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पूर्णिमा पर लगाई आस्था की डुबकी, किया दान

Tue, 01 Dec 2020 12:32 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 01 Dec 2020 12:32 AM IST
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Dip of faith on full moon, donation made
कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर सुरजघाट पर गोमती नदी में स्नान करती महिलायें। - फोटो : JAUNPUR
जौनपुर। कार्तिक पूर्णिमा पर सोमवार को श्रद्धालुओं ने नदियों में आस्था की डुबकी लगाई। कोरोना संक्रमण के खतरे के कारण इस बार कहीं मेले का आयोजन नहीं हुआ लेकिन गोमती और सई नदियों पर लोगों ने पारंपरिक तरीके से स्नान किया। अन्य वर्षों की अपेक्षा इस बार भीड़ कम थी। स्नान के बाद दान किया और मंदिरों में पूजन-अर्चन किया।
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कार्तिक पूर्णिमा को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन सुबह नदी या सरोवर में स्नान कर दान करने से पुण्यफल की प्राप्ति होती है। विशेष महत्व के चलते सोमवार को भोर से ही श्रद्धालु स्नान के लिए शहर के गोमती तट पर पहुंच गए थे। गोपी घाट, सूरज घाट, हनुमान घाट, अचला देवी घाट आदि पर बड़ी संख्या में महिलाओं-पुरुषों से डुबकी लगाई। सूर्य को जल अर्पित करते हुए मंगल की कामना की। स्नान के बाद अन्न-धन का दान किया। मंदिरों में पहुंचकर पूजा-अर्चना की। स्नान का यह क्रम दोपहर तक चलता रहा। किन्हीं कारणों से घाट पर न पहुंच सके लोगों ने घरों में स्नान कर मंदिरों में पहुंचकर पूजा अर्चना की। हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा पर शहर के सूरज घाट पर भव्य मेला भी लगता रहा है, मगर इस बार कोरोना संक्रमण के चलते मेले का आयोजन नहीं हुआ।
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मेला न लगने से मायूस हुए श्रद्धालु
खुटहन/जफराबाद। कोरोना के खतरे के कारण इस बार पिलकिछा और राजेपुर में लगने वाला कार्तिक पूर्णिमा का मेला नहीं लगा। इससे श्रद्धालुओं में मायूसी रही। खुटहन में पिलकिछा घाट पर गोमती में स्नान के लिए दूर दराज से लोग पहुंचे। मान्यता है कि लंका विजय के बाद कर कार्तिक पूर्णिमा के दिन जब भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण आदि के साथ अयोध्या लौट रहे थे, तब कुछ देर के लिए पुष्पक विमान यहां उतरा था। कार्तिक पूर्णिमा से यहां हफ्ते भर का मेला लगता है, जिसमें कृषि उपकरण बिकते हैं। सिरकोनी ब्लाक के राजेपुर में सई-गोमती के संगम पर भी लोगों ने डुबकी लगाई। यह भी लोक मान्यता है कि भगवान राम ने इस संगम पर स्नान करके शिवलिंग की स्थापना की थी। यहां भी मेला लगता है लेकिन कोरोना के कारण इस बार मेला फीका रहा।
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