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आंधी-बारिश ने तोड़ दी किसानों की कमर
अमर उजाला ब्यूरो , जौनपुर
Updated Mon, 13 Apr 2015 11:37 PM IST
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तेज हवा के साथ बरसात ने किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है। तीन बार की आंधी-बारिश के बाद रही-सही कसर को सोमवार को प्रकृति के कोप ने पूरा कर दिया।
तेज बारिश से खेतों में खड़ी फसल तबाह हो गई और काटकर छोड़ी गई फसलों के दाने झड़ गए। खलिहानों में रखी गई फसलों पर भी बारिश आफत बनी। माना जा रहा है कि जमीन पर गिरे दाने फूल कर अंकुरित हो जाएंगे।
सोमवार को जिले के मौसम ने फिर मिजाज बदला। मौसम विभाग की चेतावनी के कारण किसान फसलों को समेटने में पहले से ही जुट गए थे, लेकिन समय कम होने के नाते हालात से समझौता करना पड़ा। इससे भारी मात्रा में काटकर
खेत में छोड़ी गई गेहूं जहां भींगकर खराब हो गई, वहीं खलिहानों में रखे बोझ तेज हवा के साथ उड़ने लगे। दिन रात पसीना बहाकर अनाज पैदा करने वाले किसानों का कलेजा यह नजारा देख बैठ गया। दोपहर बाद आसमान में धमके
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बादल शाम चार बजे के आसपास मेहरबान हो गए। साथ में तेज हवा के झोंके आंधी की शक्ल में किसानों पर बिजली गिरा रहे थे। फसल को बचाने के लिए किसान खेतों में इधर-उधर भागते रहे, तकरीबन एक घंटे की बरसात ने बचे-कुचे
अरमानों पर भी पानी फेर दिया। किसानों की पीड़ा यह है कि अब साल भर की अनाज की जरूरत कैसे पूरी होगी। महाराजगंज ब्लाक के कोल गांव के किसान यदुवंश तिवारी, लालजीत सिंह, राम अभिलाष तिवारी आदि किसानों ने
बताया कि उनकी समूची फसल तेज हवा के चलते पहले ही खेत में गिरकर नष्ट हो गई थी। रही-सही कसर इस बारिश ने पूरी कर दी। चरियाहीं गांव निवासी रामयश यादव, लालता प्रसाद, तीरथ यादव आदि ने कहा कि फसल बर्बाद होने से
वर्ष भर के भोजन की व्यवस्था की चिंता में उनकी रातों की नींद उड़ गई है। गद्दोपुर के पिंटू पांडेय की फसल पिछली बरसात में खेत में गिरने से सड़ गई। जिनकी फसल थोड़ी-बहुत बची थी, वे आनन-फानन उसे समेटने में लगे थे। किसानों का कहना है कि अब उनके सामने भूखों मरने की नौबत है।
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तेज बारिश से खेतों में खड़ी फसल तबाह हो गई और काटकर छोड़ी गई फसलों के दाने झड़ गए। खलिहानों में रखी गई फसलों पर भी बारिश आफत बनी। माना जा रहा है कि जमीन पर गिरे दाने फूल कर अंकुरित हो जाएंगे।
सोमवार को जिले के मौसम ने फिर मिजाज बदला। मौसम विभाग की चेतावनी के कारण किसान फसलों को समेटने में पहले से ही जुट गए थे, लेकिन समय कम होने के नाते हालात से समझौता करना पड़ा। इससे भारी मात्रा में काटकर
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खेत में छोड़ी गई गेहूं जहां भींगकर खराब हो गई, वहीं खलिहानों में रखे बोझ तेज हवा के साथ उड़ने लगे। दिन रात पसीना बहाकर अनाज पैदा करने वाले किसानों का कलेजा यह नजारा देख बैठ गया। दोपहर बाद आसमान में धमके
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बादल शाम चार बजे के आसपास मेहरबान हो गए। साथ में तेज हवा के झोंके आंधी की शक्ल में किसानों पर बिजली गिरा रहे थे। फसल को बचाने के लिए किसान खेतों में इधर-उधर भागते रहे, तकरीबन एक घंटे की बरसात ने बचे-कुचे
अरमानों पर भी पानी फेर दिया। किसानों की पीड़ा यह है कि अब साल भर की अनाज की जरूरत कैसे पूरी होगी। महाराजगंज ब्लाक के कोल गांव के किसान यदुवंश तिवारी, लालजीत सिंह, राम अभिलाष तिवारी आदि किसानों ने
बताया कि उनकी समूची फसल तेज हवा के चलते पहले ही खेत में गिरकर नष्ट हो गई थी। रही-सही कसर इस बारिश ने पूरी कर दी। चरियाहीं गांव निवासी रामयश यादव, लालता प्रसाद, तीरथ यादव आदि ने कहा कि फसल बर्बाद होने से
वर्ष भर के भोजन की व्यवस्था की चिंता में उनकी रातों की नींद उड़ गई है। गद्दोपुर के पिंटू पांडेय की फसल पिछली बरसात में खेत में गिरने से सड़ गई। जिनकी फसल थोड़ी-बहुत बची थी, वे आनन-फानन उसे समेटने में लगे थे। किसानों का कहना है कि अब उनके सामने भूखों मरने की नौबत है।