स्वच्छता प्रभावित न हो, इसके लिए जेल की कैंटीन में ही तौलिए उपलब्ध करा दिए गए हैं।

1200 बंदी-कैदी के क्षमता की बन रही नई जेल
नई जेल की क्षमता 1200 कैदियों की होगी। कुद्दूपुर, इंदरिया, रंजीतपुर में बन रही है। भवन निर्माण का जिम्मा लोक निर्माण विभाग वाराणसी के भवन खंड को सौंपा गया है। नई जेल में वीडियों कांफ्रेंसिंग की भी व्यवस्था की जाएगी। यह जेल पूरी तरह से हाईटेक होगी, इसमें उच्च सुरक्षा बैरक, अस्पताल, सीसीटीवी, अधिकारियों के आवासीय परिसर होंगे। फरवरी 2026 तक निर्माण पूरा करना था। जेल अधीक्षक के मुताबिक अभी तक 75 फीसदी ही काम हो पाया है। जबकि इसी जुलाई में काम पूर्ण करने देने का समय सीमा तय है।

अधिकारी बोले
जेल की सुरक्षा और बंदियों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए जेल में गमछा ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके स्थान पर अब केवल तौलिए के इस्तेमाल की अनुमति दी गई है। यह निर्णय जेल की आंतरिक व्यवस्था और सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए लिया गया है। -पीके त्रिवेदी, जेल अधीक्षक, जौनपुर

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