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Jaunpur News: बच्ची की मौत के बाद भी बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहा अस्पताल

Fri, 20 Sep 2024 03:26 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 20 Sep 2024 03:26 AM IST
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Even after the death of the girl, the hospital is running without registration
मछलीशहर। नगर स्थित जिस निजी अस्पताल में बुधवार की शाम बालिका की मौत हुई थी उसका रजिस्ट्रेशन चार महीने पहले ही खत्म हो गया था। इसमें परिजनों ने गलत इंजेक्शन लगाने का आरोप लगाते हुए हंगामा भी किया था। फिर अस्पताल संचालक के साथ ही स्टाफ हॉस्पिटल बंद कर फरार हो गए। बृहस्पतिवार को फिर से अस्पताल में मरीजों का इलाज किया जा रहा था। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।
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पवांरा थाना क्षेत्र के मड़वा दोदक निवासी संतोष गुप्ता रविवार को बुखार से पीड़ित अपनी बेटी रागिनी (11) को नगर के मीरपुर तिराहा स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। परिजनों का कहना है कि उसकी बेटी स्वस्थ्य हो गई थी और बुधवार की शाम उसे डिस्चार्ज करने जा रहे थे। डाक्टर ने तीन डोज इंजेक्शन लगाने का कहते हुए एक डोज दवा शाम को परिजनों के मना करने के बावजूद लगाया। बालिका की हालत गंभीर हो गई तो उसे रेफर कर दिया। रास्ते में ही बालिका की मौत हो गई। इससे पहले भी अस्पताल में मौत के कारण तत्कालीन सीएमओ व अधीक्षक डा. रफीक फारूकी के साथ जाकर हॉस्पिटल को सीज किया था। इस बाबत सीओ गिरेंद्र सिंह ने बताया कि रजिस्ट्रेशन न होना, दूसरा चिकित्सक बैठना यह स्वास्थ्य विभाग का विषय है। अस्पताल संचालक के खिलाफ तहरीर मिली तो मुकदमा दर्जकर कार्रवाई की जाएगी।
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अप्रैल में खत्म हो गया था रजिस्ट्रेशन
मछलीशहर। सीएचसी के अधीक्षक मेजर तपिश कुमार ने बताया कि जेएमएस हॉस्पिटल का रजिस्ट्रेशन अप्रैल 2024 में ही समाप्त हो गया है। अस्पताल बिना रजिस्ट्रेशन के ही संचालित हो रहा है। अस्पताल में भर्ती मरीजों की माने तो फूल टाइम रजिस्टर्ड डाक्टर राम आसरे नहीं आते हैं। अस्पताल के मालिक ही मरीजों का इलाज करते हैं।
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कागजी डाक्टर चला रहे है नगर में दो दर्जन अस्पताल
मछलीशहर। नगर में ऐसे दो दर्जन से अधिक अस्पताल संचालित हैं जिनके संचालक किसी डाक्टर से सांठगांठ करके उनके नाम पर अस्पताल का रजिस्ट्रेशन कराते हैं। उसके बाद अस्पताल के प्रबंधक ही बतौर डाक्टर बनकर लोगों का इलाज करते हैं। विभाग द्वारा ऐसे अस्पतालों को लाइसेंस देने के बाद कभी जांच नहीं की जाती है जिससे इलाज में लापरवाही का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ता है।
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