शहर से निकलने वाले कचरा के निस्तारण के लिए भले ही सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट चालू हो गया है, लेकिन अभी भी नगर पालिका की ओर से शहर में सड़कों के किनारे और मोहल्लों के खाली भूमि पर कूड़ा फेंकने का कार्य किया जा रहा है, जिससे लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। वहीं संक्रामक बीमारियां फैलने की संभावना बनी हुई है, जिसको लेकर शहरवासी जिम्मेदारों से शिकायत भी करते हैं, लेकिन जिम्मेदारों के कान पर जूं तक नहीं रेंगता। वे सिर्फ शहर के प्रमुख बाजारों व सड़कों की सफाई कर चुप्पी साध रहे हैं।
सवा तीन लाख आबादी वाले शहर में गंदगी की सफाई के लिए तकरीबन 600 सफाई कर्मचारी तैनात हैं, जिसमें परमानेंट 168, संविदा 72 और 360 आउट सोर्सिगिं के सफाई कर्मी है, जिनके ओर से सफाई करने का कार्य किया जाता है। इस दौरान शहर से प्रतिदिन 97 टन कूड़ा निकलता है। इन कचरा का निस्तारण करने के लिए कुल्हनामऊ में करोड़ों रुपया खर्च कर बनाया गया सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट शुरू हो गया है, बावजूद इसके शहर से निकलने वाले कचरा का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। हालत यह है कि शहर से निकलने वाले गंदगी को जिम्मेदारों की ओर से कहीं सड़क के किनारे तो कहीं मोहल्लों में खाली स्थानों पर फेंकवाने का कार्य किया जा रहा है। इसका नजारा जेसीज चौराहा, सिपाह, प्रसाद इंस्टीट्यूट, घनश्यामदास बगीचा आदि स्थानों पर सड़कों के किनारे देखा जा सकता है, जिसके कारण शहरवासियों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। वहीं निकलने वाली दुर्गंध से लोगों का जीना दूभर हो गया है और संक्रामक बीमारियां फैलने की संभावना बनी हुई है।