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Jaunpur News: आतिशबाजी से बिगड़ी हवा के सेहत, सांस के मरीजों की बढ़ी परेशानी
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दीपावली के मौके पर हुई आतिशबाजी ने शहर की हवा की सेहत को बिगाड़ कर रख दिया। इसकी वजह से सांस के मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। मंगलवार और बुधवार को भी दिनभर धुंध छाई रही। जिला अस्पताल में इलाज कराने के लिए कई मरीज पहुंचे। गोवर्धन पूजा के चलने बुधवार को दोपहर तक ओपीडी हुई। ओपीडी में इलाज के लिए 769 मरीज पहुंचे।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डाॅ. अशोक कुमार यादव ने कहा कि दीपावली के बाद पटाखों से निकले धुएं के कारण वायु प्रदूषण में वृद्धि हुई है। रोशनी के पर्व दिवाली पर खूब आतिशबाजी हुई। दिवाली की रात आसमान पटाखों से जगमगाया, वहीं अगली सुबह उसी आसमान में वायु प्रदूषण देखने को मिला। त्योहार के दौरान पटाखों के उपयोग से तापमान प्रभावित हुआ और वायु को प्रदूषित बना दिया है। बुधवार को अस्पताल की ओर दोपहर 12 बजे तक थी। इस दौरान 5 से 6 मरीज ऐसे आए जिनको सांस लेने में परेशानी हो रही थी। कुछ को खांसी की शिकायत थी। इलाज के लिए आने वाले मरीजों को मास्क लगाकर बाहर निकलने की सलाह दी गई। धुंध का असर अभी एक सप्ताह तक रहेगा।
फेफड़े को नुकसान पहुंचा रहे प्रदूषक तत्व
सीएमएस डा. केके राय ने बताया कि हानिकारक गैसें हवा के साथ जब फेफड़े के भीतर पहुंचती हैं तो उसके अंदरूनी दीवारों को नुकसान पहुंचाती हैं। इसके चलते खांसी व बलगम की समस्या, सांस फूलना आदि जैसी समस्या हो सकती है। जिन्हें पहले से दमा या सांस की समस्या है, उनकी परेशानी और बढ़ गई है। कुछ पुराने मरीज दवा व डोज बदलवाने के लिए भी पहुंच रहे हैं। ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक में 15 से 20 प्रतिशत मरीज पिछले अधिक आए हैं।
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घर से बाहर निकलें तो मास्क का करें प्रयोग
दीपवाली के बाद बाड प्रदूषण के कारण बिगड़ी हवा की सेहत का असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। ऐसे बाहर निकलने से बचना चाहिए। इससे बचने के लिए मास्क लगाकर निकलें। बाहर प्रदूषण ज्यादा होने पर खिड़की-दरवाजे बंद रखें, यदि घर में कोई सांस का मरीज हो तो उसे दवा बंद न करें। पानी खूब पिएं और तली-भुनी चीजों का इस्तेमाल करने से से बचें, ताजे फल, हरी सब्जियां, एंटीऑक्सीडेंट आहार लें, यह फेफड़ों के लिए लाभदायक है। योग, अनुलोम-विलोम और ध्यान करें।
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जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डाॅ. अशोक कुमार यादव ने कहा कि दीपावली के बाद पटाखों से निकले धुएं के कारण वायु प्रदूषण में वृद्धि हुई है। रोशनी के पर्व दिवाली पर खूब आतिशबाजी हुई। दिवाली की रात आसमान पटाखों से जगमगाया, वहीं अगली सुबह उसी आसमान में वायु प्रदूषण देखने को मिला। त्योहार के दौरान पटाखों के उपयोग से तापमान प्रभावित हुआ और वायु को प्रदूषित बना दिया है। बुधवार को अस्पताल की ओर दोपहर 12 बजे तक थी। इस दौरान 5 से 6 मरीज ऐसे आए जिनको सांस लेने में परेशानी हो रही थी। कुछ को खांसी की शिकायत थी। इलाज के लिए आने वाले मरीजों को मास्क लगाकर बाहर निकलने की सलाह दी गई। धुंध का असर अभी एक सप्ताह तक रहेगा।
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फेफड़े को नुकसान पहुंचा रहे प्रदूषक तत्व
सीएमएस डा. केके राय ने बताया कि हानिकारक गैसें हवा के साथ जब फेफड़े के भीतर पहुंचती हैं तो उसके अंदरूनी दीवारों को नुकसान पहुंचाती हैं। इसके चलते खांसी व बलगम की समस्या, सांस फूलना आदि जैसी समस्या हो सकती है। जिन्हें पहले से दमा या सांस की समस्या है, उनकी परेशानी और बढ़ गई है। कुछ पुराने मरीज दवा व डोज बदलवाने के लिए भी पहुंच रहे हैं। ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक में 15 से 20 प्रतिशत मरीज पिछले अधिक आए हैं।
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घर से बाहर निकलें तो मास्क का करें प्रयोग
दीपवाली के बाद बाड प्रदूषण के कारण बिगड़ी हवा की सेहत का असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। ऐसे बाहर निकलने से बचना चाहिए। इससे बचने के लिए मास्क लगाकर निकलें। बाहर प्रदूषण ज्यादा होने पर खिड़की-दरवाजे बंद रखें, यदि घर में कोई सांस का मरीज हो तो उसे दवा बंद न करें। पानी खूब पिएं और तली-भुनी चीजों का इस्तेमाल करने से से बचें, ताजे फल, हरी सब्जियां, एंटीऑक्सीडेंट आहार लें, यह फेफड़ों के लिए लाभदायक है। योग, अनुलोम-विलोम और ध्यान करें।