{"_id":"ffe0bc4c516efe1c8b89d19402d055f8","slug":"earthquake-hindi-news-6","type":"story","status":"publish","title_hn":"फिर डोली धरती, कांपे लोग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फिर डोली धरती, कांपे लोग
ब्यूरो, जौनपुर, अमर उजाला
Updated Wed, 13 May 2015 12:00 AM IST
विज्ञापन
भूकंप के जबरदस्त झटकों से मंगलवार को पूरा जिला हिल गया। कुछ समय के दरम्यान दो बार आए भूकंप के चलते लोगों में दहशत फैल गई। भूकंप के झटकों ने शहर की जर्जर इमारतों की बुनियाद झंझोड़ दी। अपने ही आशियानों में लोग खौफजदा हो गए।
ख्वाजगी टोला सहित कई इलाकों में भवनों की दीवारों में दरारें पड़ गईं। लोग घरों, दफ्तरों और स्कूलों से निकल कर बाहर सड़कों पर एकत्रित हो गये थे। लोगों ने भूकंप के झटके दो बार में महसूस किये। दीवानी न्यायालय अधिवक्ता संघ के भवन में दरार आ गई। भागने के चक्कर में अधिवक्ता श्रीप्रकाश राय (40) घायल हो गए।
भूकंप का केंद्र इस बार भी नेपाल ही था। पिछली बार 25 अप्रैल को 11: 41 पर लोगों ने भूकंप का झटका महसूस किया था। इस बार पहला झटका दोपहर 12:37 बजे एवं दूसरा दस सेकेंड के अंतराल पर आया।
विज्ञापन
भूकंप का झटका महसूस होते ही लोग अपने घरों से बाहर आ गए।
कलेक्ट्रेट मेंडीएम भानुचंद्र गोस्वामी भी अपने कर्मचारियों के साथ कार्यालय से बाहर निकल गए। जिला अस्पताल से मरीजों को और जिला कारागार से बंदियों को बैरक से बाहर निकाल दिया गया। चिलचिलाती धूप में देर तक लोग अपना आशियाना छोड़कर सड़कों पर खड़े रहे।
विज्ञापन
ख्वाजगी टोला सहित कई इलाकों में भवनों की दीवारों में दरारें पड़ गईं। लोग घरों, दफ्तरों और स्कूलों से निकल कर बाहर सड़कों पर एकत्रित हो गये थे। लोगों ने भूकंप के झटके दो बार में महसूस किये। दीवानी न्यायालय अधिवक्ता संघ के भवन में दरार आ गई। भागने के चक्कर में अधिवक्ता श्रीप्रकाश राय (40) घायल हो गए।
विज्ञापन
भूकंप का केंद्र इस बार भी नेपाल ही था। पिछली बार 25 अप्रैल को 11: 41 पर लोगों ने भूकंप का झटका महसूस किया था। इस बार पहला झटका दोपहर 12:37 बजे एवं दूसरा दस सेकेंड के अंतराल पर आया।
विज्ञापन
भूकंप का झटका महसूस होते ही लोग अपने घरों से बाहर आ गए।
कलेक्ट्रेट मेंडीएम भानुचंद्र गोस्वामी भी अपने कर्मचारियों के साथ कार्यालय से बाहर निकल गए। जिला अस्पताल से मरीजों को और जिला कारागार से बंदियों को बैरक से बाहर निकाल दिया गया। चिलचिलाती धूप में देर तक लोग अपना आशियाना छोड़कर सड़कों पर खड़े रहे।