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सैनिटाइज हुआ जिला अस्पताल, राहत में रहे डॉक्टर-कर्मचारी
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जौनपुर। जिला अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कोरोना के तीन पाजीटिव मरीजों को वाराणसी शिफ्ट किए जाने के बाद चिकित्सक और स्वास्थ्य टीम ने राहत की सांस ली है। अब ओपीडी में भी मरीजों की संख्या बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि शुक्रवार को मरीजों की संख्या में कोई खास इजाफा नहीं दिखा, लेकिन चिकित्सक और स्वास्थ्य टीम के चेहरे पर भय का माहौल नहीं था।
लॉकडाउन के पहले जिला अस्पताल में प्रतिदिन 1200 से 1400 मरीज इलाज कराने पहुंचते थे। कोरोना का पहला मरीज मिलने के बाद से ओपीडी में मरीजों की संख्या कम हो गई है। अप्रैल के पहले सप्ताह में मरीजों की संख्या 250 से 300 के बीच पहुंच गई थी। इसमें से 50 फीसदी मरीज ऐसे होते थे जो किसी दूसरे शहर से आए थे। स्वास्थ्य टीम उन्हें जांच के लिए उन्हें जिला अस्पताल ले आई थी। कोरोना के संक्रमण के डर से जिला अस्पताल की पैथालाजी में बाहरी लोगों की जांच बंद कर दिया था। शुक्रवार को पैथालॉजी में 26 लोगों की जांच की गई। सभी लैब टेक्निशियन ने भी लैब में काम किया।
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जिला अस्पताल अब पूरी तरह से सुरक्षित है। किसी भी मरीज को डरने की जरूरत है। वह बिना किसी भय के अपनी जांच कराकर दवा ले सकते हैं। कोरोना मरीजों को शिफ्ट किए जाने के बाद अस्पताल परिसर को सैनिटाइज करा दिया गया है। -डॉ.एके शर्मा, सीएमएस जिला अस्पताल
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लॉकडाउन के पहले जिला अस्पताल में प्रतिदिन 1200 से 1400 मरीज इलाज कराने पहुंचते थे। कोरोना का पहला मरीज मिलने के बाद से ओपीडी में मरीजों की संख्या कम हो गई है। अप्रैल के पहले सप्ताह में मरीजों की संख्या 250 से 300 के बीच पहुंच गई थी। इसमें से 50 फीसदी मरीज ऐसे होते थे जो किसी दूसरे शहर से आए थे। स्वास्थ्य टीम उन्हें जांच के लिए उन्हें जिला अस्पताल ले आई थी। कोरोना के संक्रमण के डर से जिला अस्पताल की पैथालाजी में बाहरी लोगों की जांच बंद कर दिया था। शुक्रवार को पैथालॉजी में 26 लोगों की जांच की गई। सभी लैब टेक्निशियन ने भी लैब में काम किया।
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जिला अस्पताल अब पूरी तरह से सुरक्षित है। किसी भी मरीज को डरने की जरूरत है। वह बिना किसी भय के अपनी जांच कराकर दवा ले सकते हैं। कोरोना मरीजों को शिफ्ट किए जाने के बाद अस्पताल परिसर को सैनिटाइज करा दिया गया है। -डॉ.एके शर्मा, सीएमएस जिला अस्पताल
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