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तृष्णा समाप्त करें तो होगा कल्याण
ब्यूरो
Updated Mon, 22 Feb 2016 12:51 AM IST
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श्रीश्री ठाकुर अनुकूल चंद का 128 वां जन्मोत्सव रविवार को सत्संग केन्द्र कमलानगर, हुसैनाबाद में धूमधाम से मनाया गया। भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभा यात्रा कलेक्ट्री तिराहा से होकर स्टेट बैंक, लाइन बाजार से भ्रमण करती हुई
वापस लौटी। सड़कोें के किनारे लोग शोभायात्रा की अगवानी कर रहे थे। शुभारंभ सवेरे चार बजे से कीर्तन से शुरू हो गया था। शोभा यात्रा के बाद विनती प्रार्थना एर्व धर्म ग्रन्थ पाठ एवं भजन हुआ। इसके बाद धर्म सभा का
आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि नगर पालिका अध्यक्ष दिनेश टण्डन, विशिष्ट अतिथि ओम प्रकाश सिंह रहे। अध्यक्षता दरभंगा के एपीआर सुशील सिंह ने किया। वक्ताओं ने ठाकुर जी के जीवन पर विस्तृत प्रकाश डाला।
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कहा कि उनके द्वारा बताए गए सिद्धान्तों पर चलकर समस्याओं का समाधान हो सकता है। यदि मन से आशा और तृष्णा समाप्त नहीं हुई तो भजन के लिए आसन लगाने से कुछ लाभ नहीं होगा। सबके मूल में चाहिए ईष्टानुराग।
अनुरक्त हृदय से उन्हें अनुसरण करने पर मनुष्य प्रकृत मंगल का अधिकारी होगा। एक मनमुखी दूसरा ईष्टमुखी या आदर्श मुखी व्यक्ति होता है। ठाकुर जी ने कहा है कि मुझे जंगल में रहने वाला सन्यायी नहीं गृहस्थ जीवन का
सन्यासी चाहिए। मातृ सभा में ठाकुर जी द्वारा बताए गए सिद्धान्तों पर प्रकाश डाला। सुसंतान के लिए एकनिष्ठ होना जरूरी है। इस मौके पर सैकड़ों लोगों ने दीक्षा लेकर ठाकुर के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
सभा को केन्द्रीय सत्संग देवघर झारखण्ड के प्रदीप भट्टाचार्य, शैलेन्द्र कुमार, हरिशंकर जैजैराम ने सम्बोधित किया। संचालन काली प्रसाद सिंह ने किया। आभार डा. निखिलेश श्रीवास्तव ने व्यक्त किया।
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वापस लौटी। सड़कोें के किनारे लोग शोभायात्रा की अगवानी कर रहे थे। शुभारंभ सवेरे चार बजे से कीर्तन से शुरू हो गया था। शोभा यात्रा के बाद विनती प्रार्थना एर्व धर्म ग्रन्थ पाठ एवं भजन हुआ। इसके बाद धर्म सभा का
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आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि नगर पालिका अध्यक्ष दिनेश टण्डन, विशिष्ट अतिथि ओम प्रकाश सिंह रहे। अध्यक्षता दरभंगा के एपीआर सुशील सिंह ने किया। वक्ताओं ने ठाकुर जी के जीवन पर विस्तृत प्रकाश डाला।
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कहा कि उनके द्वारा बताए गए सिद्धान्तों पर चलकर समस्याओं का समाधान हो सकता है। यदि मन से आशा और तृष्णा समाप्त नहीं हुई तो भजन के लिए आसन लगाने से कुछ लाभ नहीं होगा। सबके मूल में चाहिए ईष्टानुराग।
अनुरक्त हृदय से उन्हें अनुसरण करने पर मनुष्य प्रकृत मंगल का अधिकारी होगा। एक मनमुखी दूसरा ईष्टमुखी या आदर्श मुखी व्यक्ति होता है। ठाकुर जी ने कहा है कि मुझे जंगल में रहने वाला सन्यायी नहीं गृहस्थ जीवन का
सन्यासी चाहिए। मातृ सभा में ठाकुर जी द्वारा बताए गए सिद्धान्तों पर प्रकाश डाला। सुसंतान के लिए एकनिष्ठ होना जरूरी है। इस मौके पर सैकड़ों लोगों ने दीक्षा लेकर ठाकुर के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
सभा को केन्द्रीय सत्संग देवघर झारखण्ड के प्रदीप भट्टाचार्य, शैलेन्द्र कुमार, हरिशंकर जैजैराम ने सम्बोधित किया। संचालन काली प्रसाद सिंह ने किया। आभार डा. निखिलेश श्रीवास्तव ने व्यक्त किया।