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दोषी को उम्रकैद, 25 हजार का जुर्माना भी
अमर उजाला ब्यूरो, जौनपुर
Updated Sun, 27 Sep 2015 12:42 AM IST
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कुल्हड़ का पानी फेंकने के मामूली विवाद को लेकर पांच वर्ष पूर्व चाकू से मारकर हत्या करने के मामले में शनिवार को एडीजे द्वितीय अरविंद मलिक ने खुले न्यायालय में एक व्यक्ति को आजीवन कारावास और 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। साथ ही अर्थदंड अदा न करने पर छह माह की अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई। अर्थदंड की आधी धनराशि मृतक की माता को देने का आदेश दिया। वहीं, दूसरे आरोपी के नाबालिग रहने के कारण उसकी पत्रावली अलग कर दी गई।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, लाइन बाजार थाना क्षेत्र के लौकरी परियावां निवासी नरोत्तम राजभर ने जफराबाद थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई कि घटना के दो दिन पूर्व उनके पौत्र नंदलाल से गांव के ही कपड़ा व्यवसायी संदीप सिंह और रतन सिंह का कुल्हड़ से पानी फेंकने पर विवाद हुआ था। 30 मई 2010 को पौत्र नंदलाल राजभर अपने मित्र सोनू राजभर के साथ कचगंाव बाजार में सामान लेने गया था। शाम सात बजे दूसरे पक्ष के संदीप सिंह और रतन सिंह एक दूकान के पास वाली गली में नंदलाल को रोककर गालीगलौज करने लगे।
इसके बाद संदीप सिंह ने नंदलाल को जोर से पकड़ लिया और रतन सिंह ने चाकू निकालकर उसके पेट में घोंप दिया। नंदलाल की आवाज सुनकर नरोत्तम और आसपास के लोग घटना स्थल पर पहुंचे। हमलावर मौके से भाग चुके थे। घायलावस्था में उसे सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत गंभीर देख चिकित्सक ने वाराणसी के लिए रेफर कर दिया, जहां उपचार के दौरान दूसरे दिन उसकी मौत हो गई।
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इस मामले में पुलिस ने विवेचना करने के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष से सहायक शासकीय अधिवक्ता जवाहरलाल यादव, प्रमोद कुमार दुबे और ज्ञानेंद्र कुमार यादव ने 11 गवाह न्यायालय में प्रस्तुत किया। न्यायाधीश ने सुनवाई के बाद लाइन बाजार थाना क्षेत्र के लौकरी परियावां निवासी संदीप सिंह को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास एवं 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। साथ ही रतन सिंह के नाबालिग होने के कारण उसकी पत्रावली अलग कर दी गई।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार, लाइन बाजार थाना क्षेत्र के लौकरी परियावां निवासी नरोत्तम राजभर ने जफराबाद थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई कि घटना के दो दिन पूर्व उनके पौत्र नंदलाल से गांव के ही कपड़ा व्यवसायी संदीप सिंह और रतन सिंह का कुल्हड़ से पानी फेंकने पर विवाद हुआ था। 30 मई 2010 को पौत्र नंदलाल राजभर अपने मित्र सोनू राजभर के साथ कचगंाव बाजार में सामान लेने गया था। शाम सात बजे दूसरे पक्ष के संदीप सिंह और रतन सिंह एक दूकान के पास वाली गली में नंदलाल को रोककर गालीगलौज करने लगे।
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इसके बाद संदीप सिंह ने नंदलाल को जोर से पकड़ लिया और रतन सिंह ने चाकू निकालकर उसके पेट में घोंप दिया। नंदलाल की आवाज सुनकर नरोत्तम और आसपास के लोग घटना स्थल पर पहुंचे। हमलावर मौके से भाग चुके थे। घायलावस्था में उसे सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत गंभीर देख चिकित्सक ने वाराणसी के लिए रेफर कर दिया, जहां उपचार के दौरान दूसरे दिन उसकी मौत हो गई।
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इस मामले में पुलिस ने विवेचना करने के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष से सहायक शासकीय अधिवक्ता जवाहरलाल यादव, प्रमोद कुमार दुबे और ज्ञानेंद्र कुमार यादव ने 11 गवाह न्यायालय में प्रस्तुत किया। न्यायाधीश ने सुनवाई के बाद लाइन बाजार थाना क्षेत्र के लौकरी परियावां निवासी संदीप सिंह को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास एवं 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। साथ ही रतन सिंह के नाबालिग होने के कारण उसकी पत्रावली अलग कर दी गई।