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अस्पतालों में बढ़े मरीज, सुविधाएं नदारद
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Tue, 26 Apr 2016 12:13 AM IST
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जिला अस्पताल में सोमवार को चिकित्सक को दिखाने के लिए लगी मरीजों की भीड़।
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गर्मी बढ़ते ही जिला अस्पताल समेत सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। आंकड़ों पर गौर करें तो जनवरी से मार्च 2016 तक तकरीबन 3.17 लाख मरीजों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया है।
वर्ष भर में करीब 11 लाख मरीज अस्पतालों में आ रहे हैं। बावजूद सुविधाएं नदारद हैं। डाक्टर समय से ओपीडी में नहीं बैठते, गंदी चादरें मरीजों को दी जा रही हैं। न तो पानी पीने की कोई व्यवस्था है और न ही कूड़ा रखने के लिए डस्टबिन का ही इंतजाम हैं।
जिला अस्पताल में हर रोज लगभग दो सौ मरीज आ रहे हैं। इसमें से तकरीबन 20 मरीजों को भर्ती किया जाता है। जिला अस्पताल में 27 चिकित्सक होने चाहिए जबकि 24 की तैनाती है। लेकिन अस्पताल 18 से 20 चिकित्सक ही आते हैं।
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जो चिकित्सक आते हैं वह भी समय से नहीं ओपीडी में पहुंचते। जबकि मरीज आठ बजे से ही आना शुरू हो जाते हैं। चिकित्सकों के बैठने के बाद भीड़ के चलते धक्का मुक्की शुरू हो जाती है।
इधर डायरिया के मरीज हर रोज 6 से 10 की संख्या में जिला अस्पताल में आ रहे हैं। नियम है कि दवाएं अस्पताल से लिखी जाएं, लेकिन बाहर से भी दवाएं भर्ती मरीजों के लिए मंगाई जा रही हैं।
कभी मरीजों के राउंड के नाम पर तो कभी इमरजेंसी के नाम पर चिकित्सक इधर उधर चक्कर काटते रहते हैं। अस्पताल कैंपस में लगा आरओ प्लांट एक माह से खराब पड़ा है। जबकि भीषण गर्मी में लोग परेशान हैं।
प्याऊ की टोटियां टूटी हुई हैं। जिला अस्पताल में 185 बेड मरीजों के लिए होना चाहिए जबकि यहां 145 बेड हैं। सीएचसी, पीएचसी और जिला अस्पताल में रोज आने वाले मरीजों की संख्या दो से तीन हजार होती है। इसमें से 150 से 200 मरीज भर्ती किए जाते हैं।
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वर्ष भर में करीब 11 लाख मरीज अस्पतालों में आ रहे हैं। बावजूद सुविधाएं नदारद हैं। डाक्टर समय से ओपीडी में नहीं बैठते, गंदी चादरें मरीजों को दी जा रही हैं। न तो पानी पीने की कोई व्यवस्था है और न ही कूड़ा रखने के लिए डस्टबिन का ही इंतजाम हैं।
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जिला अस्पताल में हर रोज लगभग दो सौ मरीज आ रहे हैं। इसमें से तकरीबन 20 मरीजों को भर्ती किया जाता है। जिला अस्पताल में 27 चिकित्सक होने चाहिए जबकि 24 की तैनाती है। लेकिन अस्पताल 18 से 20 चिकित्सक ही आते हैं।
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जो चिकित्सक आते हैं वह भी समय से नहीं ओपीडी में पहुंचते। जबकि मरीज आठ बजे से ही आना शुरू हो जाते हैं। चिकित्सकों के बैठने के बाद भीड़ के चलते धक्का मुक्की शुरू हो जाती है।
इधर डायरिया के मरीज हर रोज 6 से 10 की संख्या में जिला अस्पताल में आ रहे हैं। नियम है कि दवाएं अस्पताल से लिखी जाएं, लेकिन बाहर से भी दवाएं भर्ती मरीजों के लिए मंगाई जा रही हैं।
कभी मरीजों के राउंड के नाम पर तो कभी इमरजेंसी के नाम पर चिकित्सक इधर उधर चक्कर काटते रहते हैं। अस्पताल कैंपस में लगा आरओ प्लांट एक माह से खराब पड़ा है। जबकि भीषण गर्मी में लोग परेशान हैं।
प्याऊ की टोटियां टूटी हुई हैं। जिला अस्पताल में 185 बेड मरीजों के लिए होना चाहिए जबकि यहां 145 बेड हैं। सीएचसी, पीएचसी और जिला अस्पताल में रोज आने वाले मरीजों की संख्या दो से तीन हजार होती है। इसमें से 150 से 200 मरीज भर्ती किए जाते हैं।