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खाता खोलने के तीसरे दिन ही दे दिया लोन
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Wed, 14 Jan 2015 11:27 PM IST
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काशी गोमती संयुत ग्रामीण बैंक की बक्शा शाखा से हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता के नाम से ग्रीनकार्ड तैयार कर फर्जी बैंक खाते से रुपये निकालने के मामले की जांच शुरू हो गई है। बुधवार को बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय के वरिष्ठ प्रबंधक और पुलिस की टीम जांच के लिए बैंक पहुंची। प्रारंभिक जांच में बैंक शाखा के अधिकारियों की भी भूमिका संदिग्ध पाई गई है।
जिस खाते में 4.20 लाख रुपये का लोन स्वीकृत किया गया, वह खाता बैंक में सिर्फ दो दिन पुराना था। खाता खोलने में जिन दो गारंटरों से हस्ताक्षर कराए गए हैं, उसमें से एक ऐसे व्यक्ति को भी गारंटर बना दिया गया है, जिसका बैंक शाखा में कोई खाता ही नहीं है।
इन सब बिंदुओं को जांच अधिकारियों ने गंभीरता से लिया है। प्रकरण की जांच कर रहे बक्शा थाने के सब इंस्पेक्टर सुरेंद्र सिंह ने अधिवक्ता के नाम से जारी ग्रीनकार्ड से संबंधित सभी अभिलेख अपने कब्जे में ले लिया है। उधर दोनों गारंटर घर से फरार बताए गए हैं।
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बुधवार को अखबारों में छपे इस फर्जीवाड़े की खबर से इलाके में खलबली मच गई। पूरे दिन क्षेत्र में इसकी चर्चा रही। काशी गोमती संयुत ग्रामीण बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय के वरिष्ठ प्रबंधक एमपी राय और शिवशंकर लाल सुबह 10 बजे ही बैंक पहुंच गए। अधिकारियों ने मामले की बारीकी से जांच की।
पुराने से पुराने खाताधारकों को महीनों दौड़ाने के बाद भी जिस बैंक में लोन स्वीकृत नहीं किया जाता, उसी बैंक में महज दो दिन पुराने खाताधारक को 4.20 लाख रुपये लोन दे दिया गया। गंगा प्रसाद तिवारी के नाम से 20 दिसंबर 2014 को खाता खोला गया था और उनके खाते में 22 दिसंबर को ही 4.20 लाख का लोन दे दिया गया। जिसमें से खाताधारक ने तीन लाख रुपये उसी दिन और 1.20 लाख रुपये अगले दिन 23 दिसंबर को निकाल लिया।
जांच में यह भी पता चला कि पहले गारंटर दयाशंकर यादव निवासी सड़ेरी बैंक में सुविधादाता के तौर पर काम करते हैं। दूसरे गारंटर दिनेश पुत्र रामफेर खुशहूपुर गांव के निवासी हैं।
दिनेश का बैंक में खाता नहीं है, फिर भी उन्हें गारंटर बना दिया गया। उनके हस्ताक्षर के सामने जो खाता संख्या दर्ज है वह खाता किसी और का है। खाता गंगा प्रसाद तिवारी निवासी खुसहूपुर के नाम से खोला गया है। जबकि इस नाम का व्यक्ति खुसहूपुर गांव में कोई नहीं है। खाता खोलने के लिए फर्जी मतदाता पहचान पत्र का भी इस्तेमाल किया गया है।
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जिस खाते में 4.20 लाख रुपये का लोन स्वीकृत किया गया, वह खाता बैंक में सिर्फ दो दिन पुराना था। खाता खोलने में जिन दो गारंटरों से हस्ताक्षर कराए गए हैं, उसमें से एक ऐसे व्यक्ति को भी गारंटर बना दिया गया है, जिसका बैंक शाखा में कोई खाता ही नहीं है।
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इन सब बिंदुओं को जांच अधिकारियों ने गंभीरता से लिया है। प्रकरण की जांच कर रहे बक्शा थाने के सब इंस्पेक्टर सुरेंद्र सिंह ने अधिवक्ता के नाम से जारी ग्रीनकार्ड से संबंधित सभी अभिलेख अपने कब्जे में ले लिया है। उधर दोनों गारंटर घर से फरार बताए गए हैं।
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बुधवार को अखबारों में छपे इस फर्जीवाड़े की खबर से इलाके में खलबली मच गई। पूरे दिन क्षेत्र में इसकी चर्चा रही। काशी गोमती संयुत ग्रामीण बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय के वरिष्ठ प्रबंधक एमपी राय और शिवशंकर लाल सुबह 10 बजे ही बैंक पहुंच गए। अधिकारियों ने मामले की बारीकी से जांच की।
पुराने से पुराने खाताधारकों को महीनों दौड़ाने के बाद भी जिस बैंक में लोन स्वीकृत नहीं किया जाता, उसी बैंक में महज दो दिन पुराने खाताधारक को 4.20 लाख रुपये लोन दे दिया गया। गंगा प्रसाद तिवारी के नाम से 20 दिसंबर 2014 को खाता खोला गया था और उनके खाते में 22 दिसंबर को ही 4.20 लाख का लोन दे दिया गया। जिसमें से खाताधारक ने तीन लाख रुपये उसी दिन और 1.20 लाख रुपये अगले दिन 23 दिसंबर को निकाल लिया।
जांच में यह भी पता चला कि पहले गारंटर दयाशंकर यादव निवासी सड़ेरी बैंक में सुविधादाता के तौर पर काम करते हैं। दूसरे गारंटर दिनेश पुत्र रामफेर खुशहूपुर गांव के निवासी हैं।
दिनेश का बैंक में खाता नहीं है, फिर भी उन्हें गारंटर बना दिया गया। उनके हस्ताक्षर के सामने जो खाता संख्या दर्ज है वह खाता किसी और का है। खाता गंगा प्रसाद तिवारी निवासी खुसहूपुर के नाम से खोला गया है। जबकि इस नाम का व्यक्ति खुसहूपुर गांव में कोई नहीं है। खाता खोलने के लिए फर्जी मतदाता पहचान पत्र का भी इस्तेमाल किया गया है।