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Jaunpur News: जगह की कमी से जिला स्टेडियम में अब मैच नहीं, खिलाड़ियों में मायूसी
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करंजाकला। जिले के इंदिरा गांधी स्टेडियम में पर्याप्त जगह न होने के कारण अब क्रिकेट प्रेमियों को क्रिकेट खेलने का मौका नहीं मिलेगा। जहां पर जिले के आला अधिकारी भी फ्रेंडली क्रिकेट खेला करते थे। पर्याप्त जगह न होने से खिलाड़ियों में मायूसी है। अब खेल विभाग आयोजन के लिए दूसरे जगह की तलाश कर रहा है।
खिलाड़ियों के लिए जिला स्टेडियम में पर्याप्त मैदान न होने की वजह से अब उन्हें दूर-दराज मैच खेलने जाना पड़ रहा है। वहीं खेल का मैदान व क्रिकेट कोच न होने से खिलाड़ियों को मायूसी हो रही है। युवाओं का कहना है कि वे किसी तरह गली-कूचों व खाली पड़े खेतों में खेलकर ही अभ्यास कर पाते हैं। घंटों अभ्यास के बाद भी वे दक्ष नहीं हो पा रहे हैं।
जिले में युवाओं के लिए खेल के मैदान व प्रशिक्षक न होने के चलते युवाओं की प्रतिभा चमक नहीं पा रही है। जिले में एक भी ठीक-ठाक मैदान नहीं है। ऐसे में टेनिस बॉल से अपना अभ्यास कर स्वयं ही क्षेत्रीय टूर्नामेंट आयोजित कर प्रतिभा को निखारने का प्रयास करते हैं। इन प्रतियोगिताओं में निर्णायक से लेकर सभी भूमिका स्वयं युवा ही निभाते हैं। तकनीकी रूप से स्वयं को दक्ष बनाने के लिए युवाओं को मजबूरन कानपुर, लखनऊ, दिल्ली आदि का रुख करना पड़ता है। दूसरे शहरों में जाकर तैयारी करने में युवाओं को प्रति माह मोटी रकम खर्च करनी पड़ती है। वहीं कई क्रिकेट खिलाड़ियों जगदीश यादव, रोहन वर्मा, विवेक पाल, अवधेश यादव, पंकज यादव ने बताया कि जिला स्टेडियम में पहले क्रिकेट आसानी से हो जाया करता था लेकिन स्टेडियम में बन रहे स्विमिंग पूल। सिंथेटिक रनिंग ट्रैक व मल्टीपरपज हॉल बन जाने से स्टेडियम में अब क्रिकेट नहीं हो पाएगा। जिला खेल अधिकारी अतुल सिन्हा ने बताया की जगह की थोड़ी समस्या है। प्रयास करेंगे कि क्रिकेट के खेल का आयोजन भी कहीं ना कहीं हो सके।
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कोट
हम सभी जिले में दो जिला खेल स्टेडियम बनाने के लिए प्रयासरत हैं। जहां पर क्रिकेट का खेल हो सकेगा। कोच के भी नियुक्त करने की प्रक्रिया करेंगे जिससे क्रिकेटरों को किसी प्रकार की समस्या न हो।
गिरीशचंद्र यादव, राज्यमंत्री, युवा कल्याण एवं खेल
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खिलाड़ियों के लिए जिला स्टेडियम में पर्याप्त मैदान न होने की वजह से अब उन्हें दूर-दराज मैच खेलने जाना पड़ रहा है। वहीं खेल का मैदान व क्रिकेट कोच न होने से खिलाड़ियों को मायूसी हो रही है। युवाओं का कहना है कि वे किसी तरह गली-कूचों व खाली पड़े खेतों में खेलकर ही अभ्यास कर पाते हैं। घंटों अभ्यास के बाद भी वे दक्ष नहीं हो पा रहे हैं।
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जिले में युवाओं के लिए खेल के मैदान व प्रशिक्षक न होने के चलते युवाओं की प्रतिभा चमक नहीं पा रही है। जिले में एक भी ठीक-ठाक मैदान नहीं है। ऐसे में टेनिस बॉल से अपना अभ्यास कर स्वयं ही क्षेत्रीय टूर्नामेंट आयोजित कर प्रतिभा को निखारने का प्रयास करते हैं। इन प्रतियोगिताओं में निर्णायक से लेकर सभी भूमिका स्वयं युवा ही निभाते हैं। तकनीकी रूप से स्वयं को दक्ष बनाने के लिए युवाओं को मजबूरन कानपुर, लखनऊ, दिल्ली आदि का रुख करना पड़ता है। दूसरे शहरों में जाकर तैयारी करने में युवाओं को प्रति माह मोटी रकम खर्च करनी पड़ती है। वहीं कई क्रिकेट खिलाड़ियों जगदीश यादव, रोहन वर्मा, विवेक पाल, अवधेश यादव, पंकज यादव ने बताया कि जिला स्टेडियम में पहले क्रिकेट आसानी से हो जाया करता था लेकिन स्टेडियम में बन रहे स्विमिंग पूल। सिंथेटिक रनिंग ट्रैक व मल्टीपरपज हॉल बन जाने से स्टेडियम में अब क्रिकेट नहीं हो पाएगा। जिला खेल अधिकारी अतुल सिन्हा ने बताया की जगह की थोड़ी समस्या है। प्रयास करेंगे कि क्रिकेट के खेल का आयोजन भी कहीं ना कहीं हो सके।
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हम सभी जिले में दो जिला खेल स्टेडियम बनाने के लिए प्रयासरत हैं। जहां पर क्रिकेट का खेल हो सकेगा। कोच के भी नियुक्त करने की प्रक्रिया करेंगे जिससे क्रिकेटरों को किसी प्रकार की समस्या न हो।
गिरीशचंद्र यादव, राज्यमंत्री, युवा कल्याण एवं खेल