{"_id":"a29e1db1d4295c00358a6c74e60bc0c7","slug":"dr-helpless-messiah-lohia-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"असहायों के मसीहा थे डा. लोहिया ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
असहायों के मसीहा थे डा. लोहिया
जौनपुर ब्यूराे
Updated Tue, 13 Oct 2015 01:01 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शहर के सदर चुंगी स्थित सपा कार्यालय पर समाजवादी चिंतक डा. राम मनोहर लोहिया की पुण्यतिथि मनाई गई। उपस्थित लोगों ने उनके चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर उन्हें नमन किया।
उनके द्वारा बताए गए रास्ते पर चलकर समाज व देश के निर्माण में सहोयग करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कृषि अनुसंधान परिषद के अध्यक्ष हनुमान सिंह ने कहा कि लोहिया दलित और गरीबों के मसीहा थे।
वह आजीवन और देश की तरक्की के लिए काम करते रहे। उनका जीवन दूसरों के लिए समर्पित था। उनके विचार आज भी समाज के लिए प्रासंगिक है। उनका मानना था कि व्यक्ति का विकास होगा तो समाज और देश खुद आगे बढ़ जाएगा।
विज्ञापन
उनकी लड़ाई कभी सत्ता के लिए नहीं हुई वह तो व्यवस्था परिवर्तन करना चाहते थे। विश्व नागरिकता अभियान चलाया था। जब बीमार हुए उन्हें किसी बड़े अस्पताल में लोग भर्ती कराना चाहते थे लेकिन उन्होंने मना कर दिया। कहा कि जहां
आम आदमी का इलाज होता है वहीं उन्हें भी भर्ती कराया जाए। 1967 में उन्होंने अंतिम सांस ली। आज भी हर कोई बड़े ही सम्मान के साथ उनका नाम लेता है। इस मौके पर राजदेव यादव, यशवंता यादव, गजराज यादव, डा. हसीन, मजहर
आसिफ, अजय मौर्य, डा. रेयाज, फिरोज अहमद आदि मौजूद थे। अध्यक्षता श्याम बहादुर पाल ने की। संचालन जिला प्रवक्ता सुशील चंद्र दुबे ने किया।
विज्ञापन
उनके द्वारा बताए गए रास्ते पर चलकर समाज व देश के निर्माण में सहोयग करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कृषि अनुसंधान परिषद के अध्यक्ष हनुमान सिंह ने कहा कि लोहिया दलित और गरीबों के मसीहा थे।
विज्ञापन
वह आजीवन और देश की तरक्की के लिए काम करते रहे। उनका जीवन दूसरों के लिए समर्पित था। उनके विचार आज भी समाज के लिए प्रासंगिक है। उनका मानना था कि व्यक्ति का विकास होगा तो समाज और देश खुद आगे बढ़ जाएगा।
विज्ञापन
उनकी लड़ाई कभी सत्ता के लिए नहीं हुई वह तो व्यवस्था परिवर्तन करना चाहते थे। विश्व नागरिकता अभियान चलाया था। जब बीमार हुए उन्हें किसी बड़े अस्पताल में लोग भर्ती कराना चाहते थे लेकिन उन्होंने मना कर दिया। कहा कि जहां
आम आदमी का इलाज होता है वहीं उन्हें भी भर्ती कराया जाए। 1967 में उन्होंने अंतिम सांस ली। आज भी हर कोई बड़े ही सम्मान के साथ उनका नाम लेता है। इस मौके पर राजदेव यादव, यशवंता यादव, गजराज यादव, डा. हसीन, मजहर
आसिफ, अजय मौर्य, डा. रेयाज, फिरोज अहमद आदि मौजूद थे। अध्यक्षता श्याम बहादुर पाल ने की। संचालन जिला प्रवक्ता सुशील चंद्र दुबे ने किया।