दुदौली के लाल की शहादत पर रोया गांव
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रविवार को कैबिनेट मंत्री पारसनाथ यादव, सांसद केपी सिंह, पूर्व सांसद धनंजय सिंह समेत बड़ी संख्या में लोग शहीद के घर पहुंचे और शोक संवेदना व्यक्त की। शहीद के पिता की स्थिति उस इंसान की तरह हो गई जिसने अपने बारे में लिखा है कि गमों ने एक भी अरमा मेरा जिंदा नही छोड़ा, मगर ऐ जिंदगी हमने तेरा पीछा
नहीं छोड़ा । वह एक गरीब परिवार का हिम्मती इंसान होने के कारण गांव के ही इंटर कालेज में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की नौकरी करके पांच पुत्रों की शिक्षा दीक्षा और दो बेटियों की पढ़ाई लिखाई, शादी विवाह कराए ।
उनके जीवन की खिली खिली बगिया में अचानक किसी की बुरी नजर लग गयी और उनका बड़ा बेटा जो कि इंटर कालेज दुदौली में अनुचर था पांच साल पहले दिवंगत हो गया । बड़े बेटे की बीवी बच्चों की जिम्मेदारी के साथ साथ उन्होंने पारस को स्नातक की शिक्षा दिलाई और वह अपनी काबलियत के बल पर इलाहाबाद से
2004 में सीआरपीएफ में बतौर कांस्टेबिल नौकरी करने लगा । 2006 में पारस का पराऊगंज की छत्रीपुर निवासिनी प्रीति किरण से विवाह हो गया । दो बच्चे भी हुए । बड़ी बेटी शिवांगी (11) अपने नाना के साथ रहकर 5वीं में पढ़ाई कर रही है।
जबकि बेटा कौशल केशर को खुद अपने साथ इलाहाबाद में किराए के मकान में रह कर पढ़ा रही थी । अब क्या होगा किसके सहारे पहाड़ सी जिंदगी कटेगी। कौन बेटी के हाथ पीले करायेगा । यही सब प्रीति को खाये जा रही है । जिसके उत्तर की तलाश में वह बार बार बेहोश हो कर गिर जा रही है ।